आनुवंशिकता (Genetics)।


आनुवंशिकता (Genetics) -
1980 के बाद का समय जैव प्रौद्योगिकी (Bio Technology) का समय कहलाता है। (1940 का दशक प्लास्टिक का दश, 1950 का दशक- ट्राजिस्टर का दशक, 1960 का दशक- कम्प्यूटर दशक, 1970 का दशक- माइक्रो कम्प्यूटर का दशक कहलाता है।) यह विज्ञान की एक शाखा है, जिसमें ऐसे आनुवंशिक लक्षणों का अध्ययन किया जाता है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में माता-पिता से उनकी सन्ततियों को प्राप्त होते हैं।
आनुवंशिक गुणों (विशेषकों के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचने की प्रक्रिया को वंशागति या आनुवंशिकता (Heredity or Inheritance) कहते हैं। आनुवंशिक विशेषक (लक्षण/गुण) एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जीन (Gene) के माध्यम से स्थानान्तरित होते हैं।
ग्रेगर जान मेन्डल को आनुवंशिकता का जनक कहा जाता है। क्योंकि सर्वप्रथम मेंडल ने ही मटर के पौधे पर प्रयोग कर आनुवंशिकता के लक्षण को पहचाना था।

  • वह गुणसूत्र (Chromosome), जो आनुवंशिक गुणों को रासायनिक पदार्थ के रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को स्थानान्तरित करता है, 'जीन (Gene) कहलाता है।
  • 'गुणसूत्र (Chromosomes) न्यूक्लिक अम्ल ( DNA और RNA) और प्रोटीन से बने होते हैं। इनकी संख्या प्रत्येक जीव में अलग-अलग होती है। मनुष्य में ये 23 जोड़े होते हैं। केचुए में इनकी संख्या 32 होती है। इस गुण सूत्र के ऊपर जीन लगे होते हैं। इनकी संख्या मनुष्य की प्रत्येक कोशिका में 10000 से अधिक होती है।
  • न्यूक्लिक एसिड डी.एन.ए. और आर. एन. ए. से बना होता है। डी.एन.ए. कोशिका के केन्द्रक में पाया जाता है और प्रोटीन तथा आर.एन.ए. कोशिका के सभी भागों में पाये जाते हैं। डी.एन.ए. की मात्रा एक विशेष जाति के जीव या वनस्पति की प्रत्येक कोशिका में समान होते हैं, जबकि आर.एन.ए. की संख्या भिन्न-भिनन होती है।
  • डॉ. हरगोविन्द खुराना को 1968 में डी.एन.ए. निर्माण के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था। इन्होंने ही 1970 में प्रथम कृत्रिम मानव जीन का निर्माण किया था।

आनुवंशिक रोग (Genetic Disorder)।