G-20 शिखर सम्मेलन 2019।

G-20 शिखर सम्मेलन 2019।
मानव सभ्यता के इतिहास में संघर्ष एक अनिवार्य तत्व के रूप में विद्यमान रहा है। यह संघर्ष की चरम परिणति ही थी, जिसके परिणामस्वरूप संपूर्ण विश्व को दो विश्व युद्धों के रूप में भीषण त्रासदी को सहना पड़ा था। वस्तुतः वार्ता एवं संवादहीनता के अभाव में संघर्ष की सामान्य स्थिति भी भयंकर रूप धारण कर लेती है। अतः ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु तथा वैश्विक स्तर पर वार्ता एवं संवाद कायम करने हेतु अंतरराष्ट्रीय मंचों की स्थापना पर जोर दिया गया। परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे मंच अस्तित्व में आए।
इसके पश्चात आर्थिक हितों की पूर्ति हेतु विश्व बैंक एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे आर्थिक संगठन भी अस्तित्व में आए। धीरे-धीरे समय बीतने के बाद जैसेजैसे विकसित देशों की आर्थिक गतिविधियां बढ़ने लगी, वैसे-वैसे विकसित देश अपने आर्थिक हितों की पूर्ति हेतु एक मंच की अनिवार्यता महसूस करने लगे तथा उन्होंने G-7 जैसे विकसित देशों के समूह को स्थापित किया। आगे इन विकसित देशों ने अपने आर्थिक हितों की अभिवृद्धि हेतु विकासशील देशों में वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बल प्रदान किया। परंतु इस वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने जहां अर्थव्यवस्था के विकास के नए द्वार खोले, वहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-दूसरे से प्रभावित होने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

पृष्ठभूमि -

वैश्वीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने का एक उदाहरण एशियाई वित्तीय संकट के रूप में सामने आया। वर्ष 1997-98 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रमुख उभरते बाजार देशों अर्थात प्रमुख विकासशील देशों की सहभागिता की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। तत्पश्चात वर्ष 1999 में G-7देशों के वित्त मंत्री, G-20 देशों के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक की स्थापना हेतु सहमत हुए। इस प्रकार G 20 को G-7 के विस्तार के रूप में देखा जाता है।
G-20 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठकें वैश्विक वित्तीय प्रणाली में प्रमुख देशों के मध्य प्रमुख आर्थिक एवं मौद्रिक नीति के मुद्दों पर केंद्रित थीं। इसका उद्देश्य सभी देशों के लाभ हेतु स्थिर एवं स्थायी वैश्विक आर्थिक विकास प्राप्त करने की दिशा में सहयोग को बढ़ावा देना था। वर्ष 2008 में 'लेहमन ब्रदर्स' के पतन एवं उससे उपजे वैश्विक वित्तीय संकट से निपटने के लिए G-20 वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक को G-20 राष्ट्र प्रमुखों की बैठक के रूप में परिवर्तित कर दिया गया और इसके साथ वैश्विक मंच पर 'G-20' रूपी समूह सशक्त रूप से सामने आया।
G-20 का प्रथम शिखर सम्मेलन नवंबर, 2008 में वाशिंगटन डी.सी. में हुआ तथा सितंबर, 2009 में पिट्सबर्ग में आयोजित हुए तीसरे शिखर सम्मेलन में G-20 को 'अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के प्रमुख मंच' का दर्जा प्रदान किया गया। उसके बाद वर्ष 2010 तक G-20 की बैठकें अर्द्धवार्षिक रूप से तथा वर्ष 2011 से वार्षिक रूप से आयोजित की जाती रहीं। इसी क्रम में वर्ष 2019 में G-20 के 14वें शिखर सम्मेलन का आयोजन जापान में किया गया।


क्या है जी-20?
जी-20 (G-20 : Group of Twenty) अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं वित्तीय व्यवस्था से संबंधित मामलों पर सहयोग एवं परामर्श का एक महत्वपूर्ण अनौपचारिक मंच है। यह वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने हेतु विश्व की प्रमुख विकसित तथा उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर एकत्रित करता है। इसमें सदस्य के रूप में 19 देश तथा यूरोपीय संघ शामिल हैं। इसमें शामिल 19 सदस्य देश हैं अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम एवं संयुक्त राज्य अमेरिका। इसके अतिरिक्त, आमंत्रित अतिथि देशों के नेता और आमंत्रित अतिथि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि जी-20 सदस्यों के नेताओं के साथ शिखर सम्मेलन में भाग लेते हैं।
'वित्तीय बाजारों एवं विश्व अर्थव्यवस्था पर शिखर सम्मेलन' के औपचारिक नाम से ज्ञात G-20 शिखर सम्मेलन ने सुदृढ़ वैश्विक आर्थिक संवृद्धि को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए हैं। 'अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के प्रमुख मंच' के रूप में G-20 वैश्विक जीडीपी के 80 प्रतिशत से अधिक भाग का प्रतिनिधित्व करता है।

उद्देश्य
G-20 के निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य हैं
(1)वैश्विक आर्थिक स्थिरता एवं सतत आर्थिक संवृद्धि प्राप्त करने के लिए अपने सदस्य देशों के मध्य नीतिगत समन्वय स्थापित करना।
(2)जोखिमों को कम करने एवं भावी वित्तीय संकट को रोकने हेतु वित्तीय विनियमन को बढ़ावा देना।
(3)एक नया अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ऑर्किटेक्चर निर्मित करना।

संगठनात्मक संरचना
G-20 एक स्थायी सचिवालय या कर्मचारियों के बिना कार्य करता है। इसकी अध्यक्षता प्रतिवर्ष चक्रीय आधार पर सदस्यों के मध्य स्थानांतरित होती रहती है। यह अध्यक्षता एक त्रिसदस्यीय प्रबंधन समूह-पिछले सम्मेलन का अध्यक्ष, वर्तमान अध्यक्ष एवं आगामी सम्मेलन के अध्यक्ष का हिस्सा होती है। G-20 शिखर सम्मेलन की तैयारी की प्रक्रिया शेरपाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। शेरपा G-20 सदस्य देशों के नेताओं का प्रतिनिधि होता है, जो सम्मेलन के एजेंडे के बीच समन्वय बनाता है। शेरपा गैस् आर्थिक एवं वित्तीय मामलों पर ध्यान केंद्रित करता है।

पिछले G-20 शिखर सम्मेलन
वाशिंगटन डी.सी. (नवंबर, 2008), लंदन (अप्रैल, 2009), पिट्सबर्ग, U.S.A. (सितंबर, 2009), टोरंटो (जून, 2010), सियोल (नवंबर, 2010), कांस (Cannes) , फ्रांस (नवंबर, 2011), लॉस कैबोस, मेक्सिको (जून, 2012), सेंट पीटर्सबर्ग, रूस (सितंबर, 2013), ब्रिसबेन, ऑस्ट्रेलिया (नवंबर, 2014), अंताल्या, तुर्की (नवंबर, 2015), होंगझोऊ, चीन (सितंबर, 2016), हैम्बर्ग, जर्मनी (जुलाई, 2017) एवं ब्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना (नवंबर, 2018)
अगला G-20 शिखर सम्मेलन नवंबर, 2020 में सऊदी अरब के रियाद में, वर्ष 2021 में इटली में एवं वर्ष 2022 में भारत में आयोजित होगा।



जी-20 का 14वां शिखर सम्मेलन
G20 का 14वां शिखर सम्मेलन 28-29 जून, 2019 के मध्य जापान के ओसाका शहर के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र में संपन्न हुआ।
यह प्रथम अवसर था, जब G-20 का शिखर सम्मेलन जापान में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में यूरोपीय संघ समेत सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि नीदरलैंड्स, सिंगापुर, स्पेन तथा वियतनाम ने मेहमान देश के रूप में सम्मेलन में भागीदारी की।
इस सम्मेलन में थाईलैंड ने आसियान अध्यक्ष, मिस्र ने अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष, चिली ने एपेक (APEC) अध्यक्ष एवं सेनेगल ने नेपाड (NEPAD) अध्यक्ष के रूप में भागीदारी की। इसके अतिरिक्त सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, विश्व व्यापार संगठन, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, वित्तीय स्थिरता बोर्ड, ओईसीडी (OECD), एशियाई विकास बैंक एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे संगठनों ने भी भागीदारी की।
इस सम्मेलन के प्रारंभ होने से पूर्व चीन एवं अमेरिका के मध्य छिड़ा ट्रेड वार, भारत एवं अमेरिका के मध्य एक दूसरे की व्यापारिक वस्तुओं के टैरिफ में वृद्धि तथा ईरान एवं अमेरिका के मध्य निरंतर बढ़ता तनाव जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में थे एवं इन पर वार्ता होने की संभावना थी। इसके अतिरिक्त चूंकि इस सम्मेलन की थीम वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश, नवाचार, पर्यावरण और ऊर्जा, रोजगार, महिला सशक्तीकरण, विकास और स्वास्थ्य थे, अतः इन मुद्दों से संबंधित विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई। इस दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के मध्य अनौपचारिक वार्ता हुई एवं सम्मेलन के अंत में 'ओसाका घोषणा-पत्र' जारी किया गया।

ओसाका घोषणा-पत्र
परस्पर विरोधी मतों के लोगों का एक मंच पर बैठकर साझा घोषणा-पत्र तैयार करना अत्यंत ही कठिन है। फिलहाल G-20 के सदस्य देशों ने आपसी सहमति बनाकर शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन एक घोषणा-पत्र जारी किया। इस घोषणा पत्र में G-20 के संयुक्त उद्देश्य के अंतर्गत सतत विकास के लिए एजेंडा-2030 में परिकल्पित लक्ष्यों के अनुरूप एक समावेशी एवं सतत विश्व के निर्माण का लक्ष्य प्राप्त करना एवं वैश्विक आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने को सर्वाधिक प्राथमिकता के रूप में स्वीकार किया गया। G-20 के सदस्य देश वैश्विक समुदाय के समक्ष आम चुनौतियों का सामना करने हेतु संकल्पित हैं। इन चुनौतियों में आतंकवाद, विस्थापन, गरीबी, डेटा प्रवाह, भूख और स्वास्थ्य खतरे, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और लैंगिक समानता आदि शामिल हैं।

घोषणा-पत्र में शामिल कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं
  • सुदृढ, सतत, संतुलित एवं समावेशी विकास को प्राप्त करने के लिए सभी नीतिगत साधनों का उपयोग करने तथा नकारात्मक जोखिमों से बचाव करने पर बल दिया गया। इसके लिए लचीली एवं विकासपरक राजकोषीय नीति निर्मित करने, आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करने वाली मौद्रिक नीति निर्मित करने एवं संरचनात्मक सुधारों के निरंतर कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्धता जताई गई।
  • वृद्ध समाज में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए, उम्रवृद्धि (Aging) और वित्तीय समावेशन पर G-20 फुकुओका नीति संबंधी प्राथमिकताओं का समर्थन किया गया।
  • विश्व व्यापार संगठन के कार्यों में आवश्यक सुधार हेतु समर्थन की पुष्टि की गई। साथ ही त्सुकुबा (Tsukuba) में व्यापार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था पर आयोजित G-20 मंत्रिस्तरीय वक्तव्य का स्वागत किया गया।
  • डिजिटलाइजेशन के माध्यम से समावेशी, सतत, सुरक्षित, विश्वसनीय एवं नवप्रवर्तनशील समाज के लक्ष्य को प्राप्त करने एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया गया। साथ ही समूह का उद्देश्य डाटा की पूर्ण क्षमता का दोहन करने हेतु अंतरराष्ट्रीय नीति चर्चाओं को बढ़ावा देना है।
  • सम्मेलन में विश्वास के साथ निर्बाध डाटा प्रवाह (Data Free Flow with Trust) के विचार को प्रसारित किया गया।
  • गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना निवेश पर बल दिया गया।
  • डिजिटल डिवाइड को कम करने एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा समाज के विशेष रूप से कमजोर समूहों के बीच डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
  • वैश्विक वित्तीय सुरक्षा जाल को अधिक मजबूत करने के वादे की पुष्टि की गई तथा इस दिशा में IMF एवं विश्व बैंक समूह के प्रयासों की सराहना की गई।
  • विश्व स्तर पर निष्पक्ष, टिकाऊ और आधुनिक अंतरराष्ट्रीय कर प्रणाली के लिए सहयोग की पुष्टि की गई।
  • 'फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स' (FATF) व्याख्यात्मक नोट एवं दिशा-निर्देश को अपनाने का स्वागत किया गया। साथ ही वित्तीय सुधारों के पूर्ण, समयबद्ध और सुसंगत कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की गई।
  • संबंधित अंतरराष्ट्रीय उपकरणों और तंत्रों के बीच ताल-मेल को सुदृढ़ करते हुए 'G-20 एंटी-करप्शन एक्शन प्लान, 2019-2021' को लागू करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार को रोकने हेतु वैश्विक प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की गई।
  • घोषणा-पत्र में रोजगार सृजन और लचीली कार्य व्यवस्था को बढ़ावा देने, रोजगार की गुणवत्ता बढ़ाने, बाल श्रम का उन्मूलन करने, मानव तस्करी एवं आधुनिक दासता को रोकने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। महिला सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए महिलाओं एवं बालिकाओं की शिक्षा एवं प्रशिक्षण को समर्थन प्रदान करने की घोषणा की गई।
  • जलवायु परिवर्तन के संबंध में वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए पेरिस समझौते के अनुसार, शमन और अनुकूलन दोनों के संबंध में विकासशील देशों की सहायता के लिए वित्तीय संसाधन प्रदान करने के महत्व पर बल दिया गया।
  • ऊर्जा प्रणालियों को सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ एवं ग्रीन हाउस गैसों का कम उत्सर्जन करने वाली प्रणालियों में रूपांतरित करने हेतु '3E+S" (ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक दक्षता एवं पर्यावरण+सुरक्षा) का अनुभव कराने वाले ऊर्जा संक्रमणों के महत्व को स्वीकार किया गया।
  • समुद्री प्रदूषण को दूर करने एवं समुद्री पर्यावरण के संरक्षण हेतु कदम उठाए जाने का भी समर्थन किया गया।

G-20 सम्मेलन और भारत
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय ओसाका शिखर सम्मेलन में भागीदारी की। भारत की ओर से पूर्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु को G-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री का शेरपा नियुक्त किया गया था। इस शिखर सम्मेलन के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने अपने प्रमुख साझेदार देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय तथा विश्व के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाएं की।
प्रधानमंत्री ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ रूस, भारत और चीन (RIC) के अनौपचारिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तथा ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) एवं जेएआई (जापान, अमेरिका और भारत) के नेताओं की अनौपचारिक बैठकों में भाग लिया।
G-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अपने अभिभाषण में डिजिटल तकनीक के अधिकतम उपयोग हेतु '5-1' विजन को प्रस्तुत किया। इस विजन में '5-1' समावेशी (Inclusiveness), देशीकरण (Indigenisation), नवाचार (Innovation), अंतरराष्ट्रीय सहयोग (International Cooperation) एवं अवसंरचना में निवेश (Investment in Infrastructure) को प्रदर्शित करते हैं। परंतु भारत ने ओसाका घोषणा-पत्र में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु विश्वास के साथ निर्बाध डाटा प्रवाह' विषय पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। वस्तुतः यह विषय भारत के 'डाटा स्थानीयकरण' के विचार के विपरीत था। इसके साथ ही इस शिखर सम्मेलन में भारत ने आर्थिक अपराधियों और भगोड़ों तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े कोष हेतु अधिक वैश्विक सहयोग की अपेक्षा की है। ज्ञातव्य है कि विगत कुछ वर्षों से भारत में आर्थिक अपराधियों और भगोड़ों की समस्या एक गंभीर मुद्दे के रूप में सामने आयी है।

ब्रिक्स नेताओं की अनौपचारिक बैठक 
G-20 शिखर सम्मेलन से इतर 5 ब्रिक्स देशों के नेताओं ने अनौपचारिक बैठक की। यह बैठक अगले (11 वें) ब्रिक्स सम्मेलन के संबंध में थी। 11वां ब्रिक्स सम्मेलन नवंबर, 2019 में ब्राजीलिया (ब्राजील) में आयोजित होगा। इस बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख किया- विश्व की अर्थव्यवस्था में मंदी और अनिश्चितता, विकास और प्रगति को समावेशी और सतत बनाना तथा आतंकवाद। इन समस्याओं के निराकरण हेतु प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों के मध्य ताल-मेल विकसित करने, आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को प्रमुख प्राथमिकता में रखने, विश्वभर में कुशल कारीगरों का आवागमन सरल करने एवं न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा सदस्य देशों के भौतिक और सामाजिक अवसंरचना तथा नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों में निवेश को और प्राथमिकता प्रदान करने जैसे सुझाव दिए।

विभिन्न नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता
RIC की अनौपचारिक बैठक में आतंकवाद विरोधी संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय हॉट-स्पॉट मुद्दे, बहुलवाद, जलवायु परिवर्तन तथा RIC के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, राष्ट्रपति शी जिनपिंग एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा की। वहीं JAI की अनौपचारिक बैठक में प्रधानमंत्री शिंजो अबे, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एवं प्रधानमंत्री मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र, कनेक्टिविटी सुधार एवं अवसंरचना विकास के मुद्दे पर बातचीत की गई। वहीं अमेरिका के साथ बैठक में आपसी हितों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ 5G रक्षा, सुरक्षा एवं व्यापार पर विशेष रूप से चर्चा की गई। जापान के साथ चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जापान से आपदा के बाद पुनर्वास हेतु देशों का गठबंधन बनाने के प्रस्ताव पर समर्थन मांगा। बैठक के दौरान भारत और जापान ने रक्षा, अवसंरचना, अंतरिक्ष, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप के अलावा कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
G-20 बैठक के दौरान भारत और इंडोनेशिया के नेताओं के मध्य मुलाकात भी हुई। इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने अर्थव्यवस्था, रक्षा तथा समुद्री सुरक्षा में भी आपसी सहयोग बढ़ाने के विषय पर चर्चा की। भारत और इंडोनेशिया ने अगले 6 वर्षों यानी वर्ष 2025 तक दोनों देशों के बीच व्यापार 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मोदी ने G-20 शिखर सम्मेलन में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से भी मुलाकात की।

निष्कर्ष
G-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ओसाका (जापान) पहुंचे प्रत्येक नेता का अपना तय एजेंडा था। जिस प्रकार की पृष्ठभूमि में इस सम्मेलन की शुरुआत हुई थी, उससे इसकी सफलता के प्रति बहुत उम्मीद नहीं रखी जा सकती थी। चीन-अमेरिका का ट्रेड वॉर, ईरान अमेरिका का संकट एवं भारत-अमेरिका टैरिफ व्यापार से संबंधित विषम परिस्थितियों के बावजूद यह सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ एवं इसके नतीजों से संतुष्ट हुआ जा सकता है।
तमाम नकारात्मकताओं को दरकिनार करते हुए यह दो दिवसीय सम्मेलन न केवल गंभीर विचारविमर्श का केंद्र बना, बल्कि इसने निराशा के माहौल में आशाओं के दीप जलाए। किंतु जैसे-जैसे वैश्वीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे विभिन्न मुद्दे और जटिल होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में विभिन्न वैश्विक
चुनौतियों का समाधान करते हुए एक समावेशी एवं टिकाऊ विश्व का निर्माण करने की दिशा में G-20 एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकता है। अतः भविष्य में G-20 को इस दिशा में पूरे मन से कारगर प्रयास करने हेतु प्रयासरत होना चाहिए।