मानव विकास रिपोर्ट, 2019 (Human Development Report, 2019) -
जब कभी भी हम विकास के बारे में सोचते हैं, तो हमारी सोच के दायरे में सांसारिक सुख-साधन एवं उसके लिए आर्थिक विकास जैसे पक्ष ही आते हैं। लेकिन अब 21वीं सदी में इस परंपरागत सोच के दायरे से आगे निकलकर एक ऐसी नई सोच पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जो आर्थिक विकास के साथ-साथ विकास को मानवीय उन्नति से भी संबद्ध करती हो।

आर्थिक विकास और मानव विकास में मूलभूत अंतर यह होता है कि जहां आर्थिक विकास के सारे प्रयास 'आय' बढ़ाने पर ही संकेंद्रित होते हैं, वहीं मानव विकास में मानव जीवन के सभी पहलुओं का विकास समाहित होता है। ये पहलू आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक या सांस्कृतिक हो सकते हैं। चूंकि किसी भी देश की वास्तविक परिसंपत्ति उसके मानव संसाधन ही हैं, अतः विकास का लक्ष्य मानव जीवन को साधन एवं सुविधा से संपन्न करना ही होना चाहिए।

यद्यपि मानव विकास को दर्शाने हेतु प्रतिवर्ष अनेक अध्ययन प्रकाशित होते रहते हैं, परंतु 'संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम' (UNDP) द्वारा जारी मानव विकास सूचकांक अधिक प्रामाणिक एवं वास्तविकता के नजदीक माना जाता है। वर्ष 1990 से ही वार्षिक आधार पर प्रकाशित किया जा रहा मानव विकास सूचकांक न केवल देशों की वास्तविक स्थिति को प्रदर्शित करता है, अपितु देशों के विकास संबंधी दंभ को आईना भी दिखाता है तथा उन्हें विकास हेतु सचेत करता है।

इसी श्रृंखला को और आगे बढ़ाते हुए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा 9 दिसंबर, 2019 को 'मानव विकास रिपोर्ट, 2019' (Human Development Report, 2019) जारी की गई। इस रिपोर्ट में जारी 'मानव विकास सूचकांक, 2019' में विश्व के 189 देशों के मानव विकास के स्तर का आकलन करते हुए उन्हें वरीयता क्रम में सूचीबद्ध किया गया है। इस रिपोर्ट में मानव विकास सूचकांक (HDI) के साथ साथ असमानता समायोजित मानव विकास सूचकांक (IHDI), लैंगिक विकास सूचकांक (GDI), बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) तथा लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) भी प्रकाशित किया गया है। इसके अतिरिक्त इस रिपोर्ट में जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, राष्ट्रीय आय, कार्य एवं रोजगार, सुरक्षा, श्रम एवं पूंजी की गतिशीलता आदि पर भी संकेतक प्रस्तुत किए गए हैं।

कैसे होती है गणना?
किसी सूचकांक की वैधता उसके निर्माण हेतु अपनाई गई प्रविधि की विश्वसनीयता पर निर्भर होती है, क्योंकि प्रविधि में बदलाव कर परिणामों को मनोवांछित रूप दिया जा सकता है। 'मानव विकास सूचकांक' भी इसका अपवाद नहीं है। 'लंबे, स्वस्थ एवं रचनात्मक जीवन' के आदर्श से प्रेरित इस सूचकांक के निर्माण हेतु स्वास्थ्य एवं दीर्घजीविता, ज्ञान तथा जीवन निर्वाह स्तर से संबंधित संकेतक यथा- जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, प्रौढ़ साक्षरता तथा प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद लिए गए थे। वर्ष 1990-2009 तक इन्हीं संकेतकों के आधार पर मानव विकास सूचकांक का परिकलन किया जाता रहा। कालांतर में मानव विकास सूचकांक को और अधिक व्यावहारिक स्वरूप देने हेतु मानव विकास रिपोर्ट, 2010' में अनेक बदलाव किए गए।
HDI के आकलन हेतु वर्तमान रिपोर्ट में तीन संकेतकों को शामिल किया गया है-

  • 1. जीवन प्रत्याशा सूचकांक (LEI)- स्वास्थ्य एवं दीर्घजीविता के मापन हेतु जन्म के समय जीवन प्रत्याशा को आधार बनाया गया है।
  • 2. शिक्षा सूचकांक (EI)- यह दो आंकड़ों पर आधारित है :

(i) स्कूल अवधि के औसत वर्ष (Mean Years of Schooling - MYS)- 25 वर्षीय वयस्क द्वारा स्कूल में बिताए गए वर्ष।
(ii) स्कूल अवधि के अनुमानित वर्ष (Expected Years of Schooling -EYS) - 5 वर्षीय बालक द्वारा उसके भावी जीवनकाल में स्कूल में बिताए जाने वाले अनुमानित वर्ष।

  • 3. आय सूचकांक (Income Index-II)- जीवन निर्वाह के आकलन के लिए प्रति व्यक्ति (PPP आधारित) सकल राष्ट्रीय आय (GNI) को लिया गया है।
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