क्या है प्रोजेक्ट धूप ( Project Dhop ) ?





वर्तमान परिप्रेक्ष्य 

* 9 अप्रैल , 2018 को भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ( FSSAI ; Food Safety & Standards Authority of India ) द्वारा  ' प्रोजेक्ट धूप ' ( Project Dhop ) नामक एक अद्वितीय पहल का सुभारम्भ किया गया |

उद्देश्य 

* इस परियोजना का उद्देश्य देश में विशेषकर युवा लोगों को विटामिन D की पर्याप्त मात्रा में सुनिश्चित करना है |
* इस परियोजना के तहत स्कूलों से उनकी असेंबली / प्रार्थना  ( Assembly ) के समय को परिवर्तित कर उसे सुबह के स्थान पर दोपहर ( मुख्यतः 11 बजे से 1 बजे के मध्य ) में आयोजित करने का आग्रह किया जायेगा |

भागीदार

* FSSAI ने यह परियोजना NCERT, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् ( NDMC ) तथा उत्तरी दिल्ली नगर निगम के स्कूलों के सहयोग से प्रारंभ की है |
* यह परियोजना मक्केंन हेल्थ ( McCann Health ) द्वारा परिकल्पित तथा डेयरी फर्म ' क्वालिटी ' ( Kwality ) द्वारा समर्थित है |

विटामिन D और उसकी उपयोगिता 

* मानव शरीर कि हड्डीयों को मजबूत बनाने एवं अन्य शारीरिक कार्यो के लिए  पर्याप्त मात्रा में विटामिन D की आवश्यकता होती है |
* शरीर की विटामिन D की लगभग 90 प्रतिशत आवश्यकता धूप में पर्याप्त समय तक रहने से तथा 10 प्रतिशत आवश्यकता आहार से पूरी होती है |
* त्वचा में उपस्थित कोलेस्ट्रोल पर सूर्य के प्रकाश की क्रिया से कोलेस्ट्रोल विटामिन D में परिवर्तित हो जाता है |
* उल्लेखनीय है की विटामिन D का रासायनिक नाम केल्सिफेरोल होता है |
* विटामिन D की कमी से बच्चों में रिकेट्स ( Rickets ) तथा वयस्कों में ओस्टियोमैलेसिया ( Osteomalacia ) नामक बीमारी हो जाती है |



निष्कर्ष 
* भारत के अधिकांश भागों में वर्ष पर्यत पर्याप्त मात्रा में धूप होती है , इसके बावजूद देश के विभिन्न शहरोँ में 90 प्रतिशत से अधिक युवाओं में विटामिन D की कमी है |
* विटामिन D की कमी के बहुत से कारण हो सकते है , जैसे सन - स्क्रीन का अधिक प्रयोग , शरीर के अदिकतर हिस्से पुरे दिन वातानुकूलित वातावरण में रहना इत्यादी |
* वास्तव में , मध्यः 11 बजे से 1 बजे तक की धूप मानव शरीर में विटामिन D का स्तर बढाने में सबसे अधिक लाभदायक होती है, क्योंकि इस दौरान UVB विकिरण सर्वोत्तम होता है |
* अतः प्रोजेक्ट धूप के अंतर्गत मध्य कालीन प्रार्थना एक नवीन एवं प्रभावी अवधारणा है , जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा की स्कूली बच्चों को धूप के मध्य से विटामिन D पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो |