84वाँ संविधान संशोधन | 84 va samvidhan sanshodhan

84वाँ संविधान संशोधन

भारत के संविधान में एक और संशोधन किया गया।
  • लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में सीटों के पुनर्निर्धारण पर अगले 25 वर्षो (वर्ष 2026 तक) तक के लिये प्रतिबंध बढ़ा दिया गया। इसका उद्देश्य जनसंख्या को सीमित करने के उपायों को प्रोत्साहित करना था।
  • दूसरे शब्दों में लोकसभा तथा विधानसभाओं में सीटों की संख्या को वर्ष 2026 तक वही रखा गया।
  • इस क़ानून द्वारा संविधान के अनुच्छेद 82 और 170(3) की शर्तों में संशोधन किया गया है ताकि वर्ष 1991 की जनगणना के दौरान सुनिश्चित की गयी आबादी के आधार पर प्रत्येक राज्य के लिए आबंटित लोकसभा सीटों और राज़्यों की विधानसभा सीटों की संख्या में कोई परिवर्तन किए बगैर राज्यों में निर्वाचन क्षेत्रों को परिवर्तित तथा पुनर्गठित किया जा सके।
  • इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं।
  • ऐसा विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में आबादी\मतदाताओं की संख्या में अनियमित वृद्धि के कारण पैदा हुए असंतुलन के दूर करने के लिए किया गया है।
  • इससे वर्ष 1991 की जनगणना के दौरान सुनिश्चित की गयी आबादी के आधार पर राज्यों की विधानसभाओं और लोकसभा के लिए आरक्षित, अनुसूचित और जनजाति की सीटों की संख्या भी फिर से निर्धारित की जा सकेगी।
  • यह व्यवस्था की गई कि राज्यों में निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण तथा युक्तिकरण वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर ही होगा।
  • इस संशोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा तथा विधानसभाओं की सीटों की संख्या में वर्ष 2026 ई. तक कोई परिवर्तन न करने का प्रावधान किया गया है।

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