भारतीय नन मरियम थ्रेसिया संत घोषित

भूमिका
  • कैथोलिक ईसाइयत में संत की उपाधि दिए जाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित एवं समय साध्य है।
  • यह प्रक्रिया 13वीं सदी में प्रारंभ हुई थी, जिसे तत्कालीन पोप ने आधिकारिक स्वरूप प्रदान किया था। इस प्रक्रिया में 'संतत्व' घोषित करने के चार चरण होते हैं।
  • प्रत्येक चरण में काफी लिखा-पढ़ी, बहस और जांच होती है।
  • इस प्रक्रिया के तीसरे और चौथे चरण के लिए कम-से-कम एक चमत्कार' का उदाहरण आवश्यक होता है, जो कि उस संत द्वारा या उसकी समाधि पर की गई प्रार्थना द्वारा किसी असाध्य रोग के ठीक
  • होने के रूप में होता है।
  • वेटिकन की एक समिति इस चमत्कार की जांच कर जब इसकी पुष्टि कर देती है, तो पोप वेटिकन के समारोह में संतत्व' की आधिकारिक घोषणा करते हैं।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 13 अक्टूबर, 2019 को रोमन कैथोलिक चर्च के पोप फ्रांसिस ने वेटिकन सिटी स्थित सेंट पीटर्स स्क्वॉयर में आयोजित एक विशेष प्रार्थना सभा में भारतीय नन मरियम थ्रेसिया (Mariam Thresia) सहित 5 व्यक्तियों को संत घोषित किया।

मरियम थ्रेसिया
  • मरियम थ्रेसिया ने  केरल के त्रिशूर (Thrissur) में मई. 1914 में 'कोन्ग्रिगेशन ऑफ द सिस्टर्स ऑफ द होली फैमिली' की स्थापना की
  • ध्यातव्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 सितंबर, 2019 को अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में सिस्टर मरियम थ्रेसिया को पोप द्वारा संत घोषित किए जाने का उल्लेख किया था।
  • उल्लेखनीय है कि मरियम थ्रेसिया सहित साइरो मालाबार चर्च (केरल) के कुल 4 व्यक्तियों को अब तक संत घोषित किया जा चुका है 
  • इस चर्च से संबद्ध तीन अन्य व्यक्ति जिन्हें संत घोषित किया गया है, वे हैं: सिस्टर अल्फोंसा, फादर कुरियाकोस चवारा, तथा सिस्टर यूफ्रेसिया

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • मरियम थ्रेसिया के साथ ही ब्रिटिश कार्डिनल जॉन हेनरी न्यूमैन, स्विस लेवूमन (Swiss Laywoman) माग्युराईट बेज, ब्राजील की सिस्टर डुल्स लोप्स और इतालवी सिस्टर गियुसेपिना वैनीनी को भी संत की उपाधि प्रदान की गई।
  • इस समारोह में विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया।
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