रेशम कीट पालन (Sericulture)

कच्चे रेशम (प्राकृतिक रेशम) के उत्पादन के लिये रेशमी कीड़ों का पालन करना सेरीकल्चर या सिल्क फार्मिंग कहलाता है।
  • प्राकृतिक रेशम कीट रेशा (Insect Fibre) होता है, जिसे रेशम के कीड़े के कोकून (Cocoon) से प्राप्त किया जाता है। कीट के प्यूपा (Pupa) द्वारा धागे को स्वयं के शरीर पर लपेटने से कोकून का निर्माण होता है।
  • भारत रेशम की सभी पाँचों वाणिज्यिक किस्मों (मलबरी, ट्रॉपिकल टसर, ओक टसर, ईरी और मूंगा) का उत्पादन करने वाला अकेला देश है।
  • मलबरी रेशम के अलावा रेशम के अन्य तीनों प्रकार वन्य सिल्क कहलाते हैं। भारत में सर्वाधिक उत्पादन मलबरी रेशम का होता है।
  • देशी टसर का संस्कृत नाम कोसा सिल्क है।
  • बाफ्टा-टसर एवं कॉटन का मिक्स है।
  • रेशम का धागा एक प्रोटीन संरचना है, जो ताप का कुचालक होता है।
  • कपास एवं जूट प्राकृतिक बहुलक (Polymer) सेल्यूलोज़ से बने होते हैं।
  • मूंगा रेशम का उत्पादन सिर्फ भारत में होता है। प्राकृतिक रेशम के उत्पादन एवं खपत में भारत का दूसरा स्थान है।
  • रेशमी वस्त्र उत्पादक शीर्ष राज्य कर्नाटक तथा असम हैं। ईरी एवं मूंगा का सर्वाधिक उत्पादन असम में होता है।
  • भारत में सबसे अधिक शहतूत रेशम कीट (Bombyx mori) का पालन किया जाता है।
  • रेशम मकड़ियों द्वारा उत्पादित रेशा गॉसमिर कहलाता है


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