संवेग संरक्षण का नियम | samveg sanrakshan ka niyam

संवेग संरक्षण का नियम (Law of conservation of momentum)

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'यदि एक या एक से अधिक वस्तुओं के निकाय (System) पर कोई असंतुलित बल कार्य न कर रहा हो तो निकाय का कुल संवेग संरक्षित (Conserve) रहता है। अतः इसे संवेग संरक्षण का नियम कहा जाता है।'

संवेग संरक्षण के नियम के उदाहरण

  • रॉकेट प्रणोदन (Rocket propulsion): रॉकेट का उड़ना न्यूटन के क्रिया-प्रतिक्रिया नियम तथा संवेग संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। रॉकेट का ईंधन (गैसें) जब जलता है तो यह क्रिया (Action) स्वरूप बाहर निकलती है तथा जब ये गैसें ज़मीन से टकराती हैं तो इस क्रिया की प्रतिक्रिया' रॉकेट को ऊपर की ओर धकेलती है।
  • रॉकेट के ईंधन का नियत वेग से दहन होने पर संवेग परिवर्तन की दर भी नियत (Constant) रहती है पर जैसे-जैसे रॉकेट उड़ता है, उससे निकलने वाली गैसों व ईंधन का द्रव्यमान कम होने के कारण, रॉकेट के वेग व त्वरण में वृद्धि हो जाती है। बंदूक से गोली छोड़ते समय बंदूक द्वारा गोली को एक वेग प्रदान कर दिया जाता है, जिससे गोली में आगे की दिशा में एक संवेग उत्पन्न हो जाता है। क्रिया-प्रतिक्रिया नियम के अनुसार गोली भी बंदूक को पीछे की ओर धकेलती है, जिससे बंदूक को भी पीछे की दिशा में एक संवेग प्राप्त हो जाता है।
  • यदि बंदूक चलाते समय बंदूक को शरीर (कंधे) से सटाकर रखा जाए तो निकाय (बंदूक + शरीर) का द्रव्यमान बढ़ जाने से संवेग भी बढ़ जाता है, जिससे गोली छूटने पर शरीर को पीछे की तरफ बहुत अधिक धक्का नहीं लगता है।
  • यदि समान द्रव्यमान की गोलियाँ दो अलग-अलग हल्की व भारी द्रव्यमान वाली बंदूकों से छोड़ी जाएँ तो भारी बंदूक से गोली दागते समय पीछे की तरफ धक्का कम लगेगा, जिससे कम चोट लगने की संभावना होगी।
  • जब विरामावस्था से आरंभ करके (शून्य संवेग) दो समान द्रव्यमान की गेंदें, समान वेग से चलना शुरू करती हैं अर्थात् दोनों वस्तुओं का संवेग समान है, यदि इन गेंदों की आपस में टक्कर हो जाए तो गति करती हुई गेंदें अचानक रुक जाती हैं अर्थात् संवेग पुनः शून्य हो जाता है अर्थात् 'टक्कर से पूर्व कुल संवेग = टक्कर के बाद कुल संवेग।'
  • संवेग संरक्षण के कारण ही जब कोई मनुष्य किसी स्थिर नाव से आगे कूदता है तो नाव पीछे खिसकती है। यदि मनुष्य का द्रव्यमान mM और नाव का द्रव्यमान mB है तथा मनुष्य VM के वेग से आगे कूदा तो संवेग संरक्षण के सिद्धांत के कारण ही नाव के पीछे खिसकने की चाल :

  • यदि कोई मनुष्य किसी पूर्णतः घर्षणहीन पृष्ठ पर खड़ा हो तो केवल सीटी बजाने या जूते उतारकर एक दिशा में फेंकने से ही वह स्वयं को विपरीत दिशा में गति में ला सकता है।

या

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  • न्यूटन के द्वितीय नियम के साथ संयोजन से न्यूटन के तृतीय नियम का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण परिणाम है। संवेग-संरक्षण (Conservation of momentum) के नियम के अनुसार एक या एक से अधिक वस्तुओं के निकाय (System) पर कोई बाहरी बल नहीं लग रहा हो, तो उस निकाय का कुछ संवेग नियत रहता है, अर्थात् संरक्षित रहता है।
  • जब बराबर संवेग वाली दो गेंदें आपस में टक्कर मारती हैं, तो गेंदें अचानक रुक जाती हैं। यहाँ निकाय (दोनों गेंदों) का कुल संवेग (Total momentum) टक्कर (Collision) के पूर्व शून्य रहता है और टक्कर के बाद फिर से शून्य हो जाता है, अर्थात् निकाय का कुल संवेग नियत या संरक्षित रहता है।
  • रॉकेट प्रणोदन (Rocket propulsion) किसी रॉकेट की उड़ान उन शानदार उदाहरणों में से एक है जिनमें न्यूटन का तीसरा नियम या संवेग-संरक्षण नियम स्वयं को अभिव्यक्त करता है। इनमें ईंधन की दहन से पैदा हुई गैसें बाहर निकलती हैं और इसकी प्रतिक्रिया रॉकेट को धकेलती है।

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