केन्द्र सरकार की आय के स्रोत क्या है? | What is the source of income of Central Government?

केन्द्र सरकार की आय के स्रोत

भारतीय संविधान के अन्तर्गत केन्द्र सरकार की आय के स्रोतों को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है-
  1. कर साधनों से प्राप्त आय एवं
  2. गैर-कर साधनों से प्राप्त आय।

कर साधनों से प्राप्त आय

केन्द्र सरकार की करों से प्राप्त आय के साधन निम्नलिखित हैं-
  • सीमा शुल्क- इसे आयात-निर्यात कर भी कहते हैं। देश से बाहर जाने वाले माल पर निर्यात कर और देश के अन्दर आने वाले माल पर आयात कर लगाया जाता है। विदेश व्यापार में निरन्तर वृद्धि होने के कारण, सीमा शुल्क केन्द्र सरकार की आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बन गया है।
  • केन्द्रीय उत्पादन कर- ये कर उत्पादित वस्तु पर केन्द्र सरकार द्वारा लगाए जाते हैं। वर्तमान में यह सीमेण्ट, कपड़ा, बिजली का सामान, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, डीजल, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन, तम्बाकू, चाय, कॉफी, जूट व रेशम आदि के सामान के उत्पादन पर लगाया जाता है। यह केन्द्र सरकार की आय का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
  • आयकर- यह एक प्रत्यक्ष कर है और व्यक्तियों की आय पर लगाया जाता है। भारत में आयकर सर्वप्रथम सन् 1950 ई० में लगाया गया था। वर्ष 2013-14 के अनुसार 2 लाख रु० तक की आय कर-मुक्त है। विभिन्न आय क्रमों पर मानक कटौती का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। कर की दर 2 लाख से ऊपर और 5 लाख रु० तक 10 प्रतिशत; 5 लाख से 10 लाख रु० तक 20 प्रतिशत और 10 लाख रु० से अधिक पर 30 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है। महिलाओं के लिए भी 2 लाख रु० तक की आय कर मुक्त है। कर की दर 2 लाख से ऊपर और 5 लाख तक 10 प्रतिशत, 5 से 10 लाख तक 20 प्रतिशत तथा 10 लाख से अधिक पर 30 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए 2.50 लाख रु० तक की आय कर मुक्त है। 2.50 लाख से ऊपर 5 लाख तक 10 प्रतिशत, 5 लाख से 10 लाख तक 20 प्रतिशत तथा 10 लाख से अधिक पर 30 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है।
  • निगम कर- निगम कर आयकर का एक प्रकार है जो कम्पनियों की निवल आय या लाभ पर लगाया जाता है। निगम कर वस्तुतः देश के औद्योगिक विकास से जुड़ा हुआ है इसीलिए अन्य प्रत्यक्ष करों की तुलना में इससे प्राप्त होने वाले राजस्व में तेजी से वृद्धि हुई है।
  • धन अथवा सम्पत्ति कर- यह कर प्रो० काल्डोर के सुझाव पर भारत में 1 अप्रैल, 1957 ई० से लगाया गया था। यह कर व्यक्तियों की सम्पत्ति पर लगाया जाता है। किसी व्यक्ति के पास कुल जितनी सम्पत्ति है, उसमें से उसके द्वारा लिये गए ऋणों की राशि घटाकर जो शेष बचता है, उस पर यह कर लगाया जाता है। यह कर 10 लाख रु० से अधिक की सम्पत्ति पर लगाया जाता है।
  • मृत्युकर- मृत्युकर (आस्तिकर) भारत में 1953 ई० में लगाया गया था। यह कर व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी चल व अचल सम्पत्ति पर लगाया जाता है। कर चुकाने का दायित्व मृतक के समस्त उत्तराधिकारियों पर होता है। वर्ष 1985-86 ई० में इस कर को समाप्त कर दिया गया है।
  • उपहार कर- यह कर प्रो० काल्डोर के सुझाव पर भारत में सन् 1958 ई० में लगाया गया था। वर्ष 1990-91 ई० से उपहार कर अदा करने का दायित्व उपहार प्राप्तकर्ता का हो गया है। अधिक आय प्राप्त न होने के कारण वर्ष 1999-2000 ई० से इसे समाप्त कर दिया गया है। अब यह व्यवस्था की गई है कि उपहारों को उपहार ग्रहण करने वाले व्यक्ति की आय में जोड़ा जाएगा।
  • सेवा कर- यह कर विभिन्न प्रकार की प्रदत्त सेवाओं पर लगाया जाता है। 17 सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाओं को कर दायरे में लाया जाता है। वर्ष 2012-13 के बजट में सेवाकर की दर को बढ़ाकर 10 से 12 प्रतिशत कर दिया गया है।

गैर-कर साधनों से प्राप्त आय

गैर-कर आय स्रोतों में निम्नलिखित मदें सम्मिलित हैं
  • ब्याज प्राप्तियाँ- केन्द्र सरकार राज्यों, केन्द्रशासित प्रदेशों एवं केन्द्रीय संस्थानों को ऋण देती है। इन ऋणों पर ब्याज की प्राप्ति होती है।
  • मुद्रा, सिक्का ढलाई एवं टकसाल- केन्द्र सरकार को नोट छापने एवं सिक्का ढलाई का एकाधिकार प्राप्त है। इससे भी सरकार को आय प्राप्त होती है।
  • लाभांश व लाभ- इसके अन्तर्गत भारतीय रिजर्व बैंक, अन्य राष्ट्रीयकृत व्यापारिक बैंक व केन्द्र सरकार के व्यावसायिक उपक्रमों से प्राप्त लाभ को सम्मिलित किया जाता है।
  • सामान्य सेवाओं से आय- इस मद के अन्तर्गत लोक सेवा आयोग, पुलिस, रेल, रक्षा सेवाएँ आदि मदों से प्राप्त आय सम्मिलित की जाती है।
  • सार्वजनिक उपक्रमों से आय- इसमें सार्वजनिक संस्थानों से प्राप्त आय सम्मिलित होती है; जैसे-इण्डियन ऑयल, प्राकृतिक तेल एवं गैस आयोग, राज्य व्यापार निगम, डाक-तार, रेल आदि से प्राप्त आय। वर्तमान में इन उपक्रमों के घाटे पर चलने के कारण यह आय निरन्तर कम होती जा रही है।
  • सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाएँ- सामाजिक व सामुदायिक सेवाओं में मुख्य हैं—शिक्षा, चिकित्सा, परिवार नियोजन, सफाई व जल आपूर्ति, आवास, नगर विकास, सूचना एवं प्रसार, सामाजिक सुरक्षा व कल्याण आदि। इनसे भी केन्द्र सरकार को आय प्राप्त होती है।
  • आर्थिक सेवाएँ- इनमें मुख्य रूप से सहकारिता, कृषि, लघु सिंचाई, भू-संरक्षण, पशुपालन, डेयरी विकास, मछली उद्योग, ग्रामोद्योग व लघु उद्योग, खनन व खनिज पदार्थ, बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ, विद्युत विकास सेवाएँ, सड़कें व पुल आदि आते हैं। इन सेवाओं से भी केन्द्र सरकार को आय प्राप्त होती है।
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