भारत का संविधान कब लागू हुआ? | bharat ka samvidhan kab lagu hua

भारत का संविधान कब लागू हुआ

भारत के संविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा। 26 जनवरी 1950 ई0 को भारत का संविधान लागू किया गया और हम हर वर्ष इस दिन को गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाते है।
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  • भारतीयों की ओर से संविधान सभा की सर्वप्रथम मांग मई, 1934 में रांची में स्वराज पार्टी ने की थी।
  • वर्ष 1934 में ही भारत में संविधान सभा के गठन का विचार एम.एन. राय ने दिया।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्तर पर पहली बार वर्ष 1935 में संविधान निर्माण के लिए आधिकारिक रूप से संविधान सभा की मांग की गई।
  • एक निर्वाचित संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान का निर्माण करने का प्रस्ताव सर्वप्रथम वर्ष 1942 में क्रिप्स मिशन द्वारा किया गया था।
  • कैबिनेट मिशन योजना, 1946 द्वारा भारतीय संविधान सभा का प्रातिनिधिक निर्वाचन के आधार पर गठन किया गया था।
  • कैबिनेट मिशन की रिपोर्ट के अनुसार, संविधान सभा निर्वाचित होनी थी और प्रांतों का प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर होना था।
  • इसके तहत मोटे तौर पर प्रति दस लाख व्यक्तियों पर एक प्रतिनिधि के निर्वाचन की व्यवस्था प्रस्तावित थी।
  • संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित थी।
  • इनमें से 296 सीटें ब्रिटिश भारत को तथा 93 सीटें देशी रियासतों को आवंटित की जानी थीं।
  • ब्रिटिश भारत को आवंटित 296 सीटों में से 292 सदस्यों का चयन 11 गवर्नरों के प्रांतों और 4 का चयन मुख्य आयुक्तों के प्रांतों (प्रत्येक में से एक) से किया जाना था।
  • देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।
  • संविधान सभा के लिए चुनाव जुलाई-अगस्त, 1946 में संपन्न हुआ।
  • 296 सीटों (ब्रिटिश भारत को आवंटित) में से कांग्रेस को 208, मुस्लिम लीग को 73 तथा छोटे समूह व स्वतंत्र सदस्यों को 15 सीटें मिलीं।
  • देशी रियासतों ने संविधान सभा में भाग नहीं लिया।
  • संविधान सभा अप्रत्यक्ष निर्वाचन का परिणाम थी।
  • राज्यों की विधानसभाओं का उपयोग निर्वाचक मंडल के रूप में किया गया।
  • यह निर्वाचन वयस्क मताधिकार पर आधारित था।
  • 1935 के अधिनियम के अनुसार, मताधिकार कर, शिक्षा एवं संपत्ति के आधार पर सीमित था।
  • 20 नवंबर, 1946 को वायसराय ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया कि वे 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में उपस्थित हों।
  • 9 दिसंबर, 1946 को सभा की पहली बैठक में कुल 207 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
  • 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की प्रथम बैठक की अध्यक्षता अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी।
  • 11 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को निर्विरोध संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया।
  • भारतीय संविधान के निर्माण में संविधान सभा को 2 वर्ष 11 माह एवं 18 दिन का समय लगा था।
  • इसके लिए कुल 11 अधिवेशन (कुल अवधि 165 दिन) हुए थे।
  • 11वें अधिवेशन के अंतिम दिन 26 नवंबर, 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया था।
  • इन 11 अधिवेशनों के अतिरिक्त संविधान सभा पुनः 24 जनवरी, 1950 को समवेत हुई, जब सदस्यों द्वारा भारत के संविधान पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • भारतीय संविधान के निर्माण के समय बेनेगल नरसिंह राव (बी.एन. राव) को सांविधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।
  • 26 नवंबर, 1949 को भारत के लोगों द्वारा संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया।
  • संविधान पूर्ण रूप से 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ
संविधान सभा में कुल महिलाओं की संख्या 15 थी।
उनके नाम इस प्रकार हैं-
  1. विजयलक्ष्मी पंडित
  2. राजकुमारी अमृत कौर
  3. सरोजिनी नायडू
  4. सुचेता कृपलानी,
  5. पूर्णिमा बनर्जी
  6. लीला राय
  7. जी. दुर्गाबाई
  8. हंसा मेहता
  9. कमला चौधरी
  10. रेणुका राय
  11. मालती चौधरी
  12. दक्षयानी वेलायुदन
  13. बेगम एजाज रसूल
  14. ऐनी मस्करीनी
  15. अम्मु स्वामीनाथन
  • ग्रेनविले ऑस्टिन ने कहा था कि 'संविधान सभा कांग्रेस थी और कांग्रेस भारत'।
  • 2 सितंबर, 1946 को अंतरिम सरकार का गठन किया गया, इसमें मुस्लिम लीग के सदस्य शामिल नहीं हुए हालांकि उनके शामिल होने के लिए विकल्प खुला रखा गया था। अंतत: 26 अक्टूबर, 1946 को जब सरकार का पुनर्गठन किया गया तब मुस्लिम लीग के पांच प्रतिनिधियों को कैबिनेट में शामिल किया गया।

संविधान सभा

भारतीय संविधान का निर्माण भारत की संविधान सभा द्वारा किया गया। संविधान सभा चुने गये जनप्रतिनिधियों की वह सभा होती है जो संविधान नामक विशाल दस्तावेज को लिखने का काम करती है। भारतीय संविधान सभा के लिए जुलाय 1946 ई0 में चुनाव हुए थे संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 ई. इसके अस्थायी अध्यक्ष डा. सचिदानन्द सिन्हा की अध्यक्षता मे हुई थी इसके तत्काल बाद देश दो हिस्सों भारत और पाकिस्तान में बंट गया था इसलिए संविधान सभा भी दो हिस्सों भारत की संविधान सभा और पाकिस्तान की संविधान सभा में बंट गयी । भारतीय संविधान सभा में 299 सदस्य थे डा. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान निर्मात्री सभा का स्थायी अध्यक्ष बनाया गया और डा. भीमराम अम्बेडकर को संविधान निर्माण की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया संविधान के प्रारूप की प्रत्येक धारा पर कई-कई दौर की लम्बी-लम्बी चर्चाएं हुई 114 दिनों की लम्बी चर्चाओं के बाद 26 नवम्बर 1949 ई० को संविधान का कार्य पूर्ण हुआ। मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी वर्तमान में भारत के संविधान में 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां है। भारत के संविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा। 26 जनवरी 1950 ई0 को भारत का संविधान लागू किया गया और हम हर वर्ष इस दिन को गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाते है।

पं. जवाहरलाल नेहरू संविधान पर हस्ताक्षर करते हुए।

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संविधान की परिभाषा

संविधान लिखित नियमों का एक ऐसा ग्रन्थ या किताब है जिसे किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के (जिन्हें नागरिक कहा जाता है ) बीच के आपसी संबन्ध तय होने के साथ -साथ लोगों और सरकार के बीच के सम्बन्ध भी तय होते है।
दूसरे शब्दों में संविधान में कुछ ऐसे सिद्धान्त तथा नियम तय कर लिए जाते हैं जिसके अनुसार किसी देश का शासन चलाया जाता है ,शासन के विभिन्न अंगों का संगठन किया जाता है तथा उनके आपसी सम्बन्धों को निर्धारित किया जाता है ।

संविधान की आवश्यकता

संविधान की आवश्यकता निम्नांकित कारणों से है।
  • यह साथ रह रहे लोगों के बीच जरूरी भरोसा और सहयोग विकसित करता है और सरकार और नागरिकों के आपसी सम्बन्धों को निर्धारित करता है।
  • संविधान यह स्पष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे होगा और किसे फैसले लेने का अधिकार है।
  • संविधान सरकार के अधिकारों की सीमा तय करता है और हमें बताता है कि नागरिकों के क्या अधिकार है।
  • संविधान ही सरकार की शक्ति तथा सत्ता का स्रोत है।
  • संविधान अच्छे समाज के गठन के लिए लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है।

भारतीय संविधान का निर्माण

पृष्ठभूमि स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान ही यह तय हो गया था कि आजाद भारत को किस रास्ते पर चलना चाहिए 1928 ई. में मोतीलाल नेहरू और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भारत का संविधान लिखा था 1931 ई. में कराची अधिवेशन में एक प्रस्ताव यह भी रखा था कि आजाद भारत का संविधान कैसा होगा 1935 ई. के भारत शासन अधिनियम 1937 ई. के प्रादेशिक असेंबलियों के चुनाव और भारतीय जनता के निरन्तर चिंतन,बहसों ने संविधान के निर्माण में मदद की। 1946 ई. के कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों के आधार पर बिट्रिश सरकार द्वारा भारत के लिए संविधान सभा के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

भारतीय संविधान के कुछ बुनियादी मूल्य


हम भारत के लोग
इसका तात्पर्य है भारत के संविधान का निर्माण और अधिनियमन भारत के लोगों ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से किया गया है।

समाजवादी
समाज में संपदा सामूहिक रूप से पैदा होती है और समाज में उसका बॅटवारा समानता के साथ होना चाहिए सरकार जमीन और उद्योग-धन्धों की हकदारी से जुड़े कायदे -कानून इस तरह बनाये कि सामाजिक -आर्थिक असमानताएं कम हों।

प्रभुत्व सम्पन्न
लोगों को अपने से जुड़े हर मामले में फैसले लेने का सर्वोच्च अधिकार है। कोई भी बाहरी शक्ति भारत की सरकार को आदेश नहीं दे सकती।

पंथ-निरपेक्षता
नागरिकों को किसी भी धर्म को मानने की पूरी स्वतन्त्रता है कोई भी धर्म राजकीय धर्म नहीं है। सरकार सभी धर्मों और आचरणों को समान सम्मान देती है। राज्य धर्म के आधार पर अपने नागरिकों के साथ कोई भेदभाव नहीं करेगा तथा धार्मिक मामलों में विवेकपूर्ण निर्णय लेगा।

लोकतन्त्रात्मक
सरकार का एक ऐसा स्वरूप जिसमें लोगों को समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं लोग अपने शासक का चूनाव करते हैं ,उसे जबाबदेह बनाते हैं। यह सरकार कुछ बुनियादी नियमों के अनुरूप चलती है। इसका आशय है कि देश का शासन जनता का जनता के लिए तथा जनता द्वारा होगा।

गणराज्य
गणराज्य से आशय यह है कि देश का प्रमुख जनता द्वारा चना व्यक्ति होगा न कि वंश परम्परा या किसी खानदान का व्यक्ति। इसीलिए भारत एक गणराज्य है क्योंकि भारत में राष्ट्र का प्रमुख, राष्ट्रपति जनता द्वारा निर्वाचित होता है।

न्याय
नागरिकों के साथ उनकी जाति धर्म और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा।

स्वतन्त्रता
नागरिक कैसे सोचें किस तरह अपने विचारों को अभिव्यक्त करें और अपने विचारों पर किस तरह अमल करें इस पर कोई अनुचित पाबंदी नहीं है।

समता
कानून के समक्ष सभी समान हैं पहले से चली आ रही सामाजिक असमानताओं को समाप्त करना होगा। सरकार हर नागरिक को समान अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे।

बंधुता
हम सभी ऐसा आचरण करें जैसे कि हम एक परिवार के सदस्य हों। कोई भी नागरिक किसी दूसरे नागरिक को अपने से कमतर न माने।

भारत के संविधान की प्रस्तावना का महत्व

भारत के संविधान की प्रस्तावना को अत्यधिक महत्व दिया जाता है इसके महत्व को निम्नांकित बिन्दुओं के आधार पर समझा जा सकता है।
  • संविधान की प्रस्तावना ही वह मार्ग दिखाती है जिस पर चल कर सरकार को अपनी नीतियां बनानी होती है।
  • संविधान की प्रस्तावना स्पष्ट घोषित करती है कि भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी,पंथनिरपेक्ष, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य है।
  • यह नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति,विश्वास,धर्म और उपासना की प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने का लक्ष्य घोषित करती है।
  • संविधान की प्रस्तावना के द्वारा ही राज्य व्यक्ति की गरिमा तथा प्रतिष्ठा को बनाये रखने को प्राथमिकता देता है।
  • संविधान की प्रस्तावना के द्वारा भारत के समस्त नागरिकों में बंधुता बढ़ाने का आहान किया गया है।
  • संविधान की प्रस्तावना भारत के समस्त नागरिकों से राष्ट्र की एकता तथा अखण्डता को बनाये रखने का आहान करती है।

गणतन्त्र दिवस
भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 ई0 को लागू किया गया था इसी लिए प्रतिवर्ष 26 जनवरी को गणतन्त्र दिवस मनाया जाता है इसकी पृष्ठभूमि में एक रोचक पहलू है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1929-30 के लाहौर अधिवेशन में भारतीयों के लिए पूर्ण स्वराज्य की मांग की गयी और यह तय किया 26 जनवरी 1930 से प्रतिवर्ष देश भर में स्वतन्त्रता दिवस मनाया जायेगा और जब देश 15 अगस्त 1947 ई० स्वतन्त्र हुआ तो 15 अगस्त को स्वतन्तत्रता दिवस मनाया जाने लगा। लेकिन 26 जनवरी की तिथि की ऐतिहासिकता को देखते हुए 26 जनवरी 1950 ई. को संविधान लागू किया गया और देश भर में 26 जनवरी को प्रतिवर्ष गणतन्त्र दिवस मनाया जाता है।

संविधान की विशेषताएं

भारत के संविधान की निम्नांकित विशेषताएं है।
  • भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। जिसमें 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां है।
  • भारतीय संविधान द्वारा भारत में सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न ,समाजवादी,पंथनिरपेक्ष, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य की स्थापना की गयी है।
  • भारतीय संविधान द्वारा भारत में एकात्मकता लिए हुए संघात्मक शासन की व्यवस्था की गयी है।
  • भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों के मौलिक अधिकारों की व्यवस्था की गयी है।
  • भारतीय संविधान द्वारा भारत में सर्वोच्च तथा स्वतन्त्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गयी है।
  • भारतीय संविधान नागरिकों के लिए इकहरी नागरिकता की व्यवस्था करता है।
  • भारतीय संविधान अनुच्छेद 17 के द्वारा अस्पृश्यता का अन्त करता है।

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