राज्य सरकारों की आय के मुख्य स्रोत (साधन) | Sources of income of state governments

राज्य सरकारों की आय के मुख्य स्रोत

राज्य सरकारों की विभिन्न मदों से प्राप्त होने वाली आय को मुख्य रूप से दो भागों में विभक्त किया जा सकता है-
  • I. कर राजस्व तथा
  • II. गैर-कर राजस्व
राज्य की आय में गैर-कर राजस्व की अपेक्षा कर राजस्व का अधिक योगदान होता है। राज्य सरकार की आय की मदों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-
  • भू-राजस्व व मालगुजारी- यह एक प्राचीन कर है। सन् 1948 ई० तक कुल आय का लगभग आधा कर भू-राजस्व या मालगुजारी से प्राप्त होता था। जमींदारी प्रथा के उन्मूलन के बाद इस मद से प्राप्त होने वाली आय में धीरे-धीरे कमी होने लगी है। इसका भुगतान फसल के समय किया जाता है। सूखा, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक संकट से फसल नष्ट होने पर भू-राजस्व में उदारतापूर्वक छूट दी जाती है।
  • बिक्री कर- बिक्री कर राजस्व की आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत (साधन) है। यह एक अप्रत्यक्ष कर है, जिसे सन् 1948 ई० में लागू किया गया था। यह विभिन्न वस्तुओं की बिक्री पर लगाया जाता है, किन्तु विक्रेता इसके भार को मूल्य में वृद्धि करके क्रेताओं पर टाल देते हैं। उत्तर प्रदेश में इसके स्थान पर अब व्यापार कर लगाया गया है।
  • राज्य उत्पादन कर- यह राज्य की आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। यह एक परोक्ष कर है, जिसे सामान्यत: ऊँची दरों की मादक वस्तुओं; जैसे- शराब, गाँजा, अफीम, चरस, ताड़ी इत्यादि; पर लगाया जाता है।
  • स्टाम्प व पंजीयन शुल्क- स्टाम्प शुल्क प्राय: दो प्रकार का होता है- (i) न्यायिक स्टाम्प, (ii) व्यापारिक स्टाम्प। न्यायिक स्टाम्प न्यायालय में मुकदमा या अन्य कार्यवाही के लिए लगाया जाता है, जबकि व्यापारिक स्टाम्प सम्पत्ति के हस्तान्तरण उपहार अथवा व्यापारिक सौदों पर लगाया जाता है। इसी प्रकार पंजीयन (रजिस्ट्री) शुल्क राज्य सरकार की आय का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
  • कृषि आयकर- कृषि आयकर राज्य सरकार की आय का प्रमुख स्रोत था। भारत के अनेक राज्यों में कृषि को आयकर से मुक्त रखा गया है, किन्तु उत्तर प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र पर कर लगाती है। जमींदारी उन्मूलन के बाद कृषि आयकर से प्राप्त आय में पर्याप्त कमी हुई है और अब यह आय का एक नाममात्र का स्रोत ही रह गया है।
  • केन्द्र सरकार से अनुदान या सहायता- केन्द्र सरकार राज्यों को संविधान की व्यवस्थाओं के अन्तर्गत सहायता प्रदान करती है। आयकर, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सम्पदा शुल्क आदि से प्राप्त आय का कुछ भाग केन्द्र सरकार वित्त आयोग की संस्तुतियों (सिफारिशों) के आधार पर राज्यों में वितरित करती है। इसके अतिरिक्त, राज्यों को कभी-कभी बाढ़, सूखा या अन्य प्राकृतिक विपदाओं से निपटने के लिए केन्द्र द्वारा विशेष सहायता प्रदान की जाती है।
  • वाहन कर- दो-पहिया वाहन, मोटर, ट्रकों इत्यादि पर राज्य द्वारा कर लगाया जाता है। यह प्रदेश सरकार की आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
  • माल व यात्रियों पर कर- राज्य सरकार को माल व यात्रियों पर कर से भी पर्याप्त आय प्राप्त होती है।
  • मनोरंजन कर- राज्य सरकार द्वारा मनोरंजन स्थलों, सिनेमाघर, चलचित्रों आदि पर मनोरंजन कर लगाए जाते हैं। यह भी सरकार की आय का एक अच्छा स्रोत है।
  • विद्युत कर- विद्युत पर कर लगाया जाता है। इससे राज्य सरकार को पर्याप्त आय प्राप्त होती है।
  • सरकारी उपक्रमों से आय- उत्तर प्रदेश सरकार को सरकारी उपक्रमों; जैसे वन, सिंचाई, बिजली, सार्वजनिक निर्माण, सार्वजनिक उद्योगों से भी आय प्राप्त होती है। सड़क परिवहन व जल परिवहन भी राज्य की आय के मुख्य स्रोत हैं।
  • सामान्य प्रशासन- सामान्य प्रशासन के अन्तर्गत न्यायालय, जेल, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, सहकारिता इत्यादि क्षेत्र आते हैं। इनसे राज्य सरकार को प्राप्त होने वाली आय कम है।
  • मूल्य संवद्धित कर- यह वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान के प्रत्येक बिन्दु पर प्राथमिक उत्पादन से लेकर अन्तिम उपभोग पर लगाया जाता है। यह उत्पाद की बिक्री और उसमें प्रयुक्त आदाओं की लागतों के अन्तर पर लगाया जाता है।
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