अर्थशास्त्र क्या है?

अर्थशास्त्र क्या है?

अर्थशास्त्र-विषय
(ECONOMICS-THE DISCIPLINE)
किसी भी विषय का अध्ययन उसे परिभाषित करने की प्रक्रिया से शुरू होता है। अर्थशास्त्र भी इसका अपवाद नहीं है। किसी भी विषय की परिभाषा तय करने की प्रक्रिया आसान नहीं होती। आखिर में, हमें उसे परिभाषा को स्वीकार कर लेना होता है, जिसे हम आंशिक परिभाषा मान सकते हैं। अलग-अलग अर्थशास्त्री विषय को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। ऐसे में इनकी परिभाषाएं भी अलग-अलग होती हैं लेकिन एक कार्यकारी परिभाषा तय करने के लिए अलग-अलग परिभाषाओं के अंतर को कम करने की कोशिश की जाती है।

कार्यकारी परिभाषा पर पहुंचने से पहले, इस दिशा में की गयी दो अंतर्राष्ट्रीय रूप से मान्य कोशिशों का उल्लेख जरूरी है:
1. अर्थशास्त्र उस अवधारणा का अध्ययन है जो बताता है कि समाज किस तरह से दुर्लभ संसाधनों की मदद से मूल्यवान उत्पाद तैयार करता है और उसे विभिन्न लोगों के बीच वितरित करता है।
इस परिभाषा के नजरिए से देखें तो दो बातें अहम हैं। उत्पाद दुर्लभ हैं, और समाज को संसाधनों का इस्तेमाल प्रभावी ढंग से करना चाहिए। जाहिर है, अर्थशास्त्र एक महत्वपूर्ण विषय है जो संसाधनों की दुर्लभता और प्रभावी उपयोग की मांग का अध्ययन करता है।

पिछली आधी शताब्दी के दौरान अर्थशास्त्र के अध्ययन में विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है जो यह अलग-अलग छात्रों के विविध उद्देश्यों को पूरा करते हैं। कुछ पैसा बनाने के लिए अर्थशास्त्र पढ़ते हैं (विकसित देशों के ज्यादातर छात्र खुद को अमीर बनाने के लिए ही अर्थशास्त्र पढ़ते हैं। लेकिन यह विकासशील देशों के लिए सही नहीं है। अगर सामान्य तौर पर कहें तो विकासशील देशों में अर्थशास्त्र केवल पढ़ा और पढ़ाया जाता है, उसका प्रयोग नहीं होता)। गरीबी, बेरोजगारी, मानव संसाधन विकास, शेयर, लाभांश, बैंकिंग शब्दावली, मूल्य और उसमें आने वाला बदलाव, ई-कॉमर्स, इत्यादि के बारे में जानने के लिए भी कुछ लोग अर्थशास्त्र पढ़ते हैं। कुछ अन्य लोग अपनी जानकारी को बढ़ाने के लिए भी अर्थशास्त्र पढ़ते हैं।

2. व्यक्ति, फर्म, सरकार एवं अन्य संस्थाएं समाज में अपने विकल्पों का चयन कैसे करते हैं और यह चयन संसाधनों के उपयोग में समाज को किस तरह से प्रभावित करता है इसका अध्ययन ही अर्थशास्त्र कहलाता है।
मानव जीवन पृथ्वी पर मौजूद संसाधनों से बनाए गए कई तरह के उत्पादों के उपयोग पर निर्भर करता है। मानवों की चाहत की कोई सीमा नहीं है।

हमारी जरूरतों और चाहतों को पूरा करने के लिए हमें असीमित संसाधनों की जरूरत है। लेकिन संसाधन सीमित हैं! ऐसी स्थिति में व्यक्ति एवं मानव समाज सीमित संसाधनों से अपनी प्रतिस्पर्धी आवश्यकताओं की पूर्ति कैसे करता है इन्हें ही सोचना है। इसका मतलब यह है कि दुर्लभ संसाधनों के उपयोग से पहले हमें अपनी जरूरतों को प्राथमिकता के हिसाब से तय करने की जरूरत है। इस प्रक्रिया के चलते, कुछ लोगों की जरूरत कभी पूरी नहीं हो पाएगी। इस दौरान यह भी सही है कि कुछ लोगों की कुछ जरूरतें सीमित संसाधनों के बावजूद कई बार पूरी हो सकती है।

बहरहाल, अर्थशास्त्र वह विषय है जिसके तहत यह अध्ययन किया जाता है कि व्यक्ति, समाज और सरकार किस तरह से अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से संसाधनों का इस्तेमाल अपनी आवश्यकतानुसार करते हैं। ऐसे विकल्प का चयन कला भी है और विज्ञान भी। मानव समाज द्वारा चुने गए विकल्प जो समय और स्थान के साथ बदलते रहते हैं, के अध्ययन को ही अर्थशास्त्र कहते हैं। यह मानव जीवन के अध्ययन से जुड़ा बेहतरीन विषय है।

कार्यकारी परिभाषा (A Working Definition)
किसी भी विषय को पढ़ने के लिए उसे महसूस करना भी जरूरी है। इसकी शुरुआत विषय की परिभाषा से ही होती है। लेकिन परिभाषाओं के साथ मुश्किल यह है कि ज्यादातर समय में परिभाषाएं काफी उलझाने वाली और तकनीकी शब्दों से भरी होती हैं। कई बार तो यह आम लोगों की समझ से बाहर की बात होती है। अर्थशास्त्रों के छात्रों को भी कई बार परिभाषाएं समझ में नहीं आती हैं। यही वजह है कि परिभाषा को बेहद सहज और सर्वसुलभ बनाने की जरूरत है।
मानव अपने रोजमर्रा के जीवन में कई तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं। इन गतिविधियों को आप विभिन्न वर्गों में बांट सकते हैं सामाजिक, राजनैतिक, आदि।

अर्थव्यवस्था मानव समाज की आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन है। ठीक इसी तरह से राजनीतिक गतिविधियों का अध्ययन राजनीतिक विज्ञान, सामाजिक गतिविधियों का अध्ययन सामाजिक विज्ञान और प्रशासनिक गतिविधियों का अध्ययन लोक प्रशासन कहलाता है। चूंकि यह सब मानव गतिविधियों का अध्ययन है, लिहाजा इसे मानविकी कहते हैं।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आर्थिक गतिविधियां क्या हैं? लाभ, हानि, आजीविका, पेशा, मजदूरी, रोजगार इत्यादि आर्थिक गतिविधियां कहलाती हैं। इन सब गतिविधियों का अध्ययन अर्थशास्त्र में होता है। वर्तमान समय में अर्थशास्त्र की कई शाखाएं हैं और उनके तहत आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन ग्लोबल, मैक्रो और माइक्रो स्तर पर होता है।
कभी आपने सोचा है, कुछ लोग किफायती कार का इस्तेमाल क्यों करते हैं और कुछ लोग ईंधन फूंकने वाली स्पोर्ट्स कार का इस्तेमाल क्यों करते हैं? गरीब लोग गरीब क्यों हैं? क्या पूंजीवाद आर्थिक असमानता को बढ़ाता है? क्या भूमंडलीकरण से अमीर और गरीब के बीच की खाई कम हुई है? ऐसे ही ढेरों सवाल अर्थशास्त्र के दायरे में आते हैं। आज के समय में सूचना प्रौद्योगिकी ने भी अर्थशास्त्र को नया आयाम दिया है।

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