मरुस्थलीकरण से निपटने को यूएन कन्वेंशन के पक्षों का 14वाँ सम्मेलन (CoP-14)।

मरुस्थलीकरण से निपटने को यूएन कन्वेंशन के पक्षों का 14वाँ सम्मेलन (CoP-14)

मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र समझौते (United Nations Convention to Combat Deserti fication-UNCCD) में शामिल देशों का 14वाँ सम्मेलन (Conference of parties-CoP-14) ग्रेटर नोएडा में 2-13 सितम्बर, 2019 को सम्पन्न हुआ,
नई दिल्ली के लिए निर्धारित इस सम्मेलन की बैठकें ग्रेटर नोएडा में आयोजित की गई. इसका उदघाटन केन्द्रीय पर्यावरण मन्त्री श्री प्रकाश जावडेकर ने 2 सितम्बर को किया, 196 देशों के 7000 से अधिक प्रतिनिधियों, जिनमें लगभग 100 देशों के मन्त्री भी शामिल थे, ने इस सम्मेलन में भाग लिया तथा मरुस्थलीकरण की रोकथाम एवं मृदा की उत्पादकता बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन एवं सूखे जैसी समस्याओं से निपटने के लिए उपायों एवं पहलों पर परिचर्चा इस सम्मेलन में की गई. यह पहला ही अवसर था जब 1994 में स्थापित UNCCD के सम्मेलन का आयोजन भारत में हुआ. इसी के साथ अगले दो वर्षों के लिए कॉप की अध्यक्षता अब भारत के पास आ गई है.

प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस सम्मेलन को 9 सितम्बर को सम्बोधित किया. अपने इस सम्बोधन में श्री मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का नकारात्मक प्रभाव पूरा विश्व महसूस कर रहा है. इस समस्या से निपटने के लिए विश्व भर के नेताओं के योगदान के लिए आह्वान उन्होंने किया. इस दिशा में भारत द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने बताया कि पिछले 200 वर्षों में पर्यावरण को, जो नुकसान हमने पहुँचाया है, उसकी क्षतिपूर्ति हमें करनी है. इसी सन्दर्भ में देश में अलग से जलशक्ति मन्त्रालय के गठन, बायो-फर्टिलाइजर्स के इस्तेमाल को बढ़ावा, माइक्रो इरीगेशन परियोजनाओं को बढ़ावा दिए जाने तथा 2015-2017 के दौरान देश में वन क्षेत्र में 8 लाख हेक्टेयर की वृद्धि होने आदि का उल्लेख उन्होंने किया.

CoP-14 में प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के सम्बोधन के मुख्य बिन्दु

मृदा की रक्षा हेतु कृषि के तौर-तरीकों में परिवर्तन कृषि के तौर-तरीकों में परिवर्तन
भारत द्वारा किया जा रहा है, जिनके तहत् बायोफर्टिलाइजर्स व माइक्रो-इरिगेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ रसायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने के प्रयास किए जा

2 वर्षों में देश में वन क्षेत्र में 8 लाख हेक्टेयर की वृद्धि
प्रधानमन्त्री श्री मोदी ने अपने सम्बोधन में बताया कि 2015 से 2017 के दौरान देश में वन क्षेत्र में 8 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है

जलशक्ति मन्त्रालय का गठन
जल के बेहतर एवं नियोजित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अलग से जलशक्ति मन्त्रालय का गठन भारत में मई 2019 में किया गया है.

सिंगल यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक का इरादा
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक व इस्तेमाल अगले कुछ वर्षों में बन्द करने की घोषणा श्री मोदी ने अपने इस सम्बोधन में की.

10 दिन तक चले विचार-विमर्श के उपरान्त 13 सितम्बर को सम्मेलन में स्वीकार किए गए दिल्ली घोषणा-पत्र में पर्यावरणीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) वनों की शांति (Peace forest Inititative) तथा भारत में क्षरण का शिकार हुई 50 लाख हेक्टेयर भूमि के प्रोन्नयन के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है, ताकि कन्वेंशन के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके. भूक्षरण की भरपाई को 2030 तक प्राप्त करने के सतत् विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goal-SDG) को राष्ट्रीय लक्ष्य बनाने के प्रति प्रतिबद्धता इसमें व्यक्त की गई है. सैंड एण्ड डस्ट स्टॉर्क्स (SDS) जो COP के 77 प्रतिशत देशों को प्रभावित करते हैं, के विरुद्ध नियन्त्रण हेतु अन्तर्राष्ट्रीय गठबन्धन बनाने की बात इसमें कही गई है.

  • इस सम्मेलन का थीम Restore Land, Sustain Future था.
  • इस सम्मेलन के आयोजन के साथ ही UNNCCD के CoP की अध्यक्षता 2021 तक के लिए अब भारत के पास आई है.
  • UNCCD (United Nations Convention to Combat Desertification) के सम्बन्धित पक्षों (Conference of Parties-CoP) की बैठक 2-2 वर्ष के अन्तराल पर होती है तथा ऐसी पिछले CoP-13 बैठक चीन में ओडोस (Ordos) में सितम्बर 2017 में सम्पन्न हुई थी. जिसके पश्चात् इसकी अध्यक्षता चीन के पास आ गई थी, जो अब COP-14 के साथ ही भारत के पास आई है.