सबसे हल्की वस्तु से मंगल ग्रह रहने योग्य बनेगा |

सबसे हल्की वस्तु से मंगल ग्रह रहने योग्य बनेगा-
मंगल ग्रह को मनुष्य के रहने योग्य बनाने का सपना वैज्ञानिक लम्बे समय से संजोए हुए हैं, लाल ग्रह की प्रतिकूल परिस्थितियाँ, शून्य से 125 डिग्री सेल्सियस नीचे ताप और नगण्य वायुमण्डलीय दाब के कारण यह सपना अब तक अधूरा है, लेकिन अब मंगल को बसाने का तरीका वैज्ञानिकों ने खोज लिया है


ऊष्मा का जबरदस्त रोधक
'सिलिका एयरोजेल' सिलिकॉन और ऑक्सीजन से बना पृथ्वी का अब तक का सबेस हल्का पदार्थ है. यह ठोस है, लेकिन इसकी जटिल संरचना कुछ ऐसी है कि इसमें 97% से अधिक हवा है. यह बेहद हल्का और ऊष्मा का जबरदस्त रोधक है. सिलिका एयरोजेल का इस्तेमाल क्रायोजेनिक इंजनों में द्रवित हाइड्रोजन और द्रवित
ऑक्सीजन वाले टैंकों के ताप अवरोधन के लिए किया जाता है.

मंगल पर नहीं होगी पानी की कमी
मॉडलिंग और प्रयोगों के माध्यम से वैज्ञानिकों ने अपने शोध में साबित किया कि पृथ्वी की तरह ही मंगल ग्रह पर भी सिलिका एयरोजेल की मदद से ग्रीनहाउस गैस इफेक्ट पैदा किया जा सकता है. शोध में बताया गया कि 2 या 3 सेमी मोटी सिलिका एयरोजेल की टाइल प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त रोशनी संचारित कर सकती है.

वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की सबसे हल्की वस्तु 'सिलिका एयरोजेल' मंगल ग्रह को मनुष्य के रहने योग्य बना सकती है. नासा के अनुसार यह पदार्थ मंगल ग्रह पर पृथ्वी जैसा वातावरण तैयार करने में मदद करेगी. उनका कहना है कि पूरे मंगल ग्रह को रहने लायक बनाने के बजाय सिलिका एयरोजेल की मदद से मंगल के उन स्थानों पर, जहाँ फ्रोजन वाटर आइस है, इन्सानों के रहने लायक छोटे-छोटे द्वीप बनाए जा सकते हैं. सिलिका एयरोजेल से मंगल की सतह को गर्म किया जा सकता है.
वैज्ञानिकों ने अपने शोध में दावा किया कि मंगल की सतह पर सिलिका एयरोजेल की पतली परत को बिछाकर वहाँ के तापमान को 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचाया जा सकता है. इससे वहाँ फसलें भी उगाई जा सकेंगी. इस पदार्थ से मंगल ग्रह पर एक स्वयंभू जीवमण्डल का निर्माण किया जा सकता है और इससे इंसानों के रहने लायक गुम्बदनुमा घर बनाए जा सकते हैं.
इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉबिन वर्डसवर्थ ने कहा कि पृथ्वी की धुवीय बर्फ जमे हुए पानी से बनी है, जबकि मंगल के ध्रुवीय बर्फ वाटर आइस और जमे हुए कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण है, जो सूर्य की रोशनी को तो पार होने देते हैं, लेकिन उसकी गर्मी को सोख लेते हैं. इसलिए सिलिका एयरोजेल की एक पतली परत भी मंगल की सतह को गर्म करने में सक्षम है.
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