राज्य अर्थव्यवस्था क्या है?

अर्थव्यवस्था के इस प्रारूप का पहली बार सिद्धांत जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स ने (1818-1883) दिया था, जो एक व्यवस्था के तौर पर पहली बार 1917 की वोल्शेविक क्रांति के बाद सोवियत संघ में नजर आई और इसका आदर्श रुप चीन (1949) में सामने आया।
यह अर्थव्यवस्था पूर्वी यूरोप के कई देशों में प्रचलित हुई। राज्य अर्थव्यवस्था की दो अलग-अलग शैलियां नजर आती हैं, सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को समाजवादी अर्थव्यवस्था कहते हैं जबकि 1985 से पहले चीन की अर्थव्यवस्था को साम्यवादी अर्थव्यवस्था कहते हैं।
समाजवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर सामूहिक नियंत्रण की बात शामिल थी और अर्थव्यवस्था को चलाने में सरकार की बड़ी भूमिका थी वहीं साम्यवादी अर्थव्यवस्था में सभी संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण था यहां तक श्रम संसाधन भी सरकार के अधीन ही थे। इसमें सरकार के पास सारी शक्तियां मौजूद होती हैं। मार्क्स के मुताबिक समाजवाद, साम्यवाद के रास्ते में बदलाव का समय है लेकिन यह वास्तविकता में कभी होता नहीं है।
मूल रूप से इस अर्थव्यवस्था की उत्पत्ति ही पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की लोकप्रियता के विरोध में हुई। इसमें हर विपरीत बातों को शामिल किया गया। इसमें उत्पादन, आपूर्ति और कीमत सबका फैसला सरकार द्वारा लिया जाता है। ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को केंद्रीकृत नियोजित अर्थव्यवस्था कहते हैं, जो गैर-बाजारी अर्थव्यवस्था होती है।
समाजवादी और साम्यवादी अर्थव्यवस्था पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की शोषण के नाम पर आलोचना करती हैं। इसके जवाब में पूँजीवादी अर्थशास्त्री इसे राज्य पूँजीवाद कहते हैं, जहां केवल सरकार शोषक होती है।
1980 के मध्य तक साम्यवादी और गैर-साम्यवादी नजरिए से बौद्धिक जमात में गंभीर बहस हुआ करती थी।

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