शून्य लागत प्राक्रतिक खेती।

शून्य लागत प्राक्रतिक खेती


वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 9 जनवरी, 2020 को आंध्र प्रदेश सरकार और जर्मन फर्म KFW के मध्य शून्य लागत प्राकृतिक खेती (ZBNF -Zero BudgetNatural Farming) पर समझौता-ज्ञापन (MOU-Memorandum of Understanding) हस्ताक्षरित हुआ।

मुख्य बिंदु
  • आंध्र प्रदेश सरकार के अनुसार, जलवायु लचीली शून्य लागत प्राकृतिक खेती परियोजना पर कुल अनुमानित लागत 1015 करोड़ रुपये है, जिसमें से 711 करोड़ रुपये KFw Zero Budget Natural द्वारा ऋण के माध्यम से तथा शेष 304 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा खर्च किया जाएगा।
  • इस परियोजना के तहत आंध्र प्रदेश सरकार का लक्ष्य 600 गांवों के 2.39 लाख किसानों को शामिल करना है।
  • ध्यातव्य हो वर्ष 2018 में आंध्र प्रदेश सरकार ने वर्ष 2024 तक अपने राज्य में 100 प्रतिशत प्राकृतिक खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया था।

शून्य लागत प्राकृतिक खेती (ZBNF)
  • शून्य लागत प्राकृतिक खेती एक रसायनमुक्त कृषि प्रक्रिया है।
  • मूल रूप से महाराष्ट्र के एक किसान एवं पद्मश्री प्राप्तकर्ता सुभाष पालेकर द्वारा पारंपरिक भारतीय प्रथाओं पर आधारित इस कृषि को बढ़ावा दिया गया।
  • इस विधि में कृषि लागत जैसे कि बीज उपचार (Seed treatment), उर्वरक, कीटनाशक और गहन सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। सामान्य अर्थ में कहें तो, चाहे किसी भी फसल का उत्पादन किया जाए तब भी उसकी लागत शून्य होनी चाहिए। पशुओं के अपशिष्ट यथा गोबर एवं मूत्र से जीवामृत, जनजीवामृत तथा बीजामृत बनाया जाता है कृषि में इनका उपयोग करने से मिट्टी में पोषक तत्वों एवं जैविक घटकों का विस्तार होता है।

ZBNF के चरण
  • शून्य लागत प्राकृतिक खेती को कई चरणों में संपादित किया जाता है। इसके प्रथम चरण में बीजामृत (गाय के गोबर, मूत्र, चूना, बेसन तथा खेत की मृदा आदि से बीज का शोधन करना) बनाया जाता है और फसल की बुआई की जाती है।
  • ZBNF के दूसरे चरण में जीवामृत (गाय के गोबर, गोमूत्र व अन्य जैविक अपशिष्टों का घोल तैयार करके कीटनाशक के रूप में प्रयोग) का छिड़काव किया जाता है।
  • इसके अन्य चरणों में मल्चिंग (जुताई के स्थान पर फसल अवशेष से खेत को ढंकना) और वाफसा (मृदा में नमी एवं वायु की उपस्थिति बनाए रखना) को अपनाया जाता है।

अन्य संबंधित तथ्य
  • आध प्रदेश में इस योजना को लागू करने वाली नोडल एजेंसी रिथु स्वाधिकार समस्थ है तथा कर्नाटक में कर्नाटक राज्य रायथा संघ' इसके लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
  • शून्य लागत प्राकृतिक खेती चरम जलवायु परिस्थितियों जैसे-सूखा, बाद, अपरदन और बंजर भूमि से निपटने और उत्पादन में सुधार करने में सक्षम है।
Previous Post Next Post