वैश्विक राजनयिक सूचकांक, 2019।

वैश्विक राजनयिक सूचकांक, 2019

वैश्विक राजनयिक सूचकांक
  • यह सूचकांक विश्व के 61 देशों (G-20, OECD तथा एशियाई देश/क्षेत्र शामिल) के दूतावासों (Embassies), वाणिज्य दूतावासों (Consulates). FRIH PARTI (Permanent missions) T2T 3THU राजनयिक केंद्रों के विश्व में फैले संजाल (Network) के अध्ययन के आधार पर तैयार किया जाता है।
  • ज्ञातव्य है कि वैश्विक राजनयिक सूचकांक का प्रथम संस्करण मार्च, 2016 में जारी किया गया था, जिसमें G-20 तथा OECD के 42 देशों को शामिल किया गया था।
  • दिसंबर, 2017 में इसका द्वितीय संस्करण जारी किया गया, जिसमें G-20 एवं OECD के देशों के अतिरिक्त 17 एशियाई देशों को भी शामिल किया गया।
  • साथ ही द्वितीय संस्करण में वर्ष 2016 में OECD की सदस्यता ग्रहण करने वाले देश लाटविया को भी जगह मिली।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • वैश्विक राजनयिक सूचकांक, 2019 लोवी इंस्टीट्यूट (Lowy Institute) द्वारा 27 नवंबर, 2019 को जारी किया गया।
  • सद्यः रिपोर्ट इस सूचकांक का तीसरा संस्करण है, जिसमें लिथुआनिया को पहली बार शामिल किया गया है।
  • ज्ञातव्य है कि इस संस्थान की स्थापना वर्ष 2003 में सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में फ्रैंक लोवी (FranicLowy) द्वारा की गई थी।
  • चीन ने वैश्विक राजनयिक सूचकांक, 2019 (GDI - Global Diplomacy Index, 2019) में अमेरिका को पछाड़कर प्रथम स्थान हासिल किया।

सूचकांक के प्रमुख बिदु
  • चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए विश्व में सर्वाधिक राजनयिक केंद्रों (Diplomatic Posts) की स्थापना की।
  • यह चीन की बढ़ती हुई वैश्विक ताकत तथा महत्त्वाकांक्षाओं की ओर संकेत करता है।
  • वर्ष 2019 तक चीन के 276 दूतावास, वाणिज्य दूतावास, स्थायी मिशन तथा अन्य राजनयिक केंद्र विश्व में स्थापित हैं। यह अमेरिका से तीन अधिक है।
  • इस सूचकांक में तीसरा, चौथा एवं पांचवां स्थान क्रमशः फ्रांस, जापान तथा रूस का रहा।
  • इस सूचकांक में भारत का स्थान 12वां रहा।
  • वर्ष 2019 तक विश्व के विभिन्न देशों में भारत के 123 दूतावास उच्चायोग (High Commissions) तथा 54 वाणिज्य दूतावास स्थित थे। वैश्विक राजनयिक सूचकांक, 2019 में G-20 देशों में भारत की रैंक 11वीं तथा एशियाई देशों में तीसरी रैंक थी।

चीन को होने वाले लाभ
  • वैश्विक राजनयिक सूचकांक में शीर्ष रैंक प्राप्त होने के फलस्वरूप चीन को किसी मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO- United Nations Organisations) में समर्थन जुटाना आसान होगा।
  • चीन की वैश्विक पकड़ मजबूत होगी।
  • ज्ञातव्य है कि वर्ष 2016 के इस सूचकांक में चीन, अमेरिका एवं फ्रांस के बाद तीसरे स्थान पर था। • समग्र रैंकिंग के अतिरिक्त चीन को G-20 तथा एशियाई देशों की श्रेणी में भी शीर्ष स्थान हासिल हुआ है।
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