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प्रोजेक्ट-17A का पहला युद्धपोत।

प्रोजेक्ट-17A का पहला युद्धपोत।
प्रोजेक्ट-17
  • स्वदेश में ही स्टील्थ युद्धपोतों (StealthFrigates) को डिजाइन एवं निर्मित करने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना द्वारा प्रोजेक्ट-17 (Project-17) की परिकल्पना की गई थी।
  • स्टील्थ युद्धपोत यानी ऐसे युद्धपोत जिनकी टोह लगाना दुश्मन के लिए आसान नहीं होता।
  • प्रोजेक्ट-17 के अंतर्गत वर्ष 1997 में भारत सरकार ने तीन बहुउद्देशीय स्टील्थ युद्धपोतों के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की थी।
  • प्रोजेक्ट-17 के तहत माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा निर्मित इन युद्धपोतों को 'शिवालिक वर्ग के युद्धपोतों' के नाम से भी जाना जाता है।
  • प्रोजेक्ट-17 के अंतर्गत निर्मित तीनों युद्धपोतों यथा- INS शिवालिक, INS सतपुड़ा तथा INS सह्याद्रि की तैनाती भारतीय नौसेना में हो चुकी है।

प्रोजेक्ट-17A -
  • प्रोजेक्ट-17 के अंतर्गत निर्मित युद्धपोतों की डिजाइन पर आधारित, लेकिन उनकी तुलना में अधिक उन्नत स्टील्थ विशेषताओं तथा स्वदेशी हथियारों से लैस युद्धपोतों का निर्माण वर्तमान में प्रोजेक्ट-17A (Project-17A) के तहत किया जा रहा है।
  • प्रोजेक्ट-17A के तहत कुल 7 युद्धपोतों का निर्माण किया जाना है, जिनमें से 4 पोत माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा तथा 3 पोत गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, कोलकाता द्वारा निर्मित किए जाने हैं।
  • प्रोजेक्ट-17A के तहत निर्मित होने वाले युद्धपोतों की लंबाई 149 मीटर तथा विस्थापन लगभग 6670 टन होगा।
  • ये पोत 28 नॉट की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम होंगे।
  • ये पोत अत्याधुनिक निर्देशित मिसाइलों से लैस होंगे।
  • प्रोजेक्ट-17A के संदर्भ में तकनीकी सलाह प्रदान करने के माध्यम से इटली की पोत निर्माता कंपनी 'फिनकैनतिएरी' (Fincantieri) माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड एवं गार्डनरीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ सहयोग करेगी।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य -
  • 28 सितंबर, 2019 को मुंबई स्थित माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में आयोजित एक समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने INS नीलगिरी का जलावतरण संपन्न किया।
  • ज्ञातव्य है कि INS नीलगिरी प्रोजेक्ट-17A के तहत निर्माणाधीन प्रथम युद्धपोत है।

निर्माण प्रौद्योगिकी
  • प्रोजेक्ट-17A के तहत निर्माणाधीन युद्धपोत, मॉड्यूलर पद्धति (Modular Methodology) के प्रयोग द्वारा भारत में निर्मित किए जा रहे पहले प्रमुख सतही पोत हैं।
  1. मॉड्यूलर पद्धति द्वारा किसी युद्धपोत के निर्माण में सर्वप्रथम सैकड़ों टन वजनी छोटे-छोटे मॉड्यूल या ब्लॉक निर्मित किए जाते हैं तथा अंत में उन्हें एक साथ संयोजित कर दिया जाता है।
  2. पोत निर्माण में मॉड्यूलर पद्धति के प्रयोग का एक लाभ यह है कि छोटे-छोटे ब्लॉकों को अलग-अलग स्थानों में निर्मित किया जा सकता है और इससे समय की भी बचत होती है।
  3. इसके अतिरिक्त, समान डिजाइन के कई पोतों हेतु ब्लॉक एक साथ निर्मित किए जा सकते हैं।

आयुध -
  • निर्माण पद्धति (Construction Methodology) के अतिरिक्त प्रोजेक्ट-17A के तहत निर्माणाधीन पोत वायु रक्षा क्षमताओं के संदर्भ में भी शिवालिक वर्ग के युद्धपोतों की तुलना में कई गुना अधिक उन्नत होंगे।
  • जहां शिवालिक वर्ग के पोतों में मुख्य वायु रक्षक हथियार के रूप में सतह-से-हवा में मार करने वाली रूसी शटिल मिसाइलें (Shtil Missiles) प्रयोग की जाती हैं, वहीं प्रोजेक्ट-17A के तहत निर्माणाधीन पोत सतह-सेहवा में मार करने वाली बराक-8 मिसाइलों से लैस होंगे।
  • उल्लेखनीय है कि बराक-8 मिसाइल भारत एवं इस्राइल का संयुक्त उपक्रम है।
  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें भी प्रोजेक्ट-17A के पोतों पर तैनात की जाएंगी।
  • 127 mm की 'ओटो मेलारा' (Oto Melara) बंदूक भी प्रोजेक्ट17A के पोतों पर तैनात की जाएगी।
  • ज्ञातव्य है कि वर्तमान में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल पोतों पर 76 mm तथा 100 mm की बंदूकें ही तैनात हैं।
सेंसर -
  • प्रोजेक्ट-17A के पोत इस्राइल से प्राप्त MF-STAR रडार से भी लैस होंगे।
  • लंबी दूरी का यह रडार भारतीय नौसेना के कोलकाता वर्ग के विध्वंसक पोतों पर पहले से ही तैनात है।
  • यह रडार लगभग 450 किमी. की दूरी तक स्थित कई लक्ष्यों का एक साथ पता लगा सकता है।

निष्कर्ष -
  • नवीनतम प्रौद्योगिकी से लैस प्रोजेक्ट-17A के युद्धपोत लगातार बदलते अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की नौसेना का प्रभुत्व लगातार बढ़ रहा है, प्रोजेक्ट-17A के पोतों की भूमिका अहम साबित हो सकती है।