कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु

भूमिका

  • भारत लगातार अपनी सीमाओं की सुरक्षा व दूरस्थ क्षेत्रों के विकास हेतु प्रयासरत है। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 21 अक्टूबर, 2019 को पूर्वी लद्दाख में कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु का उद्घाटन किया गया। यह पुल इस क्षेत्र में सभी मौसम में कनेक्टिविटी की सुविधा तो प्रदान करेगा ही, साथ ही यह सीमावर्ती क्षेत्रों हेतु भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है

सेतु का विवरण

  • कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा हिमांक परियोजना के तहत श्योक नदी (Shyok River) पर किया गया है। श्योक, सिंधु नदी की सहायक नदी है।
  • दुर्गम इलाके में पुल निर्माण की चुनौतियों को देखते हुए इसे माइक्रो पाइलिंग (Micro Filling) तकनीक द्वारा निर्मित किया गया है।
  • यह 430 मीटर लंबा पुल, कराकोरम और चांग चेनमो पर्वत शृंखलाओं के मध्य स्थित है और यह पूर्वी लद्दाख में दुरखुक और दौलतबेग ओल्डी को जोड़ता है।
  • साथ ही इस पुल के माध्यम से लद्दाख के लोगों तथा जम्मू कश्मीर के सभी आंतरिक क्षेत्रों का शेष भारत से संपर्क स्थापित हो सकेगा।
  • यह पुल लगभग 14650 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है।
  • यह भारत का सबसे ऊंचा बहु-विस्तार स्थायी पुल' (Highest Multi-span Permanent Bridge) है। पुल का नाम कर्नल चेवांग रिनचेन रखा गया है।
  • ज्ञातव्य है कि कर्नल चेवांग रिनचेन भारतीय सेना में उच्च पदस्थ अधिकारी थे, उन्हें दो बार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया है। इन्हें लद्दाख का शेर' (Lionof Ladakh) भी कहा जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • 21 अक्टूबर, 2019 को भारत सरकार द्वारा लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र को पर्यटकों के लिए खोलने की घोषणा की गई।
  • यह घोषणा 'कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु' के उद्घाटन के समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की।
  • ज्ञातव्य है कि सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है।
  • अब पर्यटक सियाचिन बेस कैंप (11000 फीट) से कुमार पोस्ट (15000 फीट) तक यात्रा कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि सियाचिन ग्लेशियर हिमालय के पूर्वी कराकोरम रेंज में स्थित हैं, जो कि प्वॉइंट NJ9842 के उत्तर-पूर्व में है जहाँ भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (LOC) समाप्त होती है।
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