भारत में पर्यावरण आंदोलन का एक संक्षिप्त इतिहास

कुछ प्रमुख आन्दोलन
 

  • चिपको आन्दोलन 

यह एक पर्यावरण रक्षा का आन्दोलन था भारत के उत्तराखंड राज्य के रेणी गडवाल ( उत्तरप्रदेश का भाग ) में किसानो ने वृक्षों की कटाई का विरोध किया था सुन्दरलाल बहुगुणा और चंडीप्रसाद भट्ट इस आन्दोलन के नेता इस आन्दोलन की सबसे उल्लेखनीय विशेषताए महिलाओ की भागीदारी थी यह 1972 में शुरू हुआ था इसकी प्रमुख गोरा देवी थी

  • अप्पिको आन्दोलन 

यह आन्दोलन पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाया गया एक क्रांतिकारी आन्दोलन था यह फिर दूसरे शब्दों में कहे तो उत्तर का चिपको आन्दोलन दक्षिण का अप्पिको आन्दोलन के रूप में उभरकर सामने आया था यह आन्दोलन अगस्त 1983 में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ क्षेत्र में शुरू हुआ था यह वनों की सुरक्षा के लिए कर्नाटक में पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में शुरू हुआ था 

  • विश्नोई आन्दोलन 

आन्दोलन वनों की कटाई के खिलाफ 1700 ईस्वी के आसपास ऋषि सोमजी द्वारा शुरू किया गया था उसके बाद अम्रता देवी ने आन्दोलन को आगे बढ़ाया विरोध में विश्नोई समुदाय के 363 लोग मरे गये थे जब इस क्षेत्र के राजा को विरोध और हत्या का पता चला तो वह गांव गये और माफ़ी मांगी तथा क्षेत्र को सरंक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया विश्नोई आन्दोलन राजस्थान के खेचड़ी गांव से शुरू हुआ था

  • साइलेंट वेली आन्दोलन 

साइलेंट वेली नेशनल पार्क केरल में है केरल की शांत घाटी 89 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है जो अपनी घनी जैव विविधता के लिए मशहूर है 1980 में यह कुंतीपुझ नदी पर एक परियोजना के अन्तर्गत 200 मेगावाट बिजली निर्माण हेतु बांध का प्रस्ताव रखा गया था दबाब में सरकार को 1985 में इसे राष्ट्रीय आरक्षित वन घोषित करना पड़ा 

  • जंगल बचाओ आन्दोलन 

इस आन्दोलन की शुरुआत 1980 में बिहार से हुई थी बाद में यह आन्दोलन झारखण्ड और उड़ीसा तक फ़ैल गया 1980 में सरकार ने बिहार के जंगलो की मूल्यवान सागौन के पेड़ो के जंगल में बदलने की योजना पेश की और इसी योजना के विरुद्ध बिहार के सभी आदिवासी कबीले एकजुट हुए और उन्होंने अपने जंगलो को बचाने के लिए एक आन्दोलन चलाया इसे जंगल बचाओ आन्दोलन का नाम दिया गया था 

  • नर्मदा बचाओ आन्दोलन 

यह आन्दोलन भारत में चल रहे पर्यावरण आन्दोलन की परिपक्वता का उदाहरण है नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बाँध परियोजना का उद्घाटन 1961 में पंडित जवाहरलाल नेहरु ने किया था लेकिन तीन राज्यों गुजरात, मध्यप्रदेश राजस्थान के मध्य एक उपयुक्त जल वितरण निति पर कोई सहमती नही बन पायी 1969 में सरकार ने नर्मदा जल विवाद न्यायधिकरण का गठन किया ताकि जल संबंधी विवाद का हल करके परियोजना का कार्य शुरू किया जा सके पर्यावरणविदो और स्थानीय लोगो ने 1985 से हईड्रो बिजली के उत्पादन के लिए नर्मदा पर बांधो के निर्माण के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया था जिसे नर्मदा बचाओ आन्दोलन के नाम से जाना जाता था मेधा पाटकर इस आन्दोलन की नेता रही जिन्हें अरुधंति रॉय, बाबा आमटे, और आमिर खां का समर्थन मिला 

  • टिहरी बांध विरोधी आन्दोलन 

टिहरी बांध उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में भागीदारी और भिलंगना नदी पर बनने वाला एशिया का सबसे बढ़ा तथा विश्व का 5वॉ सर्वाधिक ऊचांई 260.5 मी. बांध है इसके निर्माण की स्वीकृति 1972में योजना आयोग ने दी थी ऐसा अनुमान है की टिहरी जलविद्युत परिसर के पूर्ण होने पर यहाँ से प्रतिवर्ष 620 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन होगा जो दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रो के लोगो को बिजली तथा पेयजल की सुविधा उपलब्ध करायेगा इस परियोजना का विरोध सुन्दरलाल बहुगुणा तथा अनेक पर्यावरणविदो ने किया इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज द्वारा टिहरी बांध के मूल्यांकन की रिपोर्ट के अनुसार यह बांध टिहरी कस्बे और उसके आसपास के 23 गांव को पूर्णरूप से तथा 72 अन्य गांव को आंशिक रूप से जल देगा जिससे 85600लोग विस्थापित हो जायेगे 

  • मैती आन्दोलन 

मैती एक भावनात्मक पर्यावरण आन्दोलन है उत्तराखंड में जीव विज्ञान के प्राध्यापक कल्याण सिंह रावत की सोच से इस मुहीम की शुरुआत हुई तथा आज वहां के चमोली जनपद में एक अभियान का रूप ले चुकी है "मैती" यानि शादी के समय दूल्हा-दुल्हन द्वारा फलदार पौधों का रोपण मैती शब्द का अर्थ होता है मायका यानि जहां लड़की जन्म से लेकर शादी होने तक अपने माँ-बाप के साथ रहती है जब उसकी शादी होती है टो वह ससुराल अपने मायके में गुजारी यादों के साथ-साथ विदाई के समय रोपित पौधे की मधुर यादों में रोपित करते है                   

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