हुन्नीवट्रैप नेशनल लिबरेशन काउंसिल गैर-कानूनी संघ घोषित
भूमिका
  • भारत की आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद एक प्रमुख चुनौती है। इस चुनौती से पूर्वोत्तर भारत का मेघालय राज्य भी अछूता नहीं है। मेघालय राज्य वर्ष 2010-11 से उग्रवाद का सामना कर रहा है। वर्तमान में राज्य में सक्रिय प्रमुख उग्रवादी समूह गारो नेशनल लिबरेशन आर्मी तथा हन्नीवट्रैप नेशनल लिबरेशन काउंसिल है। इनकी हिंसात्मक एवं गैर-कानूनी गतिविधियों को नियंत्रित करने हेतु केंद्रीय सरकार कड़े कदम उठाती रहती है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने हुन्नीवट्रैप नेशनल लिबरेशन काउंसिल' (Hynniewtrep National Liberation Council: HNLC) - कानूनी संघ घोषित कर दिया है।

वर्तमान संदर्भ
  • 16 नवंबर, 2019 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर RNLC एवं संबंधित गुटों एवं संगठनों को गैर-कानूनी संघ (Unlawful Association) घोषित किया।

कारण
  • केंद्रीय सरकार द्वारा उपर्युक्त निर्णय निम्न कारणों से लिया गया-
(i) HNLC ने मेघालय राज्य के खासी और जैतिया जनजातीय बाहुल्य वाले क्षेत्र को भारत से अलग करने का खुलेआम
उद्देश्य घोषित किया है।
(ii) इस संगठन ने अपनी निधि के लिए जबरन धन वसूली, आम नागरिकों को डराना-धमकाना तथा इस कार्य हेतु पूर्वोत्तर के
अन्य विद्रोही समूहों के साथ संपर्क बनाए रखा है।
(iii) इस संगठन ने अपने काडरों के शरण-स्थल तथा प्रशिक्षण हेतु बांग्लादेश में शिविर बनाए हैं।
(iv) यह संगठन 1 जनवरी, 2015 से 31 जुलाई, 2019 की अवधि के दौरान 4 हिंसक घटनाओं तथा 1 आम नागरिक Ministry की हत्या में संलिप्त रहा था।
  • उपर्युक्त गतिविधियां भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए अहितकर हैं तथा यटि इन पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो HNLC पुनः समूह तैयार करेगा और हथियारों से लैस होकर राष्ट्र विरोधी गतिविधियां बढ़ा सकता है।
  • अतः विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 [Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967] की धारा 3 की उपधारा
(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने HNLC तथा इसके सभी गुटों, स्कंधों और अग्रणी संगठनों को 'गैर-कानूनी संघ' घोषित किया।
पूर्वोत्तर में उग्रवादी गतिविधियों से निपटने के उपाय
  • सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में विद्रोही एवं उग्रवादी गतिविधियों से निपटने हेतु बहुआयामी रणनीति अपनाई है।
  • इस द्रष्टिकोण में सुरक्षा उपाय, विकासात्मक कार्य, हिंसा छोड़ने की शर्त पर गुटों के साथ बातचीत करना और राष्ट्रीय जीवन की मुख्यधारा में आने के लिए भारतीय संविधान के ढांचे के भीतर उनकी मांगों का निराकरण करना शामिल है।
  • केंद्र सरकार राज्य प्राधिकारियों को विद्रोह-रोधी अभियानों में सहायता प्रदान करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती करके और खतरे के मूल्यांकन के आधार पर संवेदनशील संस्थानों को सुरक्षा प्रदान करने जैसे विभिन्न उपायों को अपनाकर राज्य सरकारों के प्रयासों में सहायता भी प्रदान कर रही है।

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