ईंधन (FUELS) |


ईंधन (FUELS) : उन पदार्थों को जिन्हें जलाकर ऊष्मा उत्पन्न की जाती है, ईधन कहते हैं, जैसे- लकड़ी, कोयला, मिट्टी का तेल आदि।
ईधन का वर्गीकरण :
मूल रूप के आधार पर इंधनों को दो भागों में बाँटा गया है।
(1) प्राथमिक ईंधन - कोयला, लकड़ी, पेट्रोल
(2) द्वितीयक ईंधन - जल गैस (CO+H2), प्रोड्यूसर गैस (CO+N2) ।

भौतिक अवस्था के आधार पर ईंधन के प्रकार -
(i) ठोस ईंधन - लकड़ी, कोयला, चारकोल, कोक
(i) द्रव ईंधन - पेट्रोल, डीजल, केरोसीन
(ii) गैसीय ईंधन - CNG, बायोगैस, प्राकृतिक गैस
बायोगैस -
बायोगैस (या जैव गैस) एक गैसीय ईंधन है जो पशुओं के अपशिष्ट पदार्थों (जैसे- गोरब आदि), मानव-मल तथा वनस्पतियों (पेड़-पौधों) के अवशेषों से तैयार की जाती है। जब बायो गैस पशुओं के गोबर से बनायी जाती है तो उसे गोबर गैस भी कहते हैं। बायोगैस कोई एक गैस नहीं वरन् विभिन्न गैसों का एक मिश्रण है। बायोगैस में पाये जाने वाले विभिन्न अवयवों के नाम हैंमेथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड का मिश्रण बायोगैस कहलाता है। जिसमें सर्वाधिक मात्रा में मेथेन गैस (65%) पायी जाती है।
तरल पेट्रोलियम गैस (एल.पी.जी.) -
यह एथेन, प्रोपेन तथा ब्यूटेन् का मिश्रण होती है। इसका मुख्य संघटक ब्यूटेन है जो आसानी से जलकर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा प्रदान करती है। उच्च दाब पर ब्यूटेन सुगमता से द्रवित हो जाती है। द्रवित रूप में यह ब्यूटेन सिलिण्डरों में भरकर सप्लाई की जाती है। इसे आमतौर पर तरल पेट्रोलियम गैस (liquified petroleum gas, L.P.G.) कहते हैं। स्पष्ट है कि इण्डेन जैसे घरेलू कैस के सिलिण्डरों में मुख्यतः द्रवित ब्यूटेन ही होती है। इसका ऊष्मीय मान 50kJ/gm होता है।
तरल पेट्रोलियम गैस अति ज्वलनशील गैस है और इसके रिसने से (लीक होने से) विस्फोट हो सकता है। गैस के रिसाव का पता लगाने के लिए इस तरल गैस में एक अत्यनत तीव्र दुर्गन्ध युक्त थोड़ा-सा एथिल मकैप्टन नामक यौगिक मिश्रित कर दिया जाता है।

प्राकृतिक गैस :
प्राकृतिक गैस में मुख्यत. मेथेन होती है। इसका निर्माण मेथेन, एथेन तथा प्रोपेन से किया जाता है। इसमें सर्वाधिक मात्रा में मेथेन गैस (95%) पायी जाती है। इसका ऊष्मीय मान सबसे अधिक (55 kJ/gm) होता है। प्राकृतिक गैस एक साफ-सुथरा तथा प्रदूषण रहित ईंधन माना जाता है।

पेट्रोल :
पेट्रोल एक जीवाश्मीय ईंधन है, जिसका उपयोग कार, मोटरसाइकिल आदि में किया जाता है। पेट्रोल इंजन में कार्बोरेटर द्वारा पेट्रोल और वायु का मिश्रण किया जाता है।


डीजल :
डीजल का उपयोग भारी वाहनों में किया जाता है, जिसमें टर्बाइन का उपयोग किया जाता है, जो डीजल और वायु को मिश्रित करता है।

प्रणोदक (Propellent) :
प्रणोदक का उपयोग राकेट ईंधन के रूप में किया जाता है। जिसका निर्माण द्रवित हाइड्रोजन सेल्युलोज, रबड़ आदि यौगिकों से किया जाता है। मनुष्य को चन्द्रमा तल पर ले जाने वाला प्रथम अपोलो राकेट में राकेट नोदक के रूप में मेथिल हाइजीन का प्रयोग किया गया था।