जल में घुलनशील विटामिन्स।

जल में घुलनशील विटामिन्स


  • विटामिन बी1 : इसका रासायनिक नाम- 'थाइमीन' है। यह सर्वप्रथम चावल के छिलके से प्रापत किया गया। इसकी कमी से मनुष्य में बेरी-बेरी (Beri-Beri) रोग तथा जानवरों में पालीन्यूराइटिस नामक रोग हो जाता है। बेरी-बेरी से मस्तिष्क का संतुलन बिगड़ जाता है। बेरी-बेरी से मस्तिष्क का संतुलन बिगड़ जाता है, हृदय आहार नाल व पेशियों की क्रियाशक्ति क्षीण हो जाती हैं यह विटामिन कार्बोहाइड्रेट उपापचय के लिए आवश्यक होता है। बेरी-बेरी से तन्त्रिका तन्त्र एवं स्नायु क्षीण हो जाते हैं, जो लकवा (Paralysis) का कारण बनते हैं। अनाजों के छिल्के, दाल, दूध यकृत आदि इस विटामिन के स्रोत हैं।
  • विटामिन बी2 : रासायनिक नाम- रीबोफ्लेविन (Riboflavin) है। इसकी कमी से त्वचा फट जाती है, जीभ में सुजन आ जाती है, नेत्र कमजोर हो जाते हैं. ओठ फटकर सूज जाते हैं। इसकी कमी से फीलोसिस रोग हो जाता है। स्रोत-यकृत मांस, फल, सब्जी आदि।
  • विटामिन बी6 : रासायनिक नाम- पेरिडाक्सिन। यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा के उपापचय को नियन्त्रण करता है। कमी से पेलाग्रा के समान लक्षण उत्पनन हो जाते हैं। कभी-कभी अरक्तता (Anaemia) भी हो जाती है। स्रोत-यकृत, मांस, दूध, मछली, मटर, आदि। इस विटामिन का शरीर  में संश्लेषण बैक्टीरिया आँत में करते हैं।
  • विटामिन बी12 : रासायनिक नाम- कोबालैमाइन। यह न्यूक्लियक अम्ल तथा न्यूक्लिओ प्रोटीन के संश्लेषण में भाग लेता है। इसकी कमी से रक्त क्षीणता (Anaemia) रोग हो जाता है। इस विटामिन में कोबाल्ट नामक तत्व पाया जाता है। स्रोत- यकृत, सुअर का मांस, अण्डा, दूध फल आदि। इसका भी निर्माण आँत में बैक्टीरिया करते हैं।
  • विटामिन सी रासायनिक नाम- एस्कार्बिक अम्ल। यह शरीर में रोग रोधन क्षमता की वृद्धि करता है। इसकी कमी से मसूड़ों में सूजन आ जाती है, इससे रक्त व पस का स्राव होने लगता है, जिसे स्कर्वी (Scurvy) रोग कहते हैं। स्रोत- नींबू सन्तरा, अगूर टमाटर मुसम्मी, आँवला (ऑवला में सर्वाधिक), इमली आदि हैं। नाविकों को ताजे फल एवं सब्जियाँ न मिल पाने के कारण स्कर्वी रोग हो जाता है। ये प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं। भोजन को अधिक पकाने पर ये Vitamin C नष्ट हो जाती है। मनुष्य के द्वारा इसी विटामिन का उत्सर्जन किया जाता है।

वसा में घुलनशील विटामिन्स।