जीवाणु (BACTERIA) -

जीवाणुओं को सर्वप्रथम एण्टनी वान ल्यूवेनहाक (A.V. Leeuwenhock) ने 1676 ई. में देखा था और उसे जंतुक नाम दिया। बैक्टीरिया शब्द का प्रयोग एहरेनबर्ग (Ehrenberg) ने 1200 ई. में किया। लुई पाश्चर (Louis Pasteur) और कोच (Koch) ने यह बताया कि जीवाणुओं से रोग फैलता है।
जीवाणओं के अध्ययन को जीवाणुविज्ञान (bacteriology) कहते हैं। ल्यूवेनहॉक को जीवाणुविज्ञान का जनक कहा जाता है। इनमें राइबोसोम स्वतन्त्र रूप से पाए जाते हैं। जिन जीवाणुओं में क्लोरोफिल पाया जाता है. वे प्रकाशसंश्लेषी (Photosynthetic) या परपोषित होते हैं।
जीवाणु के अनेक रूप होते हैं -
  • कोकाई (Cocci) : गोल
  • बैसीलस (Bacillus): दंडाकार (rodshaped)
  • स्पाइरिला (Spirilla): सर्पिल (Spiral)
  • वाइब्रियो (Vibrio): कॉमा (Comma) की तरह

जीवाणुओं से लाभ:
  • जीवाणु नाइट्रोजन को स्थिर रूप में बनाए रखते हैं, जैसे भूमि में एजोटोबैक्टर (Azotobacter) और क्लोस्ट्रीडियम (Clostridium) तथा लेग्यूमिनेसी कुल के पौधों में राइजोबियम (Rhizobium)।
  • मानव के पाचन तंत्र में पाए जाने वाले जीवाण ई. कोलाई (E. coli) पाचन में सहायक होते हैं।
  • लैक्टोबैसिलस केसिआई (Lactobacillus casei) दूध की शर्करा लैक्टोस को किण्वन द्वारा लैक्टिक अम्ल में बदल देता है, जिससे दूध खट्टा हो जाता है।
  • माइकोकोक्कस तंबाकू के पत्ते में तथा बैसीलस मेगाथीरियम चाय के पत्ते में सुगंध पैदा करते हैं। इनका प्रयोग चमड़े के शोधन (tanning of leather) एवं जूट के रेशों को अलग करने (retting) में भी होता है।
  • जीवाणु द्वारा कई प्रकार की औषधियों का निर्माण होता है।
जैसे-
जीवाणु
प्रतिजैविक
स्ट्रेप्टोमाइसीस वेनेजुएली
क्लोरोमाइसेटिन
स्ट्रेप्टोमाइसीस ग्रिसियस
स्ट्रेप्टोमाइसीन
स्ट्रेप्टोमाइसीस फ्रोडी
नियोमाइसिन
स्ट्रेप्टोमाइसीस रेमोसस
टैरामाइसिन

जीवाणुओं से हानि :
  • स्टेप्टोकोक्कस, स्टेफाइलोकोक्कस आदि से स्रावित विषैले पदार्थ, खाद्य पदार्थ को विषाक्त बना देते हैं।
  • स्पाइरोकीट साइटोफाज कपास के रेशों को नष्ट कर देता है।
  • जीवाणु मिट्टी का विनाइट्रीकरण कर उसकी उर्वरता कम कर देते हैं।

परीक्षा से संबंधित तथ्य -
  • 'जीवाण' की खोज 1676 ई. में एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक द्वारा की गई तथा जीवाणु नाम 1838 ई. में एहरेनबर्ग द्वारा रखा गया।
  • रॉबर्ट कोच (1843-1910 ई.) ने जर्म सिद्धांत (Germ theory) का प्रतिपादन किया तथा कॉलरा एवं तपेदिक के जीवाणुओं की खोज की।
  • लुई पाश्चर (1812-92 ई.) द्वारा दूध के पाश्चुराइजेशन तथा रेबीज के टीके की खोज की गई।
  • जीवाणुओं की आकृति कई प्रकार की होती है।
  • कुछ जीवाणु आकृति में छड़नुमा या बेलनाकार (Bacillus) होते हैं।
  • सबसे छोटे जीवाणुओं का आकार गोलाकार (cocus) होता हैं।
  • कुछ जीवाणुओं का आकार कौमा (,) की तरह होता है। उदाहरण-विब्रियो कॉलेरी।
  • कुछ जीवाणु सर्पिलाकार (Spiral), स्प्रिंग या स्क्रू के आकार के होते हैं।
  • स्वतंत्र रूप से मिट्टी में निवास करने वाले जीवाणु अजोटोबैक्टर, एजोस्पाइरिलम एवं क्लोस्ट्रीडियम मिट्टी के कणों के बीच स्थित वायु के नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (Nitrogen fixation) करते हैं।
  • वायु मंडल में नाइट्रोजन-स्थिरीकरण का कार्य एनाबीना तथा नॉस्टॉक नामक सायनों-बैक्टीरिया द्वारा होता है।
  • मटर के पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन-स्थिरीकरण का कार्य इनके जड़ों में रहने वाले सइजोबियम तथा ब्रैडीराइजोबियम नामक जीवाणुओं द्वारा होता है।
  • दूध को अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए इसका 'पाश्चुराइजेशन करना आवश्यक है। चमड़ा उद्योग में चमड़े से बालों एवं वसा को हटाने का कार्य जीवाणुओं द्वारा होता है। इसे टैनिंग (Tanning) कहा जाता है।
  • जीवाणु कोशिका में Curcular DNA पाया जाता है।
  • वे पदार्थ जो सूक्ष्म जीवों (Micro-organisms) द्वारा उत्पन्न किये जाते हैं तथा सूक्ष्म जीवों को ही नश्ट करते हैं प्रतिजैविक (Antibiotic) कहलाते हैं।
  • एंटीबायोटिक शब्द का इस्तेमाल सर्वप्रथम सेलमन वाक्समैन ने किया।
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