समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0।

समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0।
भूमिका
भारत में विश्व की लगभग 17 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, लेकिन यहां विश्व के मात्र 4 प्रतिशत ताजे जल के संसाधन (Fresh water resources) ही विद्यमान हैं। वर्तमान में, भारत के 12 प्रमुख नदी बेसिनों के अंतर्गत निवासित लगभग 820 मिलियन लोग जल की अत्यधिक कमी की स्थिति का सामना कर रहे हैं। इनमें से लगभग 495 मिलियन लोग गंगा नदी बेसिन के अंतर्गत आते हैं, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 40 प्रतिशत के लिए उत्तरदायी हैं। जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के निष्पादन (Performance) के आकलन एवं उसमें सुधार के एक उपयोगी साधन के रूप में नीति आयोग ने वर्ष 2018 में समग्र जल प्रबंधन सूचकांक' का पहला संस्करण जारी किया था।

समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (CWMI)
भारतीय राज्यों में प्रभावी जल प्रबंधन को सक्षम बनाने हेतु नीति आयोग ने समग्र जल प्रबंधन सूचकांक का विकास किया है।

  • यह भारत में जल के लिए डाटा-आधारित निर्णय-निर्माण की संस्कृति का सृजन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश में जल प्रशासन एवं प्रबंधन के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक एवं सहकारी संघवाद की भावना को प्रोत्साहित कर सकता है।

समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0
* समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0' 9 विषयों (Nine themes) पर आधारित है, जिनमें शामिल हैं- भू-जल तथा सतही जल पुनर्भरण, प्रमुख तथा मध्यम सिंचाई, जल-संभर विकास, सिंचाई प्रबंधन, खेतों पर जल-प्रयोग, ग्रामीण एवं शहरी जल आपूर्ति और नीति एवं प्रशासन।

  • इन 9 विषयों को पुनः 28 संकेतकों में विभाजित किया गया है।

* समग्र जल प्रबंधन सूचकांक में राज्यों को तीन विशेष समूहों यथा गैर-हिमालयी राज्य, पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों (UTS) में विभाजित किया गया है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य -
* 'समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0' (CWMI 2.0) नीति आयोग द्वारा 23 अगस्त, 2019 को जारी किया गया, जिसमें 25 राज्यों तथा तो केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।
* समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0 में आधार वर्ष 2016-17 के समान संदर्भ वर्ष 2017-18 के लिए विभिन्न राज्यों को स्कोर (Score) प्रदान किए गए हैं।

परिणाम 
* समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0 में गैर-हिमालयी राज्यों में गुजरात ने संदर्भ वर्ष 2017-18 में विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी अपना पहला स्थान बरकरार रखा है।

  • तत्पश्चात क्रमशः आंध्र प्रदेश मध्य प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और तमिलनाडु का स्थान है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में हिमाचल प्रदेश वर्ष 2017-18 में शीर्ष पर रहा।
  • इसके बाद क्रमशः उत्तराखंउ, त्रिपुरा और असम का स्थान है।

* संघ-शासित राज्यों ने पहली बार अपने आंकड़े प्रस्तुत किए है जिसमे पुडुचेरी 39 स्कोर के साथ शीर्ष स्थान पर रहा। उसके बाद दिल्ली का स्थान है, जिसका स्कोर 20 है।
* सूचकांक में 2015-16 एवं 2017-18 के मध्य सूचकांक स्कोर में परिवर्तन के मामले में गैर-हिमालयी राज्यों में हरियाणा तथा पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड शीर्ष पर रहा।
* 'समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2.0' (CWMI 2.0) में विभिन्न राज्यों की रैंकिंग एवं स्कोर -

गैर-हिमालयी राज्यों की रैकिंग एवं स्कोर
स्कोर
2017-18
राज्य
वर्ष
2017-18
वर्ष
2016-17
75
गुजरात
1
1
74
आंध्र प्रदेश
2
3
71
मध्य प्रदेश
3
2
60
गोवा
4
11
59
कर्नाटक
5
4
58
तमिलनाडु
6
7
58
हरियाणा
7
16
56
महाराष्ट्र
8
5
52
पंजाब
9
6
50
तेलंगाना
10
8
47
राजस्थान
11
10
45
केरल
12
12
45
छत्तीसगढ़
13
9
39
ओडिशा
14
13
39
उत्तर प्रदेश
15
15
38
बिहार
16
14
34
झारखंड
17
17






















* सूचकांक में शामिल 27 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से 16 ने निर्धारित 100 अंकों में से 50 अंक से भी कम स्कोर प्राप्त किया है, जिससे वे निम्न प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हैं।
  • जबकि इन निम्न प्रदर्शन करने वाले राज्यों का योगदान देश की कुल जनसंख्या में 48 प्रतिशत, कृषि उपज में 40 प्रतिशत तथा आर्थिक उत्पादन में 35 प्रतिशत है।

पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य
स्कोर
2017-18
राज्य
वर्ष
2017-18
वर्ष
2016-17
67
हिमाचल प्रदेश
1
2
49
उत्तराखंड
2
6
47
त्रिपुरा
3
1
44
असम
4
4
42
सिक्किम
5
3
30
नगालैंड
6
5
26
मेघालय
7
7
22
अरुणाचल प्रदेश
8
लागू नहीं












  • झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार, नगालैंड और मेघालय का स्कोर अभी भी 40 अंक (Point) से कम है और ये विगत तीन वर्षों से निम्न प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हैं।
  • देश के आर्थिक उत्पादन में शामिल शीर्ष 10 योगदानकर्ता राज्यों में से 4 राज्यों यथा-उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल तथा दिल्ली ने 20 अंक से लेकर 47 अंक तक का स्कोर प्राप्त किया है।
  • भारत के शीर्ष 10 कृषि उत्पादक राज्यों में से गुजरात और मध्य प्रदेश को छोड़कर किसी भी अन्य राज्य ने 'समग्र जल प्रबंधान सूचकांक' (CWMI) में 60 अंक से अधिक का स्कोर नहीं प्राप्त किया है।

निष्कर्ष -
  • भारत के विकास और पर्यावरणीय प्रणाली को बनाए रखने तथा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता महसूस करते हुए सरकार ने जल प्रबंधन से अंतर-संबंधित कार्यों के एकीकरण हेतु हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। नवगठित जल शक्ति मंत्रालय ने जल संरक्षण और जल सुरक्षा के लिए जुलाई, 2019 में जल शक्ति अभियान की शुरुआत करके जल चुनौतियों से निपटने का एक सार्थक प्रयास किया है।