अंतरिम बजट ( 2019-20 ) |



वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए केन्द्र सरकार का अंतरिम बजट केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री पीयूष गोयल ने, जोकि अरुण जेटली की अस्वस्थता के चलते वित्त मंत्रालय का प्रभार अतिरिक्त प्रभार के रूप में 24 जनवरी, 2019 से सँभाले हुए हैं, 1 फरवरी, 2019 को लोक सभा में प्रस्तुत किया, मोदी सरकार का इस कार्यकाल में यह पाँचवाँ अन्तिम बजट है. लोक सभाई चुनाव निकट होने के कारण अंतरिम बजट ही फिलहाल सरकार ने प्रस्तुत किया है (चुनावोपरांत नई सरकार द्वारा ही इस वित्तीय वर्ष के लिए नियमित बजट पेश किया जाएगा). यह पहला ही अवसर है, जब केन्द्रीय बजट की प्रस्तुति पीयूष गोयल द्वारा की गई. लोक सभाई चुनावों से ठीक पहले प्रस्तुत किए गए इस बजट में किसानों, कामगारों तथा निम्न व मध्यम आय वर्ग को विशेष छूटें एवं राहत प्रदान की गई हैं. किसानों के लिए प्रत्यक्ष आय सहायता की एक नई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि-पीएम किसान जहाँ शुरू की गई है, कम आय वाले असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान धन नाम से एक नई पेंशन योजना शुरू करने की घोषणा इस अंतरिम बजट में की गई है. गोवंश के कल्याण हेतु राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के गठन तथा मछलीपालन के सम्बन्ध में भी एक आयोग के गठन का प्रस्ताव अंतरिम बजट में किया गया है. प्रत्यक्ष करों की संरचना पर नियमित बजट में ही ध्यान देने की बात वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में की है, तथापि रु 5 लाख तक की निवल आय वाले छोटे करदाताओं को आय कर से मुक्त इस बजट में किया गया है (इससे पूर्व रु 2.50 लाख तक की सालाना निवल आय ही आय कर से मुक्त थी). रु 5 लाख से अधिक आय वाले करदाताओं के लिए पुराने टैक्स-स्लैब ही फिलहाल लागू रहेंगे.
बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अपने बजट भाषण में कहा कि हम वर्ष 2022 तक, जब भारत स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करेगा, न्यू इंडिया साकार करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, एक ऐसा भारत जो स्वस्थ एवं स्वच्छ होगा, जहाँ हरेक के पास अपना घर होगा, जिसमें शौचालय होगा और पानी एवं बिजली उपलब्ध होगी, जहाँ किसानों की आमदनी दोगुनी हो चुकी होगी, युवा वर्ग और महिलाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए भरपूर अवसर होंगे तथा जो आतंकवाद, साम्प्रदायिकता, जातिवाद, भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद से मुक्त होगा.


अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति का चित्रण करते हुए वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बताया कि पिछले पाँच वर्षों में भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चमकते सितारे के रूप में मान्यता मिली है। तथा यह वर्तमान में सबसे तेज विकसित होती अर्थव्यवस्था है, जिसकी औसत जीडीपी वृद्धि पिछले पाँच वर्षों के दौरान 1997 में शुरू किए गए आर्थिक सुधारों के बाद किसी भी सरकार द्वारा प्राप्त की गई, सर्वाधिक दर है। वर्ष 2013-14 में विश्व की 11 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से बढ़ते हुए आज भारत विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था है. उच्च वृद्धि दर प्राप्त करने के लिए सरकार ने इन वर्षों में द्विपक्षीय मुद्रास्फीति पर काबू पाया है तथा राजकोषीय सन्तुलन बहाल किया है. दिसम्बर 2018 में मुद्रास्फीति की दर 2.19 प्रतिशत ही रहने का उल्लेख अपने बजट भाषण में उन्होंने किया राजकोषीय घाटे की स्थिति के सम्बन्ध में वित्त मंत्री ने बताया कि इसे 6 वर्ष पूर्व के लगभग 6 प्रतिशत के उच्च स्तर से कम करके 2018-19 में 3.4 प्रतिशत (संशोधित अनुमान) तक लाया गया है. चालू खाता घाटा भी छह वर्ष पूर्व के 5.6 प्रतिशत के उच्च स्तर से घटकर इस वर्ष जीडीपी का 2.5 प्रतिशत ही रहने की सम्भावना है. वित्त आयोग की सिफारिश के चलते केन्द्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने के बावजूद राजकोषीय घाटे पर नियन्त्रण सरकार ने रखा है, स्थिर विनियामक व्यवस्था व सुदृढ़ मूल सिद्धान्तों के चलते विगत पाँच वर्षों के दौरान 239 अरब डॉलर का भारी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश देश में आकर्षित हो सका है. बैंकिंग क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति बहाल करने के लिए है 2.6 लाख करोड़ का निवेश कर इनका पुनः पूँजीकरण किया गया है.