संक्रमिका तथा कोर प्रभाव (Ecotone and Edge Efect) |


संक्रमिका तथा कोर प्रभाव (Ecotone and Edge Efect) |

संक्रमिकाः दो या उससे अधिक विविध समुदायों के मध्य संक्रमण क्षेत्र को संक्रमिका (Ecotone) कहते हैं, जैसे-घास स्थल तथा वन क्षेत्र। इकोटोन क्षेत्र में दोनों क्षेत्रों की विशेषताएँ पाई जाती हैं।

संक्रमिका की विशेषताएँ (Characteristics of Ecotone)

  • यह दो या अधिक पारिस्थितिकी तंत्र का संक्रमण क्षेत्र होता है। इसीलिये यह तनाव का क्षेत्र होता है।
  • एक पूर्ण विकसित इकोटोन में कुछ ऐसे जीव पाए जाते हैं जो आसन्न समुदायों से पूरी तरह अलग होते हैं।
  • संक्रमिका बहुत छोटे क्षेत्र (चारागाह और जंगल के बीच) से लेकर बहुत विशाल क्षेत्र (जंगल और रेगिस्तान के बीच) तक फैला हो सकता है।
कोर प्रभाव (Edge Effect) -कोर प्रभाव एक पारिस्थितिकीय अवधारणा है जहाँ दो पारितंत्र आपस में मिलते हैं वहाँ विशाल विविधता पाई जाती है। इस कोर प्रभाव में जहाँ दो क्षेत्र परस्पर व्याप्त (ओवरलैप) होते हैं वहाँ दोनों क्षेत्रों को प्रजातियाँ पाई जाती हैं। कोर प्रभाव के कुछ उदाहरण हैं -
  • नदी तट के किनारे घास का मैदान।
  • जहाँ पर्वत व घाटी मिलती है।
  • जंगलों के अंतिम बिन्दु।
  • जहाँ एश्चुअरी समुद्र से मिलती है।
कोर प्रभाव क्षेत्र बहुत अधिक विविधता रखते हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
  • (i) दोनों क्षेत्रों के संसाधनों का एक ही स्थान पर पाया जाना।
  • (ii) वायु, तापमान, आर्द्रता, मृदा की नमी, प्रकाश तीव्रता आदि कोर क्षेत्र पर परिवर्तित स्थिति में हैं।
  • (iii) कोर क्षेत्र की विविधता सूक्ष्म जलवायु का निर्माण कर सकती है। जो कि विशिष्ट प्रजातियों को समर्थन दे सकते हैं।
  • (iv) कोर क्षेत्र पर प्रकाश की अधिक उपलब्धता पादपों की तीव्र वृद्धि (अत्यधिक विविधता) में सहायक होती है जिससे उत्पादकता में वृद्धि होती है।
  • (v) पादपों की विविधता में वृद्धि कीड़ों (शाकाहारी कीट) में वृद्धि करती है जिससे पक्षी व अन्य जन्तुओं में भी वृद्धि होती है। प्रकृति में कोर प्रभाव क्षेत्र का परिणाम विविधता तथा उत्पादकता में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है। मैंग्रोव पारिस्थितिकी (भूमि व समुद्र का मिलन स्थल), कोरल पारिस्थितिकी और अन्य उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्र (नदियों के किनारे या सागर में नदियों के मिलन स्थल पर) जैवविविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध होते हैं। प्राचीन या पारंपरिक मानव बस्तियाँ आमतौर पर पारिस्थितिकीय प्रणालियों के बीच तथा उच्च उत्पादक संक्रमण क्षेत्रों में स्थित रही हैं।