जम्मू कश्मीर राज्य | Jammu Kashmir state



  • भारतीय संविधान में यह प्रावधान किया गया है कि अनुच्छेद 11 और 370 जम्मू-कश्मीर राज्य पर स्वतः लागू होंगे और शेष अनुच्छेदों का लागू होना राष्ट्रपति पर निर्भर होगा जो राज्य सरकार के परामर्श से निश्चित करेगा।
  • जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान से संबंधित वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है :
  • जम्मू कश्मीर के लिए एक पृथक संविधान की व्यवस्था हैं।
  • जम्मू-कश्मीर राज्य के संविधान में संशोधन की शक्ति संसद को प्राप्त नहीं है वरन् राज्य विधान सभा को प्राप्त है।
  • किन्तु यदि राज्य विधान सभा कोई ऐसा संशोधन पेश करती है, जिससे राज्यपाल या निर्वाचन आयुक्त की शक्तियाँ प्रभावित होती हैं तो ऐसे संशोधनों को प्रभावी होने के लिए उस पर राष्ट्रपति को स्वीकृति अनिवार्य होगी।
  • जम्मू-कश्मीर के नाम अथवा राज्यक्षेत्र में परिवर्तन इस राज्य के विधानमंडल की सम्मति के बिना संभव नहीं है। संसद में ऐसे विधेयक तभी पेश किये जा सकते हैं, जब राज्य विधानसभा इसके लिए पूर्व सहमति दे दे।
  • लेकिन अनुच्छेद 249 के अंतर्गत संसद को राष्ट्रीय हित में राज्यसूची के विषयों पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, जो जम्मू-कश्मीर राज्य के संदर्भ में भी लागू होता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 253 के अंतर्गत यदि किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि या समझौते से जम्मू-कश्मीर राज्य प्रभावित हो रहा हो तो बिना जम्मू कश्मीर राज्य की सहमति के ऐसा संधि या समझौता संभव नहीं है।
  • जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में नागरिकता का विशेष प्रावधान किया है, जबकि भारत में एकही नागरिकता का प्रावधान है, जम्मू-कश्मीर के लोगों को दोहरी नागरिकता प्राप्त है। एक भारत की नागरिकता और दूसरा, जम्मू-कश्मीर राज्य की नागरिकता।
  • 44वें संवैधानिक संशोधन द्वारा सम्पत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों की श्रेणी में निकाल दिया गया है, जबकि जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए सम्पत्ति का अधिकार आज भी मूलाधिकार है। इसके लिए एक नया अनुच्छेद-35 (क) जोड़ा गया है।
  • भारतीय संविधान के भाग-4 के नीति-निदेशक तत्वों संबंधी प्रावधान जम्मू-कश्मीर राज्य पर लागू नहीं होते। जम्मू-कश्मीर राज्य को नीति निर्माण संबंधी किसी प्रकार का आदेश केन्द्र द्वारा नहीं दिया जा सकता है।
  • अनुच्छेद-352 के अधीन सशस्त्र आंतरिक विद्रोह के आधार पर यदि राष्ट्रीय आपात काल की उद्घोषणा की जाती, तो उसका प्रभाव जम्मू-कश्मीर राज्य पर तब तक नहीं होगा, जब तक राज्य विधान मंडल उससे सहमत न हो।
  • संविधान के अनुच्छेद-356 के अंतर्गत सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने पर जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए राज्यपाल शासन का प्रावधान है। राज्यपाल को यह शक्ति होगी कि राष्ट्रपति की सहमति से वह राज्य सरकार के सभी या कोई कृत्य ग्रहण करे।
  • अनुच्छेद-360 के अधीन जम्मू-कश्मीर राज्य पर वित्त आपात काल नहीं लागू किया जा सकता है।
  • अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यद्यपि कि जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए राज्यपाल शासन की व्यवस्था है, लेकिन 6 महीने पश्चात् यह राष्ट्रपति शासन के रूप में परिणम हो जाता है।
  • उर्दू को जम्मू-कश्मीर को राजभाषा घोषित किया गया है, लेकिन शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के प्रयोग का प्रावधान तब तक के लिए किया गया है, जब तक विधानमंडल विधि द्वारा कोई अन्य उपबंध न कर दे।
  • विधान सभा की सदस्य संख्या 100 है, जिसमें 24 स्थान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के प्रतिनिधयों के लिए रखे गये हैं। राज्यपाल को दो महिला सदस्यों को मनोनीति करने की भी शक्ति प्राप्त है।