मत्स्य वर्ग (Pisces)

कांड्रीक्थीज़ः
  • धारारेखीय शरीर वाले समुद्री प्राणी हैं जिनमें पृष्ठरज्जु चिरस्थायी रूप से पाई जाती है। इनके जबड़े शक्तिशाली होते हैं।
  • ये सभी मछलियाँ हैं जिनका हृदय दो प्रकोष्ठों वाला होता है। इनका अंत:कंकाल उपास्थिल (Cartilaginous) होता है। इनमें हड्डी नहीं पाई जाती।
  • वायु कोष या वाताशय की अनुपस्थिति के कारण ये डूबने से बचने के लिये लगातार तैरते रहते हैं।
  • इन प्राणियों में कुछ में विद्युत अंग (टॉरपीडो में) तथा कुछ में विष दंत (ट्रायगोन में) पाए जाते हैं।
  • ये असमतापी होते हैं तथा अधिकांशतः जरायुज अर्थात् बच्चे को जन्म देने वाले होते हैं।
  • उदाहरणः स्कॉलियोडोन (डॉग फिश), प्रीस्टिस (सॉफिश), कारकेरोडोन (विशाल सफेद शार्क), ट्राइगोन (व्हेलशार्क), ब्लू शार्क डॉग फिश को स्पेडनोज़ शार्क भी कहते हैं
  • हैमरहेड शार्क, ब्लू शार्क, बुल शार्क तथा स्मूदहॉन्ड्स बच्चे को जन्म देने वाली शार्क प्रजातियाँ हैं। स्कॉलिडॉन भी बच्चे को जन्म देती है।
  • अश्वमीन (समुद्री घोड़ा) भी एक प्रकार की मछली है।
  • शार्क में विषमपालि पूँछ (Heterocercal) पाई जाती है जो नीचे से छोटी और ऊपर से बड़ी होती है।

ऑस्टिक्थीज़ः
  • इस वर्ग की मछलियाँ लवणीय तथा अलवणीय दोनों प्रकार के जल में पाई जाती हैं।
  • इनका अंत:कंकाल अस्थिल (Bony) होता है। इनमें वायुकोष (Air Bladder) उपस्थित होता है जो उत्प्लावन में सहायक होता है। हृदय दो प्रकोष्ठों का होता है।
  • मछली का एयर ब्लैडर सहायक श्वसन अंग और द्रवस्थैतिक (Hydrostatic) अंग दोनों रूपों में कार्य करता है।
  • ये सभी असमतापी होते हैं एवं अधिकांशत: अंडा देने वाले होते हैं।
उदाहरणः समुद्री- एक्जोसिटस (फ्लाइंग फिश), हिप्पोकैंपस (समुद्री घोड़ा/सी हार्स); लवणीय जल: रोहू, कतला, मांगुर; एक्वेरियमः पेट्रोफिलम (ऐंजल फिश), बेट्टा (फाइटिंग फिश)

कॉड एक आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण समुद्री मछली है जो नार्थ अटलांटिक महासागर में पाई जाती है। यह अपने यकृत तेल (Liver Oil) हेतु प्रसिद्ध है।
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