2019 में ओजोन छिद्र का क्षेत्रफल न्यूनतम : नासा

ओजोन
  • ओजोन एक गैस है, जिसका निर्माण ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं (O) से हुआ है।
  • यह गैस प्राकृतिक रूप से सूक्ष्म मात्राओं (Small amounts) में ऊपरी वायुमंडल (समतापमंडल) में पाई जाती है।
  • ओजोन सूर्य के पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
  • पृथ्वी की सतह के निकट निचले वायुमंडल (क्षोभमंडल) में ओजोन गैस वाहनों के निकास तंत्र से निकले वायु प्रदूषकों, गैसोलीन वाष्प तथा अन्य उत्सर्जनों के मध्य रासायनिक अभिक्रियाओं से निर्मित होती है।
  • मानव निर्मित गैसों जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) के बढ़ते स्तर के कारण ओजोन के नष्ट होने की दर में वृद्धि हुई है, जिससे ओजोन के प्राकृतिक संतुलन में गड़बड़ी उत्पन्न हो गई है।
  • इसका परिणाम यह हुआ है कि समतापमंडल में ओजोन के स्तरों में कमी होने लगी है। ओजोन होल, वास्तव में अंटार्कटिका के ऊपर समतापमंडल में एक ऐसा क्षेत्र है, जहां ओजोन की मात्रा में अत्यधिक कमी दर्ज की गई है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 21 अक्टूबर, 2019 को जारी नासा (NASA) और NOAA (National Oceanic &Atmospheric Administration) के वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में ओजोन छिद्र (Ozone Hole), वर्ष 1982 के बाद सबसे छोटा (Smallest) देखा गया है।

कारण
  • सितंबर एवं अक्टूबर, 2019 में अंटार्कटिका के ऊपर, ऊपरी वायुमंडल (Upper Atmosphere) में असामान्य मौसमी परिस्थितियों ने ओजोन रिक्तिकरण (Ozone depletion) को प्रभावशाली रूप से सीमित कर दिया।
  • सामान्यतः सितंबर व अक्टूबर महीने में ओजोन छिद्र का क्षेत्रफल 8 मिलियन वर्ग मील तक देखा जाता है, लेकिन इस वर्ष (2019 में) 8 सितंबर को ओजोन छिद्र का अधिकतम क्षेत्रफल 6.3 मिलियन वर्ग मील रिकॉर्ड किया गया और सितंबर के अंत व अक्टूबर के प्रारंभ में ओजोन छिद्र का क्षेत्रफल 3.9 मिलियन वर्ग मील से भी कम पाया गया, जो अब तक ओजोन छिद्र का सबसे कम क्षेत्रफल है।
  • पिछले 40 वर्षों में यह तीसरा अवसर है जब मौसमी परिस्थितियों ने ओजोन रिक्तिकरण की प्रक्रिया को सीमित किया है।
  • इसके पूर्व सितंबर, 1988 एवं 2002 में अंटार्कटिका के ऊपर समतापमंडल में ऐसी ही मौसमी परिस्थितियों की वजह से ओजोन छिद्र सामान्य से छोटा पाया गया था।
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