उत्परिवर्तन (Mutation)।

उत्परिवर्तन (Mutation)
किसी जीव के लक्षणों में आया अचानक परिवर्तन उत्परिवर्तन कहलाता है। उत्परिवर्तन जीन की संरचना में परिवर्तन के कारण होता है। जीन की संरचना में परिवर्तन 'पराबैगनी किरण कुछ रासायनिक पदार्थों और रेडियोधर्मी विकिरण के कारण होता है। उत्परिवर्तन लाभदायक एवं हानिकारक दोनों हो सकते हैं।

लाभदायक उत्परिवर्तन-
(i) डॉ. मुलर के कृत्रिम उत्परिवर्तन के प्रयोगों के आधार पर आज वैज्ञानिक विकिरण (एक्स किरणों पराबैगनी किरणों तथा कास्मिक किरणों) द्वारा पुष्प वाटिकाओं, फसलों, मछलियों तथा फलों में कृत्रम उत्परिवर्तन पैदा करके नयी-नयी उत्कृष्ट नस्लें तैयार कर रहे हैं।
(ii) काल्चिसिन- नामक रासायनिक पदार्थ द्वारा गेंदा व जीनिया (फूल) की बड़े फूलों वाली जातियाँ तैयार की जाती हैं।
(iii) भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान (I.A.R.I.) नई दिल्ली ने गामा विकिरण द्वारा अधिक प्रोटीन की मात्रा युक्त्त गेहूँ की सोनारा-64 तथा शर्वती सोनारा-64 किस्में (अल्प मात्रा की प्रोटीन वाली जीन को हटाकर अधिक प्रोटीन पैदा करने वाली जीन को गामा किरण द्वारा प्रत्यस्थापित किया जाता है। गामा किरण की तरंग दैर्ध्य कम तथा भेदन क्षमता और ऊर्जा अधिक होती है।) विकसित की है।
(iv) परमाणुवीय विकिरण द्वारा भी जन्तुओं एवं पौधों की नयी-नयी लाभप्रद जातियाँ उत्पन्न की जा रही हैं।
हानिकारक उत्परिवर्तन जीव की मृत्यु का कारण बनते हैं।
उत्परिवर्तन के फलस्वरूप नयी प्रजातियों (New Species) का जन्म होता है। जैसे- सफेद चूहे. छोटे पैर वाले भेंड, छोटे कान वाले खरगोश आदि। आज जीवों में दृष्टिगत हो रही विभिन्नता लगभग 2 अरब वर्षों का परिणाम है। उत्परिवर्तन सिद्धान्त के जनक 'ह्यगो डी ब्रीज' (Hugo de Vries) है।