वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी सम्मेलन (Global Biotechnology Congress)।

वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी सम्मेलन (Global Biotechnology Congress) -

फरवरी 2016 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'गंतव्य भारत' पर दो दिवसीय वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य भारत की जैव प्रौद्योगिकी ताकत एवं क्षमता को प्रदर्शित करना था। इस समारोह अवसरों और गठबंधनों पर विचार-विमर्श करने के लिये सभी हितधारकों को एक साथ लाने तथा 2020 तक जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिये 100 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को अर्जित करने के लिये एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने का अवसर प्रदान किया।

  • इस सम्मेलन का आयोजन जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology - DBT) द्वारा 26 फरवरी को अपना संस्थापना दिवस मनाने की तैयारी के रूप में भी किया गया। 1986 में अस्तित्व में आने के बाद, पिछले तीस वर्ष देश में जीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी के विकास के लिये महत्त्वपूर्ण रहे हैं और डीबीटी का प्रभाव राष्ट्रीय एवं वैश्विक दोनों स्तरों पर रहा है।
  • इस समारोह का आयोजन करने के लिये विभिन्न स्वायत्तशासी संस्थानों एवं प्रमुख महाविद्यालयों के सहयोग से सभागार भाषणों, बहसों एवं प्रख्यात वैज्ञानिकों और विदेशी विशेषज्ञों के साथ अन्य मुलाकातों समेत वैज्ञानिक गतिविधियों की एक शृंखला आयोजित की गई थी।
  • प्रमुख हितधारकों, व्यक्ति विशेष, संस्थानों (विश्वविद्यालयों सहित), उद्योग एवं समाज के योगदान को प्रदर्शित करने के लिये इस समारोह का आयोजन किया गया था।
  • इस सम्मेलन को आयोजित करने का एक अन्य उद्देश्य 'मेक इन इंडिया' के लिये जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश करने तथा वृद्धि की संभावना के साथ स्टार्टअप कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिये निवेशकों एवं अन्य प्रमुख हितधारकों को आकर्षित करना भी था।
  • इस सम्मेलन में मुख्य रूप से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों- मेक इन इंडिया, जैव उद्यमशीलता का पोषण, स्किल इंडिया, जैव प्रौद्योगिकी अवसरों तथा स्वच्छ भारत एवं स्वस्थ भारत के लिये कदमों पर फोकस किया गया।
  • इस सम्मेलन के दौरान जैव प्रौद्योगिकी सहयोग, समावेशी विकास के लिये जैव प्रौद्योगिकी अन्वेषण, जैव प्रौद्योगिकी एवं समाज तथा अन्य विषय विचार-विमर्श के लिये निर्धारित किये गए थे।
  • इन विचार-विमर्शों से राज्य सरकारों की नीतियों के साथ जैव प्रौद्योगिकी रणनीति के लक्ष्य को समायोजित करने तथा संयुक्त कार्य योजनाएँ तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।