K-4 प्रक्षेपास्त्र परीक्षण


पृष्ठभूमि
  • K-4 प्रक्षेपास्त्र का विकास तब शुरू हुआ जब इसी तरह की क्षमता वाले अग्नि-3 प्रक्षेपास्त्र को INS अरिहंत पर तैनात करने में समस्या उत्पन्न हुई।
  • अरिहंत के पतवार (Hull) का व्यास 17 मीटर होने के कारण इसमें अग्नि-3 प्रक्षेपास्त्र फिट नहीं हो पाता था, इसलिए K-4 प्रक्षेपास्त्र को विकसित किया गया।

K-4 प्रक्षेपास्त्र की विशेषता
  • K-4 SLBM (Submarine Launched Ballistic Missile) पनडुब्बी से प्रक्षेपित किया जाने वाला एक परमाणु हथियार क्षमता संपन्न मध्यम दूरी (Intermediate Range) का प्रक्षेपास्त्र है।
  • यह प्रक्षेपास्त्र मुख्यतः स्वदेश में डीजाईन की गई अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियों पर तैनात होगा।
  • इस प्रक्षेपास्त्र को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित किया जा रहा है।
  • इसकी मारक क्षमता 3500 किमी. है।
  • यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ सकती है।
  • इस प्रक्षेपास्त्र की लंबाई 12 मीटर एवं व्यास 1.3 मीटर है।
  • इसका भार लगभग 17 टन है।

K-4 प्रक्षेपास्त्र के विगत परीक्षण
  • वर्ष 2013 में इस प्रक्षेपास्त्र का एक पांटून (छोटी पनडुब्बी) से प्रक्षेपण होना था, लेकिन अज्ञात कारणों से इसे टाल दिया गया।
  • 24 मार्च, 2014 को इसका पहला सफल परीक्षण समुद्र की 30 मीटर गहराई से विशाखापत्तनम तट से एक पांटून से हुआ था। इस प्रक्षेपण में यह प्रक्षेपास्त्र 3000 किमी. की दूरी तक पहुंचा था।
  • 7 मार्च, 2016 को इस प्रक्षेपास्त्र का एक बार फिर एक पांटून से बंगाल की खाड़ी में परीक्षण किया गया, जो सफल रहा।
  • 31 मार्च, 2016 को विशाखापत्तनम तट से 45 नॉटिकल मील की दूरी पर INS अरिहंत से इस प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण किया गया।

K-4 का वर्तमान परीक्षण
  • 19 जनवरी, 2020 को विशाखापत्तनम तट से K-4 प्रक्षेपास्त्र का प्रक्षेपण किया गया, जो सफल रहा।
  • 24 जनवरी, 2020 को पुनः K-4 प्रक्षेपास्त्र का सफल परीक्षण बंगाल की खाड़ी से किया गया।
  • इस प्रकार भारत ने इस प्रक्षेपास्त्र का एक ही सप्ताह में दो बार परीक्षण कर अपनी सामरिक क्षमता का परिचय दिया है।
  • 24 जनवरी को किया गया परीक्षण पनडुब्बी से प्रक्षेपित की जाने वाली इस बैलिस्टिक मिसाइल का अंतिम विकासात्मक परीक्षण (Last developmental trial) था।
  • इस प्रकार इस मिसाइल के व्यावसायिक उत्पादन एवं सशस्त्र सेनाओं में तैनाती का मार्ग प्रशस्त्र हो गया है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • K-4 पानी के अंदर से प्रक्षेपित होने वाले उन दो स्वदेशी प्रक्षेपास्त्रों में से एक है, जिनका विकास समुदी सामरिक ताकत बढ़ाने के लिए किया गया है। ऐसा ही एक अन्य प्रक्षेपास्त्र सागरिका जिसका कोडनाम K-15 या B-05 है, जो लगभग 750 किमी. की दूरी पर स्थित लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
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