अर्थ ओवरशूट (Earth Overshoot) |

अर्थ ओवरशूट का अर्थ है कि पृथ्वी एक वर्ष में जितने संसाधन उत्पादित करती है, दुनिया भर की आबादी एक वर्ष से पहले ही जिस दिन तक उपयोग कर लेती है, उस दिन को ओवरशूट दिवस कहते हैं. वर्ष 2018 में धरती द्वारा उत्पादित जिस संसाधन को हमें 365 दिनों में उपभोग करना था, उसे हमने 212 वें दिन ही समाप्त कर दिया अर्थात् शेष 153 दिन हम पृथ्वी के संसाधनों का अति दोहन करेंगे.
अन्तर्राष्ट्रीय शोध संस्थान ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क का अध्ययन बताता है कि आज एक साल के लिए जितने संसाधन की जरूरत है, उसके लिए हमें 1.7 पृथ्वी की जरुरत है |


1969 में धरती एक साल में जितना संसाधन तैयार करती थी, पूरी दुनिया उसका इस्तेमाल करीब 13 महीने में करती थी. दिन बदले, तस्वीर बदली. आज 2018 में हम उन्हीं संसाधनों को 212वें दिन में ही खत्म कर दे रहे हैं. पिछले साल समाप्ति की तारीख दो अगस्त यानि 213वाँ दिन थी, एक साल में ही एक दिन घट गया. अगर दोहन इसी तरह चलता रहा, तो किसी भी अनहोनी के लिए मानव को तैयार रहना होगा, 2.5 भारत चाहिए हमारी साल भर की प्राकृतिक संसाधनों की पूर्ति के लिए 8.5 दक्षिण कोरिया चाहिए उनकी जरूरतों के लिए तो ब्रिटिश जरूरतों की पूर्ति के लिए करीब 4 ब्रिटेन की आवश्यकता है.



  
 अर्थ ओवरशूट डे


वर्ष
माह
1968-70
फरवरी से जनवरी (13 माह)
1971-75
फरवरी से दिसम्बर (12 माह)
1976-86
फरवरी से नवम्बर (11 माह)
1987-96
फरवरी से अक्टूबर (10 माह)
1997-04
फरवरी से सितम्बर (9 माह)
2005-18
फरवरी से अगस्त (8 माह)

5 पृथ्वी की जरूरत होगी यदि लोग अमरीकी लोगों की तरह रहें, 3 पृथ्वी की जरूरत जर्मनी और 2.2 पृथ्वी की जरूरत होगी यदि ब्रिटिश नागरिकों की तरह जीवन जिया जाए. विभिन्न देशों की प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की क्षमता के आधार पर यदि आकलन किया जाए, तो वियतनाम के लोग सबसे अच्छा जीवन व्यतीत कर रहे हैं और प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर चल रहे है. यदि वियतनाम या जमैका निवासियों की तरह जीवनशैली अपनाई जाए, तो प्राकृतिक संसाधनों का पूरे साल प्रयोग किया जा सकता है, वहीं इस मामले में सबसे खराब स्थिति कतर की है, जहाँ संसाधनों का दोहन मात्र 40 दिन में ही कर लिया जाता है.
2050 तक यदि यही स्थिति रही, तो पूरी दुनिया मात्र 5 दिन में पृथ्वी द्वारा प्रदत्त पूरे साल के संसाधनों का उपभोग कर लेगी. हम वर्तमान की जरूरतें पूरी करने के लिए धरती से भविष्य के संसाधन भी उधार लेते जा रहे हैं, लेकिन यह तरकीब एक वक्त तक ही काम कर सकती है, जब कर्ज या दोहन जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह उपाय काम करना बंद कर देता है.

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