सांसद निधि योजना या MPLAD स्कीम
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हाल ही में कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा की कैबिनेट ने भारत में महामारी के मद्देनजर पड़ने वाले बुरे असर को देखते हुए 2020-21 और 2021-22 के लिए सांसदों को मिलने वाले MPLAD फंड को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है। 2 साल के लिए MPLAD फंड के तहत 7900 करोड़ रुपये का उपयोग भारत की संचित निधि में किया जाएगा।' 'उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपालों ने स्वेच्छा से सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है। यह धनराशि भारत के समेकित कोष में जाएगा।'


सांसद निधि योजना की शुरुआत- 

  • सांसद निधि योजना की शुरुआत 23 दिसंबर 1993 को पी. वी. नरसिंहा राव के प्रधानमन्त्री रहते हुए की गयी थी। साल 1993-94 में, जब यह योजना शुरू की गई, तो सहायता राशि केवल 5 लाख रुपये प्रति सांसद थी। साल 1998-99 से इस राशि को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये/सांसद कर दिया गया और वर्तमान में इस योजना के तहत मिलने वाली राशि 5 करोड़ रुपये कर दी गयी है।सांसदों को दी गयी इस राशि का प्रयोग लोक सभा, राज्य सभा और मनोनीत सांसदों द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य कराना है।
फरवरी 1994 तक MPLAD योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय के नियंत्रण में थी लेकिन अक्टूबर 1994 में इसे "सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय" को स्थानांतरित कर दिया गया था।
  • इस योजना के तहत दी जाने वाली राशि सांसद के खाते में नहीं बल्कि सम्बंधित जिले के जिला कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट / डिप्टी कमिश्नर या नोडल अधिकारी के खाते में जमा की जाती है। यह राशि 2,5 करोड़ रुपये की दो किश्तों में भेजी जाती है। सांसद, जिलाधिकारी को बताता है कि उसे जिले में कहाँ-कहाँ इस राशि का इस्तेमाल करना है।
MPLADS योजना के तहत मिली राशि को सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में स्थानीय लोगों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजानिक हित के कार्यों जैसे शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सड़क, लाइब्रेरी इत्यादि में खर्च करता है।इसके अलावा स्थानीय जरूरतों को भी देखते हुए कार्यों के निर्माण पर भी यह राशि प्रयोग में लाई जा सकती है। MPLADS फण्ड से मुख्य रूप से टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण कराया जाता है हालाँकि कुछ नियमों के अनुसार बिना टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण भी कराया जा सकता है।
  • संसद सदस्य, जिस जिले को नोडल जिले के रूप में चुनता है उसकी सूचना “सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय” के साथ-साथ राज्य सरकार और उस जिले के जिलाधिकारी को दी जानी होती है इसके अलावा अगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र एक से अधिक जिले में फैला हुआ है तो संसद सदस्य को किसी भी एक जिले को अपने नोडल जिले के रूप में चुनना पड़ता है
किसी एक सोसाइटी या ट्रस्ट के पूरे जीवनकाल में एक या एक से अधिक कार्यों पर MPLAD फंड से 50 लाख रुपये से अधिक नहीं खर्च किया जा सकता है। यदि कोई सोसाइटी/ट्रस्ट पहले ही 50 लाख से अधिक का खर्च पा चुकी है तो उसे और अधिक राशि नहीं दी जा सकती है। हालाँकि वित्त वर्ष 2012-13 से इस राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया
  • MPLAD स्कीम के तहत किसी भी योजना के लिए स्वीकृत राशि 1 लाख रुपये से कम की नहीं होनी चाहिए। हालांकि, यदि जिला प्राधिकरण चाहे तो जनता के फायदे को ध्यान में रखते हुए कम राशि वाली योजना को मंजूरी दे सकता।
कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए 6 अप्रैल को केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) की बैठक का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (video conferencing) के जरिए कराया गया था। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गयी थी। ये ऐसा पहला मौका है जब मंत्रिमंडल की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित कराई गई है। कैबिनेट में लिए गए इस फैसले को कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ी जाने वाली लड़ाई के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला बोझ कम होगा बल्कि इस धनराशि से समाज के पिछड़े और वंचित तबकों के लिए चलाये जा रहे विकास कार्यों को भी एक सम्बल मिलेगा।

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