जल संकट से घिरे भारत के बड़े शहर : जल दवाब सूचकांक
भूमिका
  • भारत में विश्व के कुल भू-भाग का 2.45 प्रतिशत तथा कुल जल संसाधन का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा विद्यमान है। देश में वर्षण (Precipitation) से एक वर्ष में उपलब्ध होने वाली जल की मात्रा लगभग 4,000 घन किमी. है। सतही जल तथा पुनर्भरणीय भू-जल (Replenishable Ground Water) की उपलब्धता 1,869 घन किमी. देश में उपलब्ध इस जल संसाधन का केवल 60 प्रतिशत जल ही लभकारी उपयोग में लाए जाने योग्य है। इस प्रकार से, देश में उपलब्ध संपूर्ण जल-संसाधन में से उपयोग में लाए जा सकने वाले जल-संसाधन मात्र 1,122 घन किमी. ही हैं। विश्व की कुल आबादी का लगभग 1.75 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले भारत के लिए उपलब्ध यह जल- संसाधन एक तरह से 'ऊंट के मुंह में जीरा' के समान ही प्रतीत होते हैं।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य 
  • हल ही में लंदन स्थित वैश्विक जोखिम और रणनीतिक परामर्श फर्म वेरिस्क मेप्लक्राफ्ट (verisk meplecroft) द्वारा उप- राष्ट्रीय जल दवाब सूचकांक(sub-national water stress index) जारी किया गया  
  • गौरतलब है कि यह सूचकांक घरों, उद्योगों और कृषि क्षेत्रों की जल खपत दर के साथ-साथ नदियों और झीलों में उपलब्ध जल संसाधन को मापता है।

जल दबाव सूचकांक एवं भारत
  • जल दबाव सूचकांक के अनुसार, भारत जल संकट के संदर्भ में विश्व का 46वां सर्वाधिक जोखिमपूर्ण देश है।
  • सूचकांक के अनुसार, भारत के 20 सबसे बड़े शहरों में से 11 शहर अत्यधिक जोखिम (ExremeRisk) वाली श्रेणी में तथा 7 शहर उच्च जोखिम (High Risk) वाली श्रेणी में शामिल हैं।
  • अत्यधिक जोखिम वाली श्रेणी में भारत के निम्नलिखित 11 शहर शामिल हैं- दिल्ली, चेन्नई, बंगलुरू, हैदराबाद, नासिक, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर, लखनऊ, कानपुर और आगरा।
  • ध्यातव्य है कि 'जलवायु परिवर्तन भेद्यता सूचकांक (Climate Change Vulnerability Index) में भारत को उच्च जोखिम' वाले देशों की सूची में रखा गया है।
  • यह सूचकांक इस बात को भली-भांति स्पष्ट करता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसे कि विस्तारित शुष्क मौसम' देश के शहरों की स्थिति को और बदतर बना सकते हैं।
  • अध्ययन में यह कहा गया है कि आने वाले समय में कई भारतीय शहरों में 1 मिमी. से कम वर्षा होने पर सूखे के दिनों में निरंतर वृद्धि होने का अनुमान है।

भारत विश्व का 13वां सबसे अधिक जल दबावग्रस्त (Water Stressed) देश : विश्व संसाधन संस्थान
  • हाल ही में विश्व संसाधन संस्थान (World Resources Institue) द्वारा ‘एक्वाउक्ट वाटर रिस्क एटलस' (Aqueduct Water Risk Atlas) जारी किया गया।
  • इस एटलस के अनुसार, भारत विश्व के 17 अत्यधिक जल दबाव का सामना करने वाले देशों में 13वें स्थान पर है।
  • इस एटलस के अनुसार, भारत में सतही जल और भू-जल दोनों का अत्यधिक दोहन हुआ है।
  • उत्तरी भारत में वर्ष 1990-2014 के बीच भू-जल के स्तर में प्रति वर्ष 8 सेंटीमीटर से अधिक तक की गिरावट दर्ज की गई है।
  • एटलस के अनुसार, विश्व के 17 देश सर्वाधिक जल दबाव की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
  • ये देश निम्न हैं- कतर, लेबनान, ईरान इस्राइल, जॉर्डन, लीबिया, कुवैत, सऊदी अरब, इरीट्रिया, संयुक्त अरब अमीरात, सैन मरीनो, बहरीन, भारत, पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ओमान तथा बोत्सवाना।
  • इन 17 देशों में से 12 देश मध्य-पूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका के देश है ये गर्म और शुष्क जलवायु वाले देश हैं. जिससे इन देशों में जल की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है।
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