जीएनपी (GNP) क्‍या है?

जीएनपी (GNP) क्‍या है?
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किसी अर्थव्यवस्था में ग्रॉस नेशनल प्रॉडक्ट (GNP) उस आय को कहते है जो जीडीपी में विदेशों से होने वाली आय को जोड़कर हासिल होता है। इसमें देश की सीमा से बाहर होने वाली आर्थिक गतिविधियों को भी शामिल किया जाता है।


विदेशों से होने वाली आय में निम्नांकित पहलू शामिल हैं:

(i) निजी प्रेषण (Private Remittances): भारत के नागरिक दुनिया के दूसरे देशों में काम करते हैं और दुनिया के दूसरे देशों के नागरिक भारत में भी काम करते हैं। इन लोगों के निजी लेनदेन से जो आमदनी होती है उसे निजी प्रेषण से होने वाली आमदनी कहते है। भारत 1990 के दशक की शुरुआत तक हमेशा फायदे में रहा क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय लोग खाड़ी देशों में काम कर रहे थे (हालांकि खाड़ी युद्ध के चलते इसमें भारी कमी देखने को मिली)। इसके बाद भारतीय अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में काम करने के लिए जाते रहे। आज भारत दुनिया में निजी प्रेषण के जरिए सर्वाधिक आमदनी करने वाला देश है। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक 2015 में भारत को इस तरीके से 72 अरब डॉलर की आमदनी का अनुमान है (2013 में भारत को 70 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी, साल में सबसे ज्यादा)। चीन 2014 में 64 अरब डॉलर की आमदनी के साथ दूसरे नंबर पर है।


(ii) विदेशी कर्जे पर व्याज (Interest of the External Loans): ब्याज के भुगतान पर कुल फायदा या नुकसान। इसमें एक स्थिति वह होती जहां एक अर्थव्यवस्था दूसरे देशों को कर्जे पर रकम देता है, तो उसे ब्याज की आमदनी होती है। एक दूसरी स्थिति भी है. जब कोई अर्थव्यवस्था किन्हीं दूसरे देशों से कर्ज लेता है तो उसे ब्याज का भुगतान करना होता है। भारत की इस ब्याज से होने वाली आय इसके ब्याज व्यय से कम होती है क्योंकि इसके द्वारा लिया गया विदेशी कर्ज इसके द्वारा दिए गए ऐसे कर्ज से अधिक है।


(iii) विदेशी अनुदान (External Grants): इसके अंतर्गत भारत द्वारा प्राप्त किए गए एवं दूसरे देशों को दिए गए अनुदान का शेष (Balance) शामिल किया जाता है। काफी निम्न ही सही लेकिन भारत को अन्यान्य विदेशी क्षेत्रों से अनुदान की प्राप्ति होती है (यथा UNDP एवं राष्ट्रों से) जो मूलतः मानवीय आधारों पर दिए जाते हैं। वैश्वीकरण के प्रारंभ के बाद भारत का अनुदान व्यय बढ़ता गया है-यह भारत के राजनयिक प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है जो भारत को अंतर्राष्ट्रीय पहल पर उच्च भूमिका अदा करने के प्रयास से जुड़ा है।

बहरहाल, इन तीनों अलग-अलग मदों से होने वाली आमदनी कुल मिलाकर लाभ में भी हो सकती है और नुकसान में भी हो सकती है। भारत के मामले में यह हमेशा नुकसान वाली स्थिति में होती है क्योंकि भारत पर काफी ज्यादा विदेशी कर्ज है और अनुदान की प्राप्ति घटती गयी है। इसका मतलब यह कि भारत के GNP को हासिल करने के लिए GDP में विदेशों से होने वाली आमदनी जुड़ने के बजाए घटेगी।

सामान्य फॉर्मूले के मुताबिक GNP, GDP+ विदेशों से होने वाली आय के बराबर है। लेकिन भारत के मामले में विदेशों से होने वाली आमदनी के बदले हानि होती है लिहाजा भारत का GNP हमेशा GDP विदेशों से होने वाली आमदनी के बराबर होता है। यानी भारत का GNP हमेशा GDP से कमतर होता है।


GNP के विभिन्न उपयोग इस तरह से हैं:

  • इस राष्ट्रीय आय के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) दुनिया के देशों की रैंकिंग तय करता है। इसके आधार पर आईएमएफ देशों को उनकी क्रय शक्ति तुल्यता (PPP) के आधार पर रैंक करता है।  इस आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीन और यू.एस.ए. के बाद भारत का स्थान है। लेकिन भारतीय मुद्रा के विनिमय दर के आधार पर भारत दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है (आई.एम.एफ., अप्रैल 2016)। अब यह तुलना GDP के आधार पर भी की जाती है।
  • राष्ट्रीय आय को आंकने के लिहाज से GNP, GDP की तुलना में विस्तृत पैमाना है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था की परिमाणात्मक के साथ-साथ गुणात्मक तस्वीर भी पेश करता है। किसी भी अर्थव्यवस्था की आंतरिक के साथ-साथ बाहरी ताकत को भी बताता है।
  • यह किसी भी अर्थव्यवस्था के पैटर्न और उसके उत्पादन के व्यवहार को समझने में काफी मदद करता है। यह बताता है कि बाहरी दुनिया किसी देश के खास उत्पाद पर कितनी निर्भर है और वह उत्पाद दुनिया के देशों पर कितना निर्भर है। यह अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में किसी भी अर्थव्यवस्था को अपने मानव संसाधनों के बारे में, उनकी संख्या और और उनसे होने वाली आमदनी के बारे में बताता है। इसके अलावा यह किसी भी अर्थव्यवस्था के दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के साथ रिश्ते पर भी रोशनी डालता है (यह दुनिया के देशों से लिए कर्जे या फिर दूसरे देशों को दिए कर्जे से पता चलता है)।

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