ब्रह्मोस मिसाइल  का सफल परीक्षण

वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 17 दिसंबर, 2019 को बालासोर (ओडिशा) से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के दो अलग-अलग परीक्षण संपन्न हुए।
  • एक परीक्षण सतह से जबकि दूसरा परीक्षण वायु आधारित मंच (Air platform)से संपन्न हुआ।
  • ये परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारतीय वायु सेना तथा ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किए गए।

परीक्षणों का विवरण
  • ब्रह्मोस मिसाइल के सतह से मार करने वाले संस्करण (Landattack version) को चांटीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के लांच पैड-3 से दागा गया।
  • जबकि बंगाल की खाड़ी के ऊपर उड़ान भरते भारतीय वायुसेना के सुखाई -30 MKI लड़ाकू विमान से इस मिसाइल के वायु-सैन्य संस्करण (Air Force Variant) का परीक्षण किया गया।
  • लक्ष्यों पर सटीक निशाना साधने की सशस्त्र सेनाओं की क्षमता का परीक्षण करने के उद्देश्य से किए गए ये दोनों परीक्षण सफल रहे।

विगत परीक्षण
  • इसके पूर्व 21-22 अक्टूबर, 2019 को भारतीय वायु सेना द्वारा गतिशील प्लेटफॉर्म (Mobile Platform) से ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के ट्राक द्वीप (Traksland) से मिसाइल को दाग कर 300 किमी. दूर स्थित लक्ष्य पर निशाना लगाया गया।
  • इस परीक्षण फायरिंग का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायु सेना की उच्चतम परिशुद्धता के साथ लक्ष्य को भेदने की क्षमता का परीक्षण करना था।
  • इसके पूर्व 22 मई, 2019 को भी भारतीय वायु सेना ने सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस मिसाइल के वायु से प्रक्षेपित किए जाने वाले संस्करण का परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया था।
  • उल्लेखनीय है कि ब्रह्मोस मिसाइल का यह संस्करण 2.5 टन वजनी है तथा यह वायु से सतह में 300 किमी. की दूरीतक मार करने में सक्षम है।
  • ज्ञातव्य है कि 22 नवंबर, 2017 को पहली बार भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 MKI विमान से विश्व में सबसे तेज गति से मार करने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का उड़ान परीक्षण किया गया था।
  • उल्लेखनीय है कि 2.8 मैक की गति से मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल, सुखोई-30MKI विमान पर तैनात किया जाने वाला सबसे वजनी हथियार है।
  • 22 मई, 2019 को ही भारतीय थल सेना की पूर्वी कमान की एक इकाई द्वारा कार निकोबार द्वीप से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण संपन्न किया गया।
  • यह परीक्षण भारतीय थल सेना, वायु सेना तथा नौसेना के संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास के अंग के रूप में किया गया। 

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • ज्ञातव्य है कि ब्रह्मोस मिसाइल का 500 किमी. की दूरी तक मार करने वाला उन्नत संस्करण भी बन कर तैयार है।
  • उल्लेखनीय है कि ब्रह्मोस मिसाइल के पोत, सतह तथा पनडुब्बी से लांच किए जाने वाले संस्करण भी अस्तित्व में हैं।
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