जैव-आवर्द्धन (Biomagnification) -
जैव-आवर्द्धन का अर्थ उस प्रवृत्ति से है जिसमें प्रदूषक जैसे-जैसे एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर जाते हैं वैसे-वैसे उनका सांद्रण भी बढ़ता जाता है। इस प्रकार जैव-आवर्द्धन में आहार श्रृंखला की एक कड़ी से अगली कड़ी में प्रदूषकों का सांद्रण बढ़ता है।
जैव-आवर्द्धन होने के लिये प्रदूषकों में चार तत्त्वों का होना आवश्यक है- दीर्घ स्थायित्व, गतिशीलता, विभिन्न प्रकार की वसा में विलयशीलता व सक्रियता।


इस चित्र में दर्शाया गया है कि DDT किस प्रकार किसी खाद्य श्रृंखला के चार क्रमिक पोषण स्तरों पर जीवों के ऊतकों में सांद्रित होता है। DDT का सांद्रण इसलिये होता है क्योंकि एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर तक गुज़रते हुए इसका उपापचयन व उत्सर्जन अत्यधिक धीमा होता है। अतः DDT वसा में संचित हो जाता है। चित्र में दी गई संख्याएँ ऊतकों में DDT तथा इसके व्युत्पादों के सांद्रण मान (भाग प्रति 10 लाख ppm) को दर्शाती हैं।

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