SDG जेंडर इंडेक्स।

SDG जेंडर इंडेक्स।
लैंगिक समानता -
लैंगिक समानता (Gender Equality) न केवल मानव का एक मूल अधिकार है, बल्कि एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा सतत विश्व के लिए भी एक आवश्यक आधार है। लिंग के आधार पर विभेद (Discrimination) मानवाधिकारों से संबंधित लगभग प्रत्येक संधि के अंतर्गत प्रतिबंधित है, चाहे वो इंटरनेशनल कोवनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स' (International Covenant on Civil & Political Rights) हो या 'इंटरनेशनल कोवनेंट ऑन इकोनॉमिक, सोशल एंड कल्चरल राइट्स' (International Covenant on Economic, Social & Cultural Rights) हालाकि विश्व के 195 देशों में से 143 देशों ने अपने-अपने संविधान में महिलाओं एवं पुरुषों के मध्य समानता के प्रावधान को स्थान दिया है फिर भी महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव अनेक क्षेत्रों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में अभी भी विद्यमान है।

SDG एवं लैंगिक समानता -

सतत विकास हेतु वर्ष 2030 के एजेंडे में लैंगिक समानता और बालिकाओं एवं महिलाओं के सशक्तीकरण को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। सतत विकास लक्ष्य-5 (SDG-5) मुख्य रूप से लैंगिक समानता की स्थिति को प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसके अतिरिक्त कुल 17 सतत विकास लक्ष्यों में से 14 लक्ष्यों के अंतर्गत ऐसी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक स्थितियों से निपटने संबंधी प्रावधान शामिल हैं, जिनसे लैंगिक असमानता (Gender Inequality) उत्पन्न होती है।

SDG जेंडर इंडेक्स -

- वर्ष 2018 में सतत विकास लक्ष्यों के संदर्भ में लैंगिक समानता के लिए सरकारों का उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूके स्थित संस्था 'ईक्वल मेजर्स 2030° (EM2030 :Equal Measures 2030) द्वारा प्रायोगिक आधार पर 'SDG जेंडर इंडेक्स' (SDG Gender Index) लांच किया गया था।

  • इस प्रायोगिक सूचकांक में सुधार कर वर्ष 2019 में प्रथम SDG जेंडर इंडेक्स, 2019 प्रस्तुत किया गया है।

इंडेक्स, 2019 -
- हाल ही में ईक्वल मेजर्स 2030' द्वारा हारनेसिंग द पॉवर ऑफ डाटा फॉर जेंडर इक्वालिटी' (Harnessing the Power ofdata for Gender Equality) नामक रिपोर्ट जारी की गई।

  • इस रिपोर्ट के अंतर्गत SDG जेंडर इंडेक्स, 2019' प्रकाशित किया गया है।

- यह सूचकांक लैंगिक समानता से संबंधित सतत विकास लक्ष्य-5' (SDG-5) पर तो ध्यान केंद्रित करता ही है, साथ ही कुल 17 सतत विकास लक्ष्यों में से 14 लक्ष्यों के अंतर्गत शामिल उन मुद्दों पर भी प्रकाश डालता है, जो लैंगिक समानता की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
- यह सूचकांक विश्व के 129 देशों में लैंगिक समानता की स्थिति का पता लगाने का सबसे व्यापक साधन है।

  • स्पष्ट है कि, इस प्रकार इस सूचकांक के अंतर्गत विश्व की 95 प्रतिशत बालिकाओं एवं महिलाओं की जनसंख्या आच्छादित है।

- यह सूचकांक स्वास्थ्य, लिंग- आधारित हिंसा, जलवायु परिवर्तन जैसे 51 संकेतकों पर आधारित है।

  • प्रत्येक संकेतक के संबंध में किसी देश को 0-100 के पैमाने पर स्कोर प्रदान किया जाता है, जहां स्कोर : 100' यह प्रदर्शित करता है कि उस संकेतक से संबंधित लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया है।
  • सभी 51 संकेतकों में प्राप्त स्कोर के औसत द्वारा SDG जेंडर इंडेक्स में किसी देश का समग्र स्कोर निर्धारित होता है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु -
  • SDG जेंडर इंडेक्स, 2019 के अनुसार, विश्व के 129 देशों में से कोई भी देश महत्वाकांक्षी 2030 एजेंडे में परिकल्पित लैंगिक समानता के लक्ष्य को पूर्णतः प्राप्त नहीं कर सका है।
  • लैंगिक समानता के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक औसत स्कोर 65.7 है, जो खराब (Poor) की श्रेणी में है।
  • इस सूचकांक में कोई भी देश 90 या उससे अधिक का स्कोर प्राप्त कर उत्कृष्ट (Excellent) की श्रेणी में स्थान नहीं बना सका है।

रैंकिंग -
SDG जेंडर इंडेक्स, 2019 : शीर्ष 5 देश देश
रैंक
देश
स्कोर
1.
डेनमार्क
89.3
2.
फिनलैंड
88.8
3.
स्वीडन
88.0
4.
नॉर्वे
87.7
5.
नीदरलैंड्स
86.8









SDG जेंडर इंडेक्स, 2019 : अंतिम 5 देश देश
रैंक
देश
स्कोर
129.
चाड
33.4
128.
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
38.2
127.
कांगो
44.0
126.
यमन
44.7
125.
नाइजर
44.9








भारत की स्थिति -
SDG जेंडर इंडेक्स, 2019 में भारत (स्कोर : 56.2) 95वें स्थान पर है।
भारत लैंगिक समानता प्राप्त करने के संदर्भ में बहुत खराब' (Very Poor) की श्रेणी में शामिल है।
भारत ने स्वास्थ्य (स्कोर : 79.91), भुखमरी एवं पोषण (स्कोर : 76.20) तथा वहनीय एवं स्वच्छ ऊर्जा (स्कोर : 71.84) के सर्वाधिक अंक अर्जित किए हैं।

निष्कर्ष -
सद्यः रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न देशों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के बावजूद विश्व की लगभग 40 प्रतिशत (1.4 बिलियन) बालिकाएं एवं महिलाएं ऐसे देशों में निवास कर रही हैं, जो लैंगिक समानता प्राप्त करने की दृष्टि से असफल साबित हुए हैं। स्पष्ट है कि विश्व में अभी लैंगिक सामनता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बहुत कुछ किया जाना शेष है।