भारत की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन T-18 का सफल परीक्षण | (Train - 18)


भारत की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन T-18 का सफल परीक्षण 29 अक्टूबर, 2018 को हुआ. इसे देश की सबसे तेज गति वाली ट्रेन भी कहा जा रहा है. परीक्षण के दौरान भी इसकी स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटा रही. इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) द्वारा यहाँ सौ करोड़ रुपए की लागत से तैयार देश की पहली इंजन-रहित ट्रेन ‘ट्रेन 18' का रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने अनावरण किया. ट्रेन की पाँच और इकाइयों का निर्माण वर्ष 2019-20 के अंत तक आईसीएफ द्वारा निर्माण किया जाएगा. कुल 16 कोच वाली यह ट्रेन सामान्य शताब्दी ट्रेन के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत कम समय लेगी. भारत ने पहली बार ऐसी ट्रेन का निर्माण किया है और वह भी आईसीएफ ने महज 18 महीने में इस काम को अंजाम दिया है. निर्माण वर्ष 2018-19 के अंदर ट्रेन की एक और इकाई का निर्माण हो जाएगा और चार और इकाइयों का उत्पादन निर्माण वर्ष 2019-20 के अंत तक कर लिया जाएगा. ट्रेन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यात्री ड्राइवर के केबिन के अंदर देख सकते हैं. ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। | और ट्रेन 18 के मध्य में दो एक्जिक्यूटिव कंपार्टमेंट होंगे. प्रत्येक में 52 सीट होंगी, वहीं सामान्य कोच में 78 सीटें होंगी.

ट्रेन-18 की विशेषताएँ -

  • चेन्नई की रेल कोच फैक्ट्री में इन दोनों ट्रेनों का निर्माण मेक इन इंडिया अभियान के तहत् किया जा रहा है.
  • इनके निर्माण की लागत विदेशों से आयातित ट्रेनों की कीमत से आधी होगी. इस ट्रेन में लोकोमोटिव इंजन नहीं होगा. इसकी जगह ट्रेन के हर कोच में ट्रेक्शन मोटर्स लगी होंगी, जिनकी मदद से सभी कोच पटरियों पर दौड़ेंगे.
  • रेल मंत्रालय का दावा है कि इस ट्रेन से सामान्य ट्रेन के मुकाबले यात्रा समय 20 फीसदी तक कम हो जाएगा.
  • ड्राइवर केबिन में मैनेजमेंट सिस्टम होगा, जिससे पायलट ब्रेक और ऑटोमैटिक डोर कंट्रोल को नियंत्रण कर सकेगा.
  • ट्रेन के कोच चेन्नई की इंटिग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार हो चुके हैं। इसमें 14 नॉन एग्जीक्यूटिव कोच होंगे.
  • ट्रेन 18 में प्रति कोच में 78 यात्री बैठ सकेंगे जबकि 2 नॉन एग्जीक्यूटिव कोच होंगे, इसमें प्रति कोच 56 यात्री बैठ सकेंगे.

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