45वां जी-7 शिखर सम्मेलन, 2019 -
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मानव ने नए संसाधनों की खोज एवं दोहन करते हुए विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। परंतु विकास की यह प्रक्रिया संपूर्ण विश्व में एकसमान नहीं रही है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत विश्व के कुछ देशों ने अधिक प्रगति की तो कुछ देश विकास की दौड़ में पीछे रह गए। विकास की दौड़ में अग्रणी देशों ने पारस्परिक आर्थिक हितों की पूर्ति हेतु एक वैश्विक मंच की आवश्यकता पर बल दिया, जिसके फलस्वरूप कथित रूप से विश्व की सात सबसे बड़ी विकसित एवं उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का वर्तमान 'जी-7' समूह अस्तित्व में आया। 'ग्रुप ऑफ सेवन' के नाम से अभिहित इस समूह में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम एवं संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
एक समूह के रूप में 'जी-7' का गठन फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति वलेरी जिस्कार्ड डी' स्टेयिंग (Valery Giscard d'Estaing) के मस्तिष्क की उपज है। उन्होंने वर्ष 1973-74 के तेल संकट (Oil Shock) से उत्पन्न आर्थिक एवं वित्तीय समस्याओं पर चर्चा करने हेतु सर्वप्रथम वर्ष 1975 में विश्व के सर्वाधिक औद्योगिकीकृत विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों के राष्ट्र प्रमुखों को पेरिस के निकट रमबोइलेट (Rambouillet) में एक बैठक में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया। इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, यूनाइटेड किंगडम तथा इटली ने भाग लिया था। वर्ष 1976 में इस समूह में कनाडा के शामिल होने के पश्चात समूह का नाम 'जी-7' हो गया। वर्ष 1998 में रूस के इस समूह में शामिल होने के पश्चात समूह का नाम 'जी-8' हो गया था, परंतु वर्ष 2014 में इस समूह से रूस के निलंबन के पश्चात पुनः यह समूह 'जी-7' बन गया। यह एक अनौपचारिक संगठन है, जिसका कोई मुख्यालय/सचिवालय एवं चार्टर नहीं है। समूह के सदस्य देशों के मध्य इसकी अध्यक्षता चक्रीयvप्रणाली पर घूमती रहती है। इसी क्रम में वर्ष 2019 में 'जी-7' शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता फ्रांस द्वारा की गई।

वर्तमान संदर्भ -

  • 24-26 अगस्त, 2019 के मध्य 45वें 'जी-7' शिखर सम्मेलन का आयोजन दक्षिणी-पश्चिमी फ्रांस के बिआरिट्ज (Biarritz) में किया गया।
  • यह सातवां अवसर है, जब फ्रांस ने इस सम्मेलन की मेजबानी की है।
  • वर्ष 2018 में यह सम्मेलन कनाडा में आयोजित हुआ था, जबकि आगामी (46वां) सम्मेलन वर्ष 2020 में संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित होगा।

शिखर सम्मेलन के प्रतिभागी -

  • जी-7 शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, बुर्किना फासो, चिली, भारत, रवांडा, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के प्रतिनिधियों एवं संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक, ओईसीडी, यूरोपीय यूनियन, अफ्रीकी यूनियन, अफ्रीकी विकास बैंक आदि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
  • सम्मेलन में जी-7 के सदस्य देशों के राष्ट्र प्रमुखों के रूप में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (मेजबान), कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, इटली के प्रधानमंत्री गिउसेपे कोटे (Giuseppe Conte), जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे, यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शामिल हुए।
  • सम्मेलन में यूरोपीय कमीशन के अध्यक्ष ज्यां क्लॉड जंकर (JeanClaude Juncker) ने स्वास्थ्य कारणों से भाग नहीं लिया, जबकि यूरोपीय काउंसिल के वर्तमान अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क सम्मेलन में शामिल हए।

शिखर सम्मेलन में भारत -

  • भारत जी-7 समूह का सदस्य नहीं है, बावजूद इसके जी-7 शिखर सम्मेलन में बिआरिट्ज साझीदार' (Biarritz Partner) के तौर पर भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आमंत्रण पर बिआरिट्ज, फ्रांस का दौरा किया।
  • इस दौरान प्रधानमंत्री ने पर्यावरण, जलवायु, महासागरों और डिजिटल रूपांतरण पर आयोजित सत्रों को संबोधित करने के साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों सहित अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी भाग लिया।
  • बियारिट्ज में जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत ने उन नई पहलों को आवश्यक सहयोग देने पर सहमति व्यक्त की, जिनका लक्ष्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना है।

सम्मेलन का विषय एवं घोषणा-पत्र -

  • इस बार शिखर सम्मेलन में चर्चा का मुख्य विषय "असमानता के खिलाफ लड़ाई" (Fight is against Inequality) था।
  • इस सम्मेलन में असमानता के विरुद्ध संघर्ष, लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तीकरण, अफ्रीका की प्रगति भ्रष्टाचार, डिजिटल रूपांतरण (Transformation), जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता एवं पर्यावरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसके पश्चात एक घोषणा-पत्र जारी किया गया। घोषणा-पत्र के महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं
  • जी-7 देशों ने मुक्त एवं निष्पक्ष विश्व व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके साथ ही जी-7 ने वर्ष 2020 तक OECD के फ्रेमवर्क के अंतर्गत विनियामक बाधाओं को सरलीकृत करने एवं अंतरराष्ट्रीय कराधान प्रणाली को आधुनिक करने के प्रति भी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
  • जी-7 समूह ने ईरान के संबंध में भी घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा कि वे यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त नहीं कर पाए एवं इस क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित हो सके।
  • यूक्रेन के संबंध में चर्चा करते हुए कहा गया कि फ्रांस एवं जर्मनी मूर्त परिणाम प्राप्त करने हेतु शीघ्र ही एक नॉरमैडी प्रारूप शिखर सम्मेलन (Normandy Format Summit) का आयोजन करेंगे।
  • ध्यातव्य है कि नॉरमैंडी फॉर्मेट या नॉरमैंडी फोर (Normandy Four) जर्मनी, फ्रांस, रूस एवं यूक्रेन के वरिष्ठ प्रतिनिधियों का एक राजनयिक समूह है, जिसका उद्देश्य पूर्वी यूक्रेन में युद्ध की समस्या को हल करना है।
  • जी-7 ने लीबिया में शांति स्थापना हेतु युद्धविराम की स्थिति का समर्थन किया।
  • हांगकांग के ताजा घटनाक्रम (संघर्ष) के संबंध में घोषणा पत्र में उल्लेख करते हुए कहा गया कि जी-7 हांगकांग पर वर्ष 1984 के सिनो-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा पत्र के अस्तित्व एवं महत्व की पुष्टि करता है एवं वहां हिंसा की गतिविधियों से बचने का आह्वान है।

सम्मेलन की उपलब्धियां -

  • सम्मेलन में अमेजन वनों की आग पर सार्थक चर्चा हुई, जिसके पश्चात अमेजन वनों की आग की घटना को रोकने हेतु एक योजना प्रस्तुत की गई।
  • इसके अंतर्गत वनों की आग को रोकने हेतु तत्काल वित्तपोषण के अतिरिक्त आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना एवं मध्यम अवधि का वनीकरण कार्यक्रम चलाना प्रमुख उपाय निर्धारित किए गए। इसी प्रकार की पहल उप-सहारा अफ्रीकी
  • क्षेत्र में भी संचालित किए जाने की बात कही गई।
  • यौन हिंसा की शिकार महिलाओं को सहायता प्रदान करने हेतु नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं डेनिस मुकवेगे (Denis Mukwege) एवं नादिया मुराद द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय निधि (फंड) की स्थापना की गई है। जी-7 देश इस निधि (Fund) को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएंगे।
  • इस सम्मेलन में बिजनेस फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ (Business for Inclusive Growth : B4IG) गठबंधन लांच किया गया, जिसका उद्देश्य समावेशी परियोजनाओं का वित्तपोषण है।
  • इस सम्मेलन में अफ्रीकी महिलाओं के सशक्तीकरण हेतु 'AFAWA' 3terfa 'Affirmative Finance Action for Women in Africa' नामक पहल लांच की गई, जिसके अंतर्गत महिलाओं के लिए ऋण प्राप्त करना सुलभ किया जाएगा।
  • सम्मेलन में जैव-विविधता के संरक्षण हेतु जैव-विविधता पर एक चार्टर हस्ताक्षरित किया गया।
  • सम्मेलन में एक गठबंधन प्रारंभ किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य उद्योगों की ऊर्जा दक्षता में सुधार करना एवं "HFCs' (Hydrofluorocarbons) को समाप्त करने के लिए प्रयास करना है।
  • वर्तमान में फैशन उद्योग भी प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत बनता जा रहा है। अत: फैशन उद्योग को सतत (Sustainable) बनाने हेतु सम्मेलन के दौरान एक फैशन पैक्ट' लांच किया गया।

निष्कर्ष -
वर्तमान में जी-7 के सदस्य देश वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत एवं विश्व जनसंख्या के 10 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। यद्यपि कुछ आलोचक इस आधार पर इस संगठन की आलोचना करते हैं कि यह कभी भी प्रभावी नहीं रहा है। वहीं समूह यह दावा करता रहता है कि उसने वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु अनेक कदम उठाए हैं, जिनमें एड्स, टीबी और मलेरिया से लड़ने हेतु वैश्विक कोष की शुरुआत शामिल है एवं वर्ष 2016 के पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने में भी इसकी भूमिका रही है। परंतु वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भुखमरी, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन आदि वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु और सार्थक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में विकसित देशों का यह नैतिक उत्तरदायित्व बन जाता है कि।
वे संपूर्ण विश्व में सतत विकास की प्रक्रिया को बढ़ावा प्रदान करने का प्रयास करें।

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