भूकंप के कारण | bhukamp ke karan

भूकम्प के कारण

पृथ्वी की क्रस्ट में पृथ्वी के चारों ओर कई बड़े और छोटे टेक्टोनिक प्लेट होते हैं। मुख्य भूकंप, विवर्तनिक प्लेटों के टकराने वाले बेल्ट में आते हैं और इन प्लेटों की सीमाएं एक अधिकेन्द्र के रूप में कार्य करती हैं। ये प्लेटें 3 प्रकार की सीमाएँ बनाती हैं- वे एक-दूसरे की ओर गति करती हैं (अभिसारी सीमा), एक-दूसरे से दूर गति करती हैं (अपसारी सीमा) या एक-दूसरे के साथ गति करती हैं (रूपांतरित सीमा)।
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सीमाओं के साथ-साथ इन विवर्तनिक प्लेटों की निरंतर गति, सीमाओं के दोनों किनारों पर दबाव बनाती है जब तक कि यह अत्यधिक न हो जाए और अचानक से झटके के साथ बाहर ने निकले। इस प्रकार, मुक्त ऊर्जा के कारण भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, ये पृथ्वी की सतह के माध्यम से गमन करती हैं, जिससे झटके उत्पन्न होते हैं, जिन्हें भूकंप के रूप में जाना जाता है।
भूकम्प के प्राकृतिक एवं मानवीय कारक हो सकते हैं, पर मुख्यतः यह प्राकृतिक कारणों का परिणाम है- जैसे ज्वालामुखी विस्फोट इत्यादि। मानवीय कारणों में खनन के दौरान किये गये विस्तृत उल्लेख निम्नवत् है।

भ्रंशन क्रिया द्वारा

पृथ्वी के भीतर अधिक गहराई पर तापमान और दाब बहुत अधिक होता है। यह दाब प्रत्येक स्थान पर समान नहीं होता कभी-कभी यह दाब इतना अधिक बढ़ जाता है, जिसके कारण गहराई पर स्थित चट्टानें मुड़ने लगती हैं और अन्ततः टूट जाती हैं, चट्टानों के टूटे हुए भाग ऊपर अथवा नीचे की ओर सरक जाते हैं, इसे भ्रंश (जियोलोजिकल फॉल्ट) कहते हैं।
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एक विशाल भूकम्प के आने के बाद पृथ्वी को स्थिर होने में समय लगता है और काफी समय तक हल्के-हल्के झटके आते रहते हैं, जिन्हें बाद के झटके (आफ्टर शॉक) कहते हैं।

प्लेट टेक्टोनिक कारण

भूकम्प का एक दूसरा कारण विवर्तनिक भी है।
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पृथ्वी के पटल को प्लेटों का बना हुआ माना गया है, ये प्लेटें सरकती रहती हैं और कभी-कभी दुसरी प्लेटों से टकरा भी जाती हैं, अत: इन प्लेटों के टकराने से भी भूकम्प आते हैं।

ज्वालामुखी भूकंप

जब किसी स्थान पर ज्वालामुखी उत्त्पन होता है तो कई घटनाये होते है जिसमे मैग्मा तेजी से बहार निकता है साथ में गैस और धूल भी निकलता है। जिसके कारण भूकंप भी उत्त्पन होता है।

अविवर्तनिक कारण

भूकम्प की उत्पत्ति के अविवर्तनिक (नॉन टेक्टोनिक) कारण भी होते हैं, जब ज्वालामुखी से उद्गार निकलते हैं तब भी पृथ्वी की सतह पर कम्पन होते हैं इसके अतिरिक्त चट्टानों के खिसकते, बम फटने अथवा भारी वाहनों और रेलगाड़ियों की तीव्र गति से भी कम्पन पैदा होता है, किन्तु इस प्रकार का भूकम्प बहुत हल्का होता है. तेज-से-तेज ज्वालामुखी भूकम्प एक मध्यम विवर्तनिक भूकम्प से हल्का होता है।

समस्थितिक समायोजन

अपरदन के विविध साधन महाद्वीपों के पदार्थों को काट-छाँटकर अधिकांशत: सागरों में निक्षेपित करते रहते हैं। इससे सागर की तली का भार अधिक हो जाता है। उन स्थानों की शैलें नीचे सती हैं। भूसन्तुलन स्थापित करने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में उत्थान की क्रिया होती है। इससे शैलों में विक्षोभ उत्पन्न होता है, जिससे भूकम्प आते हैं। हिन्दुकुश (1948). कांगड़ा (1905), चीन के कांसू प्रदेश (1920, 1927), असम (1897) में इसी प्रकार के भूकम्प उत्पन्न हुए थे।

प्रत्यक्ष पुनः चलन सिद्धान्त

भगार्भिक शैलें रबड की भाँति लचीली होती हैं। तलाव होने पर वे एक सीमा तक खिंचती हैं तथा अधिक तनाव होने पर वे टूट जाती हैं। टूटे हुए भूखण्ड पुनः खिंचकर अपना स्थान ग्रहण करते हैं, इससे भूकम्प उत्पन्न होते हैं। टूटे हुए भूखण्ड पुनः खिंचकर अपना स्थान ग्रहण करते हैं, इससे भूकम्प उत्पन्न होते हैं। बिहार (1944), असम (1950), उत्तर प्रदेश (1956), के भूकम्प इसी कारण उत्पन्न माने गये थे।

मानव जनित कारक

कभी कभी प्रकृति के साथ इंसानो का छेड़छाड़ आर्टिफीसियल जलजले का कारण बनता है. Nuclear टेस्ट की वजह से shock waves  पैदा होती है जिसके रिजल्ट से एक आर्टिफीसियल भूकंप पैदा होता है.
इस तरह का मानव निर्मित कम्पन्न  छोटे मोठे ज्वालमुखी के बराबर होती है. कई बार तो ऐसा होता है की लड़ाई के लिए बनाये जा रहे सामान में भी विस्फोट के कारण छोटा कम्पन्न पैदा हो जाता है. जो पहाड़ी इलाके होते हैं वहां रोड बनाने के लिए विस्फोट कर के चट्टानों को तोडा जाता है. खनिज पदार्थ निकालने के लिए भी और साथ ही तालाब, बाँध निर्माण के लिए विस्फोट कर के चट्टानों को तोड़ कर गड्ढा बनाया जाता है. इन सभी वजहों से छोटे मोठे जलजला पैदा होते हैं.

  • जब ज्वालामुखी विस्फोट होती है जिसके कारण कंपन उत्पन्न होती है जो भूकंप को जन्म देती है।
  • वलन या भ्रंश जैसी टेक्टोनिक क्रियाओं से भी भूकंप उत्पन्न होती है।
  • जब पृथ्वी की प्लेटों में असंतुलन उत्पन्न होती है तो भूकंप का जन्म होता है।
  • हिमखंड  या शिलाओं  के खिसकने तथा गुफाओं की छतों के धंस जाने या खानो की छतो के गिर जाने से भी भूकंप आता है।
  • बृहतआकार जलाशयों के जल भर से सतह  पर असंतुलित दबाव पड़ता है, जिसके कारण भूकंप उत्पन्न हो सकती है।

उत्पत्ति के कारणों के अनुसार

विवर्तनिक भूकम्प
इन्हें संरचनात्मक भूकम्प या भ्रंश मूलक भूकम्प भी कहते हैं। ये अधिकतर विवर्तनिक हलचलों के कारण भूखण्ड में भ्रंशन क्रिया से उत्पन्न होते हैं। पीरू में क्वीचेस (1946), जापान में नियोदानी क्षेत्र एवं संगामी खाड़ी क्षेत्र (1923), संयुक्त राज्य में कैलिफोर्निया (1986) में इसी प्रकार के भूकम्प आये थे।

ज्वालामुखी भूकम्प
पृथ्वी पर ज्वालामुखी एवं भूकम्प पेटियों में परस्पर गहरा सम्बन्ध पाया जाता है। अधिकांश ज्वालामुखियों के उद्गार से भूकम्प आते हैं। एण्डीज में गायातिरी (1959), इन्डोनेशिया में क्राकातोआ, कैलिफोर्निया के लासनपीक (1914) के भूकम्प ज्वालामुखी उद्गार के ही परिणाम थे।

समस्थितिक भूकम्प
उच्च पर्वतीय क्षेत्रों एवं निम्न डेल्टाई भागों में इस प्रकार के भूकम्प आते हैं।

वितलीय भूकम्प
ये भूकम्प भूगर्भ में 300 किमी. से 720 किमी. की गहराई पर उत्पन्न होते हैं। इनके विषय में बहुत कम ज्ञान प्राप्त है। स्पेन के सियरा नेवादा (1954) क्षेत्र में भूकम्प का उद्गम भूपटल से 630 किमी. गहराई पर था।

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